हाल ही में एक समय सचिन तेंदुलकर से बड़ी प्रतिभा आंके गए पूर्व बल्लेबाज विनोद कांबली का वीडियो जारी हुआ, तो यह देखते ही देखते तूफान सा वायरल हो गया. कांबली ने ठाणे के 'निदान सेंटर फॉर एल्डरली केयर' से एक वीडियो मैसेज शेयर किया. इस वीडियो में बात करते हुए कांबली की जुबां लड़खड़ा रही है. और यह वीडियो देखते ही करोड़ों फैंस उनकी सचिन से तुलना करने लगे. फैंस बातें करने लगे कि एक तरफ देखो सचिन अभी भी कितने यंग दिखते हैं, तो कांबली का यह क्या हाल हो गया. वीडियो के वायरल होते ही फैंस उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करने लगे. बहरहाल, विनोद कांबली की एक समय तूती बोलती थी. टेस्ट क्रिकेट में लगातार दो दोहरे और फिर शतक का रिकॉर्ड उनके नाम पर है. बहरहाल, क्रिकेट इतिहास में कांबली से अलग ऐसे कई और क्रिकेट हुए हैं, जो देखते ही देखते राजा से रंक बन गए. चलिए कांबली से अलग ऐसे ही 7 और क्रिकेटरों के बारे में जान लीजिए:

1. जनार्दन नवले (भारत)
जनार्दन नवले भारतीय क्रिकेट इतिहास के पहले विकेटकीपर बल्लेबाज थे, जिन्होंने 1932 में लॉर्ड्स के मैदान पर भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट की सबसे पहली गेंद खेली थी. उस जमाने में क्रिकेट सिर्फ शौक या सम्मान का खेल हुआ करता था, जिसमें आज की तरह करोड़ों के आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट या ब्रांड डील नहीं मिलते थे. संन्यास के बाद उनकी कमाई का कोई जरिया नहीं बचा और वे पूरी तरह मुफलिसी में आ गए. पेट की आग बुझाने के लिए भारत के इस पहले टेस्ट ओपनर को पुणे की एक शुगर मिल में 12 घंटे की सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ी. उनके आखिरी दिन पुणे-मुंबई हाईवे के किनारे एक टूटी-फूटी झोपड़ी में बेहद गरीबी में कटे.जीवन के अंतिम पड़ाव में वे पुणे में एक छोटे से कमरे या फ्लैट में रहे, और 7 सितंबर 1979 को पुणे में ही उनका अत्यंत गुमनामी और गरीबी की हालत में निधन हो गया.
2. बैरी पोलॉक (साउथ अफ्रीका)
बैरी पोलॉक साउथ अफ्रीका के महानतम बल्लेबाजों में गिने जाते थे. उनका जिनका टेस्ट क्रिकेट में 60.97 का शानदार औसत था और डॉन ब्रडमैन भी जिनकी तारीफ करते थे. रंगभेद नीति के कारण साउथ अफ्रीका पर अंतरराष्ट्रीय बैन लगने से उनका चरम पर चल रहा करियर अचानक बीच में ही समाप्त हो गया. इसके बाद उन्होंने अपनी सारी कमाई रियल एस्टेट और शेयर मार्केट में झोंक दी, जहा मंदी ने उनकी पूरी लुटिया डुबो दी. बुढ़ापे में पार्किंसन और पेट के कैंसर जैसी घातक बीमारियों ने उन्हें घेर लिया. महंगे मेडिकल बिलों और कर्जों के कारण इस लीजेंड को अपने अंतिम समय में साउथ अफ्रीकी बोर्ड और आईपीएल टीमों के सामने आर्थिक मदद के लिए हाथ फैलाना पड़ा.

3. एडम होलियोक (इंग्लैंड)
एडम होलियोक इंग्लैंड की वनडे टीम के पूर्व कप्तान और आक्रामक ऑलराउंडर थे, जिन्होंने 1997 की शारजाह ट्रॉफी में अपनी कप्तानी से टीम को चैंपियन बनाया था. क्रिकेट के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में अपने पारिवारिक रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी बिजनेस को बड़े पैमाने पर चमकाने की कोशिश की, लेकिन 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी ने उनका करोड़ों का कारोबार पूरी तरह तबाह कर दिया. और 2011 में अदालत ने उन्हें आधिकारिक रूप से दिवालिया घोषित कर दिया. एक समय एडम होलियाक ने ऐसा भी देखा, जब घर का किराया और राशन जुटाने के लिए इस पूर्व इंग्लिश कप्तान को मजबूरन एमएमए (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) के खतरनाक लोहे के पिंजरे में उतरना पड़ा और रिंग में पेशेवर फाइटर्स के घूंसे और लातें खानी पड़ीं.

4. मैथ्यू सिंक्लेयर
मैथ्यू सिंक्लेयर न्यूजीलैंड के विस्फोटक बल्लेबाज थे, जिन्होंने अपने डेब्यू टेस्ट मैच में ही वेस्टइंडीज के खिलाफ ऐतिहासिक 214 रनों की डबल सेंचुरी जड़ी थी. लेकिन 2013 में अंतरराष्ट्रीय करियर अचानक थमने के बाद, बचपन से सिर्फ क्रिकेट खेलने के कारण उनके पास कोई प्रोफेशनल डिग्री नहीं थी, जिससे किसी भी कंपनी ने उन्हें नौकरी नहीं दी और उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई. हालात इतने बदतर हो गए कि उन्हें न्यूजीलैंड सरकार के बेरोजगारी भत्ते की कतार में खड़ा होना पड़ा. बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए उन्हें सुपरमार्केट में सेल्समैन और रियल एस्टेट एजेंट के रूप में काम करना पड़ा.
5. अरशद खान (पाकिस्तान)
अरशद खान पाकिस्तान के 6 फुट 4 इंच लंबे दिग्गज ऑफ स्पिनर थे, जिन्होंने 2005 के भारत दौरे पर सचिन, द्रविड़ और सहवाग जैसे दिग्गजों को अपनी फिरकी में फंसाया था. देश के लिए 9 टेस्ट और 58 वनडे खेलने वाले अरशद को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की अनदेखी और राजनीति के कारण संन्यास के बाद न तो कोई कोचिंग कॉन्ट्रैक्ट मिला और न ही कोई सम्मानजनक पेंशन, जिससे उनके घर का चूल्हा ठंडा पड़ने लगा. परिवार का पेट पालने के लिए वे अपनी बची-कुची पूंजी लेकर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर चले गए. वहां उन्होंने तेज धूप और कड़ाके की ठंड में 12-12 घंटे टैक्सी और कैब का चलाकर जीवनयापन किया.

6. पैट्रिक पैटरसन (वेस्टइंडीज)
साल 1980 के दशक में विंडीज का तेज गेंदबाज पैट्रिक पैटरसन ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं. उन्हें मार्शल के बाद सबसे गतिवान बॉलर माना गया और एक बार तो उनकी बाउंसर विकेटकीपर के ऊपर से एक टप्पा खाने के बाद बाउंड्री के पार चली गई थी. 150 किमी/घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंद फेंककर बड़े-बड़े बल्लेबाजों की रूह कांप देते थे. क्रिकेट से बाहर होते ही उनकी जिंदगी में गंभीर मानसिक बीमारी, अवसाद और भारी तंगी ने दस्तक दी, जिससे वे जमेका की तंग बस्तियों में पूरी तरह गुमनाम हो गए. एक समय उनके पास बिजली का बिल भरने और दो वक्त की रोटी तक के पैसे नहीं बचे थे. बाद में एक भारतीय खेल पत्रकार ने उन्हें खोज निकाला, जिसके बाद क्राउड फंडिंग के जरिए पैसे जुटाकर उन्हें कंगाली के दलदल से बाहर निकाला गया.

7. क्रिस केर्न्स (न्यूजीलैंड)
क्रिस केर्न्स न्यूजीलैंड के ही नहीं, बल्कि 90 के दशक और उसके बाद के समय में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर थे. केर्न्स ने 200 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट और 3000 से अधिक रन बनाए थे. साल 2013 में उन पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे, जिसके बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की लंबी कानूनी जंग और वकीलों की भारी-भरकम फीस चुकाते-चुकाते उनकी पूरी जमा पूंजी और संपत्ति बिक गई. कभी बिजनेस क्लास में सफर करने वाला यह सुपरस्टार ऑकलैंड की सड़कों पर म्युनिसिपल काउंसिल के बस शेल्टर धोते और 100 डॉलर की मामूली दिहाड़ी पर कचरे का ट्रक चलाते हुए देखा गया.
8. विनोद कांबली (भारत)
विनोद कांबली भारतीय क्रिकेट के बेहद प्रतिभाशाली बाएं हाथ के बल्लेबाज थे, जिन्होंने सचिन के साथ 664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की थी और मात्र 14 पारियों में 1000 टेस्ट रन पूरे किए थे. लेकिन अनुशासनहीनता देर रात की पार्टियों की लत, ऐशो-आराम और गलत वित्तीय फैसलों के कारण उनका शानदार करियर समय से पहले समाप्त हो गया. बाद के वर्षों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और महंगे इलाज ने उनकी सारी पूंजी खत्म कर दी. और कभी करोड़ों में खेलने वाले यह पूर्व भारतीय क्रिकेटर वर्तमान में अपने बुनियादी खर्चों और दवाइयों के लिए पूरी तरह बीसीसीआई से मिलने वाली मासिक पेंशन पर निर्भर रहने को मजबूर हैं.
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