विश्वकर्मा पूजा हर साल उन लोगों के लिए खास मानी जाती है. जिनका काम निर्माण, शिल्प, मशीनों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ा है. पौराणिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है. मान्यता है कि उन्होंने कई दिव्य नगरियों, भवनों, रथों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा केवल निर्माण कला के प्रतीक नहीं हैं बल्कि मेहनत, हुनर और कुशलता का भी संदेश देते हैं.
क्यों कहा जाता है देवताओं का वास्तुकार
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि भारतीय परंपरा में किसी के उपकार और उसके विशेष योगदान के प्रति सम्मान जताने की परंपरा रही है. भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, वास्तुकला, शिल्पकला और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है. इसी वजह से कारीगर, इंजीनियर, बढ़ई, शिल्पकार और मशीनों से जुड़े लोग उन्हें विशेष रूप से पूजते हैं.
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भगवान विश्वकर्मा ने क्या-क्या बनाया
उन्होंने बताया कि पौराणिक कथाओं और महाकाव्य परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को कई महत्वपूर्ण निर्माणों से जोड़ा गया है. मान्यता के अनुसार उन्होंने सोने की लंका, भगवान कृष्ण की द्वारका और देवताओं के लिए दिव्य भवनों का निर्माण किया. पुष्पक विमान और इंद्र के वज्र जैसे दिव्य अस्त्रों के निर्माण का श्रेय भी उन्हें दियाा जाता है. अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इन कथाओं के विवरण में अंतर मिलताा है.
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शिव के त्रिशूल और विष्णु के सुदर्शन चक्र से भी संबंध
उन्होंने आगे बताया कि कुछ पौराणिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को भगवान शिव के त्रिशूल और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के निर्माण से भी जोड़ा जाता है. एक प्रसिद्ध कथा में सूर्य के तेज को कम करने के बााद उससे प्राप्त दिव्य ऊर्जा से इन अस्त्रों के निर्माण का उल्लेख मिलता है.
विश्वकर्मा पूजा पर मशीनों और औजारों की पूजा क्यों
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और शिल्प का अधिष्ठाता मानने के कारण उनके पर्व पर मशीनों, औजारों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करने की परंपरा है. फैक्ट्रियों, कार्यशालाओं और दूसरे कार्यस्थलों पर लोग मशीनों की सफाई कर उनकी पूजा करते हैं. यह परंपराा काम और हुनर के प्रति सम्मान का प्रतीक भी माानी जाती है.
मेहनत और हुनर का देते हैं संदेश
भगवान विश्वकर्मा की पूजा का संबंध केवल मशीन या औजार से नहीं है. इससे यह संदेश भी जुड़ा है कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता. उसे लगन, ईमानदारी और कुशलता से करनाा महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि विश्वकर्मा पूजा को श्रम, सृजन और तकनीकी कौशल के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है.
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