- जबलपुर रायपुर एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को बदलने वाला है.
- यह दोनों राज्यों के बीच एक लाइफलाइन की तरह काम करेगा, जिससे बड़ा फायदा होगा.
- जबलपुर और रायपुर एक्सप्रेसवे से दोनों शहरों के बीच की दूरी भी 4 घंटे में पूरी होगी.
जबलपुर से रायपुर का सफर अब महज 4 घंटे में पूरा हो जाएगा. दोनों शहरों के बीच बनने वाला 6-लेन एक्सप्रेसवे मध्य भारत की कनेक्टिविटी को पूरी तरह से बदल देगा. जबलपुर, नरसिंहपुर से होते हुए यह मंडला, डिंडोरी से छत्तीसगढ़ में एंट्री करेगा और कवर्धा, बेमेतरा से होते हुए रायपुर तक जाएगा. खास बात यह है कि जबलपुर रायपुर एक्सप्रेसवे भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है. जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है. दोनों राज्यों की तरफ से डीपीआर संयुक्त रुप से तैयार होगी, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द उज्जैन के सिंहस्थ आयोजन से पहले करने की तैयारी हो रही है. क्योंकि यह भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से कनेक्ट रहेगा. जिससे यह पूरे कॉरिडोर का काम करेगा.
जबलपुर से रायपुर का सफर 4 घंटे में पूरा होगा
जबलपुर से रायपुर जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 30 (NH-30) की दूरी लगभग 350 किलोमीटर बन जाती है. घुमावदार पहाड़ी रास्तों और सिंगल-लेन पैचेस के कारण इस दूरी को तय करने में अभी 6 से 7 घंटे का समय लग जाता है. लेकिन अब इसी मार्ग को अब 6 लेन में अपग्रेड किया जाएगा. जबलपुर से मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा जो चिल्फीघाटी तक जाने वाले मार्ग चमचमाता 6-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाया जा रहा है. सीमा में प्रवेश करने के बाद यह एक्सप्रेसवे चिल्फीघाटी, कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा होते हुए राजधानी रायपुर से जुड़ेगा. ऐसे में इस मार्ग से जबलपुर से रायपुर जाने के लिए महज 3.5 या फिर 4 घंटे में यह सफर पूरा हो जाएगा. इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण से दोनों शहरों के बीच की दूरी वर्तमान 320 किलोमीटर से घटकर मात्र 255 किलोमीटर रह जाएगी.
एमपी-छत्तीसगढ़ की नई लाइफलाइन
- जबलपुर
- नरसिंहपुर
- मंडला
- डिंडौरी
- चिल्फीघाटी (मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ की सीमा)
- कवर्धा
- बेमेतरा
- सिगमा
- रायपुर

क्यों खास है यह हाईवे
जबलपुर-रायपुर एक्सप्रेसवे केवल एक हाईवे नहीं है. बल्कि यह भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे और आगे चलकर रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा. इसका सीधा फायदा
यह होगा कि मध्य प्रदेश के सागर, दमोह, जबलपुर के वाहन इस नए रूट से होते हुए छत्तीसगढ़ पार कर सीधे आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम बंदरगाह तक बेहद कम समय में पहुंच सकेंगे. इसलिए इस परियोजना को मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की नई लाइफलाइन कहा जा रहा है. क्योंकि यह भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर से होते हुए रायपुर से आगे जाकर विशाखापट्टनम जैसे बड़े शहर को जोड़ देगा.
सिंहस्थ-2028 से पहले पूरा करने की तैयारी
जबलपुर रायपुर एक्सप्रेसवे की परियोजना को लेकर जमीनी स्तर पर काम शुरू हो चुका है. अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने इसे मंजूर किया था. भूमि अधिग्रहण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को आखिरी रूप दिया जा रहा है. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा वाले चिल्फीघाटी के दुर्गम रास्तों को चौड़ा करने की योजना पर भी मुहर लग चुकी है. जिसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब शुरू होगी. एमपी और छत्तीसगढ़ की तरफ से डीपीआर की प्रक्रिया आखिरी दौर में है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का लक्ष्य आगामी कुछ सालों में इस रूट को पूरी तरह से यातायात के लिए खोलने का है. उज्जैन सिंहस्थ के पहले इसे पूरी तरह से सुचारू रूप से तैयार किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक का पूरा खेल ही बदल जाएगा.
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