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हरतालिका तीज व्रत का पारण कैसे करें? जानिए समय और पूजा विधि

हरतालिका तीज व्रत का पारण आज मंगलवार, 15 सितंबर को किया जाएगा. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. हरतालिका तीज के दिन पूजा करके और व्रत के माध्यम से महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद भगवान से प्राप्त होता है.

हरतालिका तीज व्रत का पारण कैसे करें? जानिए समय और पूजा विधि
हरतालिका तीज व्रत पारण?

सनातन धर्म में हरतालिका तीज व्रत को सभी व्रतों में महत्वपूर्ण माना जाता है. हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है. हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखा जाता है. इस साल हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर को रखा गया. हरतालिका तीज व्रत का पारण आज मंगलवार, 15 सितंबर को किया जाएगा. चलिए आपको बताते हैं हरतालिका तीज व्रत का पारण कैसे करें और पूजा विधि क्या है.

हरतालिका तीज व्रत का पारण कैसे करें?

महिलाओं का यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. हरतालिका तीज के दिन पूजा करके और व्रत के माध्यम से महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद भगवान से प्राप्त होता है. इसके अलावा विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को रखती हैं, क्योंकि हिंदू ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि यह व्रत उन्हें अच्छा जीवनसाथी पाने में मदद करता है. हरतालिका तीज पर महिलाएं अपने व्रत की शुरुआत सूर्योदय के साथ करती हैं और इस दिन पूजा करने का विधान प्रदोष काल तक रहता है. व्रत के अगले दिन जैसे 15 सितंबर को, जब सूर्योदय सुबह 5:54 बजे के आसपास हो. सूर्योदय के बाद स्नान और पूजन संपन्न करके जल या प्रसाद ग्रहण करें.

इस व्रत को पारण करते समय महिलाओं को विशेष सावधानियां रखनी चाहिए. महिलाओं को व्रत स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनना चाहिए और फिर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करना चाहिए. फिर पूजा के बाद महिलाओं को भगवान को प्रसाद अर्पित करना चाहिए. इसके बाद जल पीकर प्रसाद ग्रहण कर तीज का व्रत खोल लेना चाहिए. इसमें ध्यान रखने वाली बात यह है कि महिलाओं को तीज का व्रत लहसुन, प्याज और नमक वाले खाने से नहीं खोलना चाहिए.

पारण एवं पूजन विधि

स्नान- सुबह जल्दी उठकर घर और पूजा स्थल की सफाई करें. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें.

शिव-गौरी पूजन- भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा और क्षमा प्रार्थना करें.

चौकी विसर्जन- पूजन के बाद पुष्प, बेलपत्र और सामग्री को संभालें. कलश का विसर्जन या पूजन पूरा करें.

प्रसाद या अन्न ग्रहण- सबसे पहले पूजा के प्रसाद या पवित्र अन्न-जल से व्रत का पारण करें.

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