विश्वकर्मा पूजा का पर्व हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है, जिन्हें देवताओं का शिल्पकार माना गया है. खास तौर पर कारखानों, दुकानों, गैरेज और ऑफिस में मशीनों, औजारों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कुछ नियमों का पालन करने से भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मिलता है. आइए आचार्य मदन मोहन से जानते हैं कि विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए.
कार्यस्थल और औजारों की करें सफाई
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि पूजा से पहले दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस या गैरेज की अच्छी तरह सफाई करें. मशीनों और औजारों को भी साफ करके पूजा के लिए तैयार करें. काम से जुड़े औजार, मशीन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पूजा करें. इन पर रोली या सिंदूर से स्वास्तिक बनाकर फूल और अक्षत चढ़ाएं। पूजा के दौरान 'ॐ विश्वकर्मणे नमः' मंत्र का जाप कर सकते हैं.
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कारीगरों और कर्मचारियों का करें सम्मान
इसके अलावा, विश्वकर्मा पूजा कामगारों के योगदान को सम्मान देने का भी अवसर मानाा जाता है. इस दिन कर्मचारियों, कारीगरों, मिस्त्रियों और मजदूरों को प्रसाद या अपनी क्षमता के अनुसार उपहाार देकर उनका सम्मान करें.
मशीन और औजार चलाने से बचें
धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दिन औजारों और मशीनों को विश्राम दिया जाता है. इसलिए संभव हो तो पूजा के बाद इनका इस्तेमाल करने से बचें. औजारों पर पैर लगानाा या उन्हें लापरवाही से फेंकना भी उचित नहीं माना जाता है.
तामसिक भोजन और विवाद से बचें
आचार्य ने बताया कि इस दिन मांस, मछली, अंडा और शराब जैसी तामसिक चीजों के सेवन से बचना चाहिए. साथ ही कर्मचारियों या सहयोगियों के साथ बेवजह विवाद न करें. जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करनाा भी शुभ माना जाता है.
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