- वैष्णवी शर्मा ने पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ T20I में भारत के लिए पदार्पण किया था और पांच विकेट लिए थे
- उनके पिता ज्योतिषी नरेंद्र शर्मा ने पहले ही बताया था कि वैष्णवी खेलों या चिकित्सा के क्षेत्र में जाएंगी
- उन्होंने 7 साल की उम्र में क्रिकेट में गंभीरता से प्रशिक्षण शुरू किया और U16 स्तर पर मध्य प्रदेश के लिए खेला
Vaishnavi Cricket Journey: वैष्णवी शर्मा ने पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में भारत के लिए पदार्पण किया था और ग्वालियर की 20 साल की बाएं हाथ की स्पिनर का कहना है कि उनके ज्योतिषी पिता नरेंद्र शर्मा ने उनके भविष्य के बारे में बता दिया था कि वह क्रिकेटर बनेंगी. उनका कहना है कि खिलाड़ी बनना उनकी किस्मत में लिखा था. वैष्णवी ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, 'जब मैं चार साल की थी तो खेलों में मेरा सफर शुरू हुआ. जैसा कि आप सभी जानते हैं, मेरे पिता एक ज्योतिषी हैं. उन्होंने मेरी कुंडली देखी और कहा कि मुझे या तो खेलों में जाना चाहिए या चिकित्सा के क्षेत्र में.'
उन्होंने कहा, 'उसके बाद, यह सवाल था कि मेरी दिलचस्पी किसमें है. कुछ समय बाद, उन्हें समझ आया कि मेरी दिलचस्पी खेलों में है. जब मैं सात साल की थी तो मैंने और गंभीरता से खेलना शुरू किया जैसे शाम को अभ्यास सत्र के लिए जाना.'

वैष्णवी ने कहा, 'और जब मैं 11-12 साल की थी तो मैंने मध्य प्रदेश के लिए अपना पहला अंडर-16 मैच खेला. तब यह भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अंतर्गत नहीं था, लेकिन सही में मेरा सफर वहीं से शुरू हुआ.'

श्रीलंका के खिलाफ पांच मैच की श्रृंखला में वह पांच विकेट लेकर भारत के लिए संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली खिलाड़ी रहीं.

उन्होंने कहा, 'जब मैंने क्रिकेट शुरू किया, तो यही मेरा लक्ष्य था. मैंने कभी किसी दूसरे लक्ष्य पर ध्यान नहीं दिया. जब भी मैं मैदान पर जाती हूं, तो मैं बाकी सब कुछ भूल जाती हूं क्योंकि क्रिकेट खेलने के बाद जो अहसास मुझे होता है, वह मुझे किसी और चीज से नहीं मिलता.'

हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा है. वैष्णवी ने माना कि श्रीलंका के लिए चुने जाने से पहले उन्हें उम्मीद थी कि महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) की नीलामी में कोई फ्रेंचाइजी उन्हें चुन ही लेगी लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें निराशा हुई.

पर उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि इसका असर घरेलू टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन पर नहीं पड़े. उन्होंने कहा, 'बेशक, जब उम्मीदें होती हैं तो बहुत बुरा लगता है. मुझे भी ऐसा लगा था. लेकिन उस समय मैं एक टूर्नामेंट खेल रही थी, इसलिए मेरा पूरा ध्यान अपनी टीम पर था. अंडर-23 मेरे लिए एक बड़ा मंच था इसलिए मैंने अपना ध्यान सिर्फ उसी पर लगाए रखा.

उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा कि मैं वही कर सकती हूं जो मेरे हाथ में है और बाकी भगवान पर छोड़ देती हूं. मैंने मैदान पर कभी वह निराशा नहीं दिखाई. मैं दुखी थी, मैंने अपने परिवार से बात की. मेरे दोस्तों, माता-पिता, भाई और सीनियर खिलाड़ियों सभी ने मुझे फ़ोन किया. मैंने उस चीज पर ध्यान दिया जो मेरे हाथ में थी.'

कुछ हफ्ते बाद वैष्वणी की लगन रंग लाई और उन्हें पहली बार इंडिया टीम में बुलाया गया. इस खिलाड़ी ने कहा कि विश्व कप जीतने वाली खिलाड़ियों से भरे ड्रेसिंग रूम में जाना एक भावनात्मक पल था.

उन्होंने कहा, 'मैं बहुत नर्वस थी. मैं सोच रही थी, उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी, मैं बातचीत कैसे शुरू करूंगी? लेकिन जब मैं वहां पहुंची तो सभी ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया, मुझसे बात की और मुझे बहुत सहज महसूस कराया. मैं उनके साथ बहुत अच्छे से घुल-मिल गई.'

वैष्णवी कहती है कि वह भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर की लड़ने की भावना को अपना आदर्श मानती है जबकि स्मृति मंधाना के खेल के प्रति नजरिए से प्रेरित होती हैं.

उन्होंने कहा, 'स्मृति दी और हरमन दी मेरी आदर्श हैं. मैंने एक बार स्मृति का इंटरव्यू देखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वह टीम के लिए कुछ भी योगदान देती हैं तो वह उस दिन जश्न मनाती हैं और फिर अगली सुबह फिर से शून्य से शुरू करती हैं. हरमन दी से मैंने कभी हार नहीं मानने वाला जज्बा सीखा है.'
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