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'सहवाग' नाम के साथ उम्मीदों का बोझ, पिता की उपलब्धियों का कितना दबाव? आर्यवीर ने दिया जवाब

आर्यवीर हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की जूनियर टीम के खिलाफ एक्शन में थे, जहां उन्हें स्लेजिंग का सामना करना पड़ा. वीरेंद्र सहवाग के बेटे ने अपने पिता की विरासत के दबाव पर खुलकर बयान दिया है.

'सहवाग' नाम के साथ उम्मीदों का बोझ, पिता की उपलब्धियों का कितना दबाव? आर्यवीर ने दिया जवाब
पिता की उपलब्धियों का कितना दबाव? आर्यवीर ने दिया जवाब

एक मशहूर सरनेम के साथ अपना अलग तरह का दबाव भी आता है. आर्यवीर सहवाग इसे अच्छी तरह समझते हैं. उनके पिता, वीरेंद्र सहवाग भारत के जबरदस्त ओपनर रहे, जिन्होंने क्रांति ला दी थी. जबरदस्त हैंड-आई कोऑर्डिनेशन और बहुत हिम्मत के साथ, सीनियर सहवाग भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक बने. उनके नाम टेस्ट में दो ट्रिपल सेंचुरी हैं और वह यह कारनामा करने वाले वे अकेले भारतीय हैं. उन्होंने तीनों इंटरनेशनल फॉर्मेट में 17,000 से ज्यादा रन बनाए हैं. अब उनके बेटे, आर्यवीर ने भी क्रिकेट में अपना सफर शुरू कर दिया है.

18 साल के इस खिलाड़ी ने हाल ही में दिल्ली प्रीमियर लीग में वेस्ट दिल्ली लायंस के लिए दो मैच खेले. उन्होंने यूथ वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इंडिया अंडर-19 का भी प्रतिनिधित्व किया. उनके स्कोर 28, 47 और 34 रहे. आर्यवीर ने स्पोर्टस्टार को बताया,"अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद मैं तीनों मैचों में बड़ी पारी नहीं खेल पाया. आखिरी मैच में भी अच्छी शुरुआत के बाद छक्का मारने की कोशिश में आउट हो गया. इसलिए मैं काफी निराश था."

आर्यवीर ने आगे कहा,"मैंने सीखा है कि अगर आप बड़े रन बनाना चाहते हैं तो आपको खेल को अलग-अलग चरणों में बांटना होगा और लंबी पारी खेलनी होगी. अगर आप क्रिकेट जगत में नाम कमाना और सम्मान पाना चाहते हैं, तो बड़े रन मायने रखते हैं."

उन्हें पता है कि उनके मशहूर सरनेम की वजह से उन पर काफी ध्यान दिया जाएगा और विरोधी खिलाड़ी इसका इस्तेमाल उन पर दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं. उन्होंने कहा,"मुझे अपने सरनेम और अपने पिता की उपलब्धियों पर बहुत गर्व है. मुझे अपने पिता के नाम की वजह से कोई दबाव या बोझ महसूस नहीं होता. उन्होंने भारत के लिए जो किया है, उस पर मुझे बहुत गर्व है."

दाएं हाथ के बल्लेबाज ने आगे कहा,"मैं ऐसी सोच बनाने की कोशिश कर रहा हूं जिसमें मैं खुद से कहूं कि लोगों की बातें सिर्फ उनकी राय हैं, और वे मुझ पर ज़्यादा असर नहीं डालतीं, चाहे वे अच्छी हों या बुरी, चाहे वे मेरी तारीफ़ कर रहे हों या आलोचना. मैं शांत दिमाग रखने और सिर्फ़ अपनी प्रक्रिया और अपनी बल्लेबाज़ी पर ध्यान देने की कोशिश करूंगा. यही बेहतर है."

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अनुभव को अच्छा बताते हुए आर्यवीर ने कहा,"सच कहूं तो, पहला मैच काफी रुकावटों वाला रहा." "बारिश चार-पांच घंटे तक होती रही. इसलिए, जाहिर है, मेरे डेब्यू मैच से पहले घबराहट थी.फिर, बारिश और बाकी चीज़ों की वजह से हमें खाली बैठना पड़ा, और शरीर भी काफी ठंडा पड़ गया था." उन्होंने कहा,"ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ अच्छी रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे. मुझे उनके खिलाफ खेलने में मजा आया, इसलिए जाहिर है कि इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा."

आर्यवीर ने अपने पिता की सलाह के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा,"वह हमेशा मुझसे कहते हैं कि बैटिंग को बहुत आसान रखना चाहिए. अगर कोई ऐसी गेंद है जिस पर आप शॉट मार सकते हैं, तो मारिए.अगर आप उसे छोड़ सकते हैं, तो छोड़ दीजिए. और अगर आपको उसे डिफेंड करना है, तो डिफेंड कीजिए. डैड मुझसे कहते हैं कि टेक्निक के बजाय मेंटल पहलू पर ज़्यादा ध्यान दूं क्योंकि जाहिर है, सोशल मीडिया पर बहुत कुछ कहा जाता है." "मैं उनका (कोहली का) बहुत बड़ा फैन रहा हूं. मैं उनसे दो-तीन बार मिला हूं और वह अनुभव बहुत अच्छा रहा.

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