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This Article is From Aug 29, 2025

बस एक फोन और लुट गए 1.29 करोड़... डिजिटल अरेस्ट करके 100 वर्षीय बुजुर्ग के खाते कर दिए खाली

ठगी के शिकार 100 वर्षीय बुजुर्ग हरदेव सिंह मर्चेंट नेवी से रिटायर हैं. कुछ दिन पहले एक शख्स ने फोन करके खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए धमकाया और 6 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा.

बस एक फोन और लुट गए 1.29 करोड़... डिजिटल अरेस्ट करके 100 वर्षीय बुजुर्ग के खाते कर दिए खाली
  • लखनऊ में रहने वाले मर्चेंट नेवी से रिटायर बुजुर्ग हरदेव सिंह को अनजान नंबर से फोन आया
  • फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई अफसर बताकर डराया और 6 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा
  • बुजुर्ग के बेटे ने डर के मारे 1.29 करोड़ रुपये ठगों के बताए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए

साइबर अपराधी इतने शातिर हो चुके हैं कि फोन की एक घंटी से जिंदगी की कमाई लूट ले रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट लोगों को डराने-ठगने का सबसे बड़ा हथियार बन गया है. लखनऊ में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 100 साल के रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अफसर को 1.29 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया. ठगों ने 6 दिन तक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट रखा. 

सीबीआई अधिकारी बनकर किया फोन

ठगी के शिकार हरदेव सिंह मर्चेंट नेवी से रिटायर हैं. लखनऊ में रहते हैं. कुछ दिन पहले उन्हें एक अनजान नम्बर से फोन कॉल आती है. फोन करने वाला खुद को सीबीआई अधिकारी बताता है और बुजुर्ग पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए वॉरंट निकलने और अरेस्टिंग की बात बताता है. फोन पर सख्त अंदाज में पूछताछ से हरदेव सिंह घबरा जाते हैं. 

6 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा

बुजुर्ग पर शिकंजा कसने के लिए एक दूसरा ठग दूसरे नंबर से फोन करता है. उसी तरह की बातें दोहराता है. ठग तरह-तरह से उन्हें डराते-धमकाते हैं और बुजुर्ग की बैंक डिटेल्स और अन्य जानकारियां ले लेते हैं. शाम को जब बुजुर्ग का बेटा घर लौटा तो उन्होंने उसे पूरी बात बताई. वॉरंट और अरेस्ट की बात सुनकर बेटा भी डर गया. इसके बाद ठगों ने बाप-बेटे दोनों को खूब डराया-धमकाया. 6 दिन तक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करके प्रताड़ित किया. 

डरे सहमे बेटे ने ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में कुल 1.29 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर कर दी. ठगों ने अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम मंगाई. वेरिफिकेशन के तुरंत बाद रुपये लौटाने का भरोसा दिया. लेकिन जब तय समय तक रुपये वापस नहीं मिले तो पीड़ित परिवार को ठगी का अहसास हुआ.  

पीड़ित की शिकायत पर मुकदमा दर्ज

रुपये  डरे-सहमे बुजुर्ग और उनके बेटे ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर फोन किया और पूरी घटना बताई. इसके बाद लखनऊ के सरोजनीनगर थाने में पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया. पुलिस ठगों के मोबाइल नंबर के आधार कर मामले की जांच में जुटी है.

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?

यह साइबर ठगों का एक नया तरीका है, जिसमें वे फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं. खुद को पुलिस, सीबीआई या इनकम टैक्स अधिकारी बताते हैं और झूठा केस बताकर डराते हैं. पीड़ित को तुरंत डिजिटल अरेस्ट में लिए जाने की बात कहते हैं. डर और दबाव में कई लोग उनके झांसे में आ जाते हैं और रुपये लुटा बैठते हैं.
 

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