टीम इंडिया ने अगले साल तीन देशों में होने वाले फिफ्टी-फिफ्टी वर्ल्ड कप की तैयारियों की उल्टी गिनती एक तरह से शुरू हो गई है. प्लानिंग के स्तर पर काम रिव्यू मीटिंग के साथ पहले ही शुरू हो चुका है, तो हेड कोच गौतम गंभीर भी अगरकर विवाद के बाद रोहित को लेकर बैकफुट पर चले गए हैं. बहरहाल, कुछ स्टार खिलाड़ियों को लेकर गौतम का रवैया अभी भी जस का तस है और अब उन्होंने हालिया बातचीत में स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को फिर से कड़ा संदेश जारी कर दिया है. अब जब 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों के अपने आखिरी 12 महीनों में प्रवेश करने के साथ ही हार्दिक पंड्या की लंबी अनुपस्थिति एक बड़ा चर्चा का विषय बन गई है. रविवार से तिरुवनंतपुरम में शुरू होने वाली वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में भारतीय टीम मैदान पर उतरेगी. हालांकि, एक बार फिर चोट लगने के कारण उबर रहे पंड्या को इस टीम में शामिल नहीं किया गया है.
वनडे सीरीज से पहले बोलते हुए गंभीर ने कहा, 'अगर आप हार्दिक की बात करें, तो बहुत कम टीमों के पास ऐसा खिलाड़ी होता है जो आपके लिए 10 ओवर गेंदबाजी कर सके. साथ ही नंबर छह या सात पर बल्लेबाजी कर सके. साथ ही मैच पर वैसा प्रभाव डाल सके, लेकिन उन्हें गेम टाइम की भी जरूरत है क्योंकि आईपीएल के बाद उन्होंने ज्यादा क्रिकेट नहीं खेला है.'
दूर रह सकते हैं पांड्या
उन्होंने कहा, 'इसलिए अगर ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि उन्हें 50 ओवर का फॉर्मेट खेलना ही है, तो वह क्रिकेट से दूर रह सकते हैं. वर्ल्ड कप में उतरने के लिए गेम टाइम बेहद, बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. आप वहां अधपके रूप में नहीं जा सकते. इसलिए आपके पास पर्याप्त गेम टाइम होना चाहिए. आपकी लय इतनी अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि वर्ल्ड कप में जाने पर कोई 'अगर-मगर' नहीं होता है.' मतलब जब गंभीर हार्दिक को विश्व कप को ध्यान में रखते हुए फिट रहने के लिए क्रिकेट से दूर रहने की बात कर रहे हैं, तो साफ है कि यहां पांड्या को दस ओवर के कोटे का ध्यान रखना होगा. और यही उनका यहां से सबसे बड़ा चैलेंज है.
इस चैलेंज पर खरे उतरेंगे पांड्या?
कुल मिलाकर हेड कोच ने दूसरी बार हार्दिक पांड्या के सामने स्थिति साफ करते हुए उनकी चुनौती को साफ-साफ स्पष्ट कर दिया है. और इस चैलेंज के तहते पांड्या को अगर अगले विश्व कप के लिए टीम में जगह बनानी है, तो उन्हें मैच 10 ओवर फेंकना सुनिश्चित करना होगा. और वास्तव में पिछले कुछ सालों में हार्दिक की कमर सहित बाकी चोटों की स्थिति और वर्कलोड मैनेजमेंट को देखते हुए यह बहुत बड़ा चैलेंज होने जा रहा है. वैसे सवाल यह भी है कि जब दस ओवर फेंकने ही होंगे, तो मैनेजमेंट की बात कितनी प्रासंगिक है, यह भी देखना होगा.
बड़े चैलेंज को अब इस पहलू से भी समझें
वास्तव में पांड्या ने यह चैलेंज अपने लिए खुद ही खड़ा किया हुआ है. वर्तमान तारीख से लेकर पिछले दो साल के भीतर पांड्या ने सिर्फ 8 ही वनडे मैच खेले. इसमें उन्होंने 32.82 के औसत से 1904 रन बनाए, तो खाते में सिर्फ 7 ही विकेट जमा हुए. प्रदर्शन को किनारे रख दें, तो दो साल में सिर्फ 7 ही वनडे खेलना सारी कहानी अपने आप में बयां कर देता है. मतलब साफ था कि पांड्या खुद ही वनडे खेलने के लिए न मानकि रूप से तैयार थे, न ही शारीरिक रूप से. पिछले दो साल में टीम इंडिया और चयन के समीकरण बहुत ही ज्यादा बदल गए हैं. संतुलन का स्तर कहीं ऊंचा चला गया है. और अगर गंभीर पांड्या से 10 ओवर का कोटा सुनिश्चित करने की बात साफ-साफ बोल रहे हैं, तो वह गलत नहीं बोल रहे!
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