- डॉक्टर ओम तनेजा और डॉक्टर इंदिरा तनेजा ने डिजिटल अरेस्ट के जरिये करोड़ों की धोखाधड़ी का शिकार होने की बात कही
- धोखाधड़ी करने वालों ने उन्हें फोन पर धमकी देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और मनी लॉड्रिंग के आरोप लगाए थे
- आरोपियों ने महाराष्ट्र कोलाबा पुलिस के वीडियो कॉल दिखाकर फर्जी अरेस्ट वारंट और एफआईआर का हवाला दिया था
डिजिटल अरेस्ट और धोखाधड़ी के जरिये करीब 15 करोड़ की रकम गंवाने वाले एनआरआई दंपति ने अपनी आपबीती सुनाई है.पीड़िता महिला ने बताया कि 24 दिसंबर की दोपहर को उनके पास ऑडियो कॉल आई थी कि आपका नंबर काटा जा रहा है, क्योंकि आपके फोन से अश्लील कॉल की गई हैं, 26 लोगों ने शिकायत की है. मनी लॉड्रिंग की शिकायत भी आपके खिलाफ है. हम आपका टेलीफोन कट कर रहे हैं. मैंने किसी को अश्लील मैसेज नहीं भेजे हैं. मैं कोई हवाला कारोबार या मनी लॉड्रिंग में शामिल नहीं हूं.
डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी बीवी डॉक्टर इंदिरा तनेजा से 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच डिजिटल अरेस्ट के जरिये ये धोखाधड़ी हुई.दंपति लगभग 50 साल तक अमेरिका में निवास करने के साथ संयुक्त राष्ट्र में भी सेवा की. सेवानिवृत्ति के बाद 2015 में दोनों भारत आ गए थे. डॉक्टर दंपति 2015 से चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिये गरीब मरीजों की सेवा में जुटे थे.वो खुद लोगों को साइबर क्राइम के प्रति आगाह करते थे, लेकिन खुद ही इसका शिकार हो गए.
महिला ने बताया, जब नंबर के बारे में पूछा तो धोखाधड़ी करने वालों ने एक नंबर भी दिया.मैंने उनसे कहा कि ये नंबर तो मेरा है ही नहीं. लेकिन वो बोले कि आपके खिलाफ अरेस्ट वारंट है. आपके खिलाफ एफआईआर है. फिर उन्होंने महाराष्ट्र कोलाबा पुलिस से मुझे वीडियो कॉल से कनेक्ट कर दिया. वो पुलिस वर्दी में थे. केनरा बैंक में आपके अकाउंट से मनी लॉड्रिंग की गई है. नरेश गोयल नाम के किसी शख्स को ये भेजा गया है. वीडियो कॉल करने वालों ने यह भी कहा कि 300 से 500 करोड़ का फ्रॉड किया है.
दिल्ली: साइबर जालसाजों ने एक बुजुर्ग प्रवासी दंपत्ति से "डिजिटल गिरफ्तारी" के नाम पर 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए.
— NDTV India (@ndtvindia) January 11, 2026
पीड़ितों ने बताया कि दूरसंचार अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करने वाले लोगों ने फर्जी कॉल और वीडियो बातचीत के जरिए उन्हें फंसाया और उन पर मनी… pic.twitter.com/gbHqPl0WrY
पीड़िता ने कहा, उन्हें बोला गया कि ये नेशनल डिफेंस का मामला है. राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. मैंने उन्हें बताया कि मेरे हसबैंड की एम्स सर्जरी हुई है. हम दोनों वॉकर पर चलते हैं. फिर उन्होंने वेरीफिकेशन की बात कही. आपको ये बातें किसी को नहीं बताना है. वो बार बार कहते रहे कि किसी को भी ये नहीं बताना है. ड्राइवर को भी नहीं. अगर आपने राष्ट्रीय सुरक्षा का ये मामला लीक कर दिया तो बहुत बड़ी मुसीबत में फंस जाओगे.
फिर तमाम संदिग्ध लोगों, सिम कार्ड, आधार कार्ड और तमाम दस्तावेज दिखाए. फिर उन्हें ज्यादा दहशत और भय से भर दिया कि हम सोचने लगे कि हमारे साथ क्या हो रहा है. हम घबरा गए.
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