
बेंगलुरू टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ डीआरएस विवाद में उलझ गए थे (फाइल फोटो)
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज में जारी संघर्ष का गवाह अब महेंद्र सिंह धोनी का गृहनगर रांची बनने जा रहा है. दोनों देशों के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा मैच कल से रांची में खेला जाएगा. दोनों टीमें सीरीज में इस समय 1-1 की बराबरी पर हैं, इस लिहाज से दोनों ही टीमों की कोशिश अच्छा प्रदर्शन कर सीरीज में बढ़त हासिल करने की होगी. वैसे, बंगलुरू टेस्ट में जीत के साथ टीम इंडिया ने जिस तरह से वापसी की है, उसे देखते हुए विराट ब्रिगेड का पलड़ा कुछ भारी माना जा रहा है. नजर डालते हैं उन 5 पहलुओं पर जो टीम इंडिया को विपक्षी टीम के मुकाबले कुछ मजबूत स्थिति में पहुंचा रहे हैं...
बेंगलुरू टेस्ट की जीत से बढ़ा मनोबल
पुणे टेस्ट की हार के बाद टीम इंडिया के खेमे में निराशा के भाव साफ पढ़े जा सकते थे. टीम इंडिया के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया को कमजोर आंका जा रहा था. ऐसे में जब स्टीव ओकीफी की अगुवाई में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पुणे में टीम इंडिया को तीन दिन में ही हार के लिए मजबूर कर दिया तो हर कोई हैरान था. स्वाभाविक रूप से इस स्थिति में मेहमान टीम के खिलाड़ियों का मनोबल काफी ऊंचा था. बेंगलुरू टेस्ट के पहले दो दिन इसकी झलक भी मिली. ऐसा लगा कि टीम इंडिया के खाते में एक और हार आने वाली है, लेकिन पांचवें विकेट के लिए चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे के बीच हुई शतकीय साझेदारी ने पूरा माहौल ही बदल दिया. दरअसल, यही वह अवसर था जिसने हौसला खो रही टीम इंडिया में नई जान फूंकी. मैच के चौथे दिन गेंदबाजों के जबर्दस्त प्रदर्शन से टीम इंडिया ने न सिर्फ जीत हासिल की बल्कि प्लेयर्स के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. रांची टेस्ट में टीम इंडिया इसी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगी जबकि हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के कंधे कुछ 'झुके' हुए होंगे.
चोटग्रस्त तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क का वापस लौटना
सीरीज के पहले मिचेल स्टॉर्क को ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजी डिपार्टमेंट की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा था. स्टॉर्क 145 किमी प्रति घंटा की गति से गेंदबाजी करते हैं और बाएं हाथ के गेंदबाज होने के नाते उनकी बाहर निकलती गेंदें बल्लेबाजों के लिए मुश्किल बनती हैं. बेशक स्पिन के मददगार विकेट पर पहले दो टेस्ट में उनका प्रदर्शन बहुत खास नहीं रहा, लेकिन अपनी छवि के कारण वे ऑस्ट्रेलियाई खेमे में बेफिक्री का भाव भरने का काम करते थे. पुणे टेस्ट में विराट कोहली को पहली पारी में 0 पर आउट करके उन्होंने कमाल कर दिया था. चोट के कारण स्टार्क के वापस लौटने से टीम इंडिया ने (खासकर निचले क्रम ने) निश्चित रूप से राहत की सांस ली होगी. उनकी जगह पर तेज गेंदबाज पैट कमिंस को मौका मिल सकता है लेकिन स्टॉर्क के मुकाबले उन्हें बहुत कम अनुभव है. स्टार्क स्ट्रैस फ्रेक्चर के कारण सीरीज से बाहर हुए हैं.
ऑफ स्पिनर नैथन लियोन की अंगुली की चोट
ऑफ स्पिनर नैथन लियोन को ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख स्पिनर माना जा रहा था. हालांकि पुणे के पहले टेस्ट में स्टीव ओकीफी के 12 विकेट के आगे लियोन का प्रदर्शन दबकर रह गया, लेकिन बेंगलुरू की पहली पारी में आठ विकेट लेकर इस ऑफ स्पिनर ने चमक दिखा दी. ओकीफी के मुकाबले लियोन का अनुभव काफी ज्यादा है और वे टर्न के साथ ही गेंदों को मिलने वाले उछाल के कारण विपक्षी बल्लेबाजों के लिए परेशानी बनते हैं. रांची का विकेट भी शुरुआती दो टेस्ट की तरह स्पिनरों के मददगार होने की उम्मीद है लेकिन लियोन की अंगुली में चोट है. हालांकि इसके बावजूद उनके मैच खेलने की पूरी संभावना है. अंगुली की चोट के कारण लियोन की गेंदबाजी प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
DRS विवाद से स्टीव स्मिथ पर दबाव
मौजूदा सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी का बहुत कुछ दारोमदार उसके कप्तान स्टीव स्मिथ पर रहा है. ओपनर डेविड वॉर्नर से भी काफी उम्मीदें थीं लेकिन अब तक वे कोई बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं. बेंगलुरू टेस्ट में DRS विवाद में उलझने के बाद निश्चित रूप से स्मिथ दबाव में होंगे. टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने इस मसले को उछालकर ऑस्ट्रेलियाई खेमे पर दबाव बनाने की कोशिश की और इसमें एक हद तक सफल भी रहे. सुनील गावस्कर जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस मामले में विराट के स्टेंड का पूरी तरह से समर्थन किया. स्मिथ ने दूसरे टेस्ट में एलबीडब्ल्यू होने के बाद DRS रिव्यू के लिए ड्रेसिंग रूम से सलाह लेने की कोशिश की थी, नियम इसकी इजाजत नहीं देते. DRS विवाद का भुलाकर स्मिथ रांची में बल्लेबाजी में कैसा प्रदर्शन करते हैं यह देखने वाली बात होगी.
राहुल के बाद पुजारा और रहाणे की शानदार बल्लेबाजी
टेस्ट सीरीज में अब तक गेंदबाजों का वर्चस्व रहा है. टीम इंडिया के लिहाज से बात करें तो उसके गेंदबाजों का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है लेकिन बल्लेबाज अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए हैं. कप्तान विराट कोहली की बल्ले से नाकामी अभी भी चिंता का विषय है, लेकिन बेंगलुरू टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की बल्लेबाजी ने निश्चित ही भारतीय खेमे को राहत दी होगी. सीरीज में इस जोड़ी ने पांचवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई. सीरीज में यह पहली बार है जब किसी जोड़ी ने 100 या इससे अधिक रन जोड़े हैं. सीरीज में ओपनर लोकेश राहुल तीन अर्धशतक जमा चुके हैं. बेंगलुरू में पुजारा और रहाणे के बल्ले का भी चलना टीम इंडिया के लिए अच्छा संकेत है. इसके अलावा 'अनुभवी' मुरली विजय भी अपनी चोट से उबर चुके हैं, उनका अभिनव मुकुंद के स्थान पर प्लेइंग इलेवन में आना लगभग तय है.
बेंगलुरू टेस्ट की जीत से बढ़ा मनोबल
पुणे टेस्ट की हार के बाद टीम इंडिया के खेमे में निराशा के भाव साफ पढ़े जा सकते थे. टीम इंडिया के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया को कमजोर आंका जा रहा था. ऐसे में जब स्टीव ओकीफी की अगुवाई में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पुणे में टीम इंडिया को तीन दिन में ही हार के लिए मजबूर कर दिया तो हर कोई हैरान था. स्वाभाविक रूप से इस स्थिति में मेहमान टीम के खिलाड़ियों का मनोबल काफी ऊंचा था. बेंगलुरू टेस्ट के पहले दो दिन इसकी झलक भी मिली. ऐसा लगा कि टीम इंडिया के खाते में एक और हार आने वाली है, लेकिन पांचवें विकेट के लिए चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे के बीच हुई शतकीय साझेदारी ने पूरा माहौल ही बदल दिया. दरअसल, यही वह अवसर था जिसने हौसला खो रही टीम इंडिया में नई जान फूंकी. मैच के चौथे दिन गेंदबाजों के जबर्दस्त प्रदर्शन से टीम इंडिया ने न सिर्फ जीत हासिल की बल्कि प्लेयर्स के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया. रांची टेस्ट में टीम इंडिया इसी आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगी जबकि हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के कंधे कुछ 'झुके' हुए होंगे.
चोटग्रस्त तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क का वापस लौटना
सीरीज के पहले मिचेल स्टॉर्क को ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजी डिपार्टमेंट की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा था. स्टॉर्क 145 किमी प्रति घंटा की गति से गेंदबाजी करते हैं और बाएं हाथ के गेंदबाज होने के नाते उनकी बाहर निकलती गेंदें बल्लेबाजों के लिए मुश्किल बनती हैं. बेशक स्पिन के मददगार विकेट पर पहले दो टेस्ट में उनका प्रदर्शन बहुत खास नहीं रहा, लेकिन अपनी छवि के कारण वे ऑस्ट्रेलियाई खेमे में बेफिक्री का भाव भरने का काम करते थे. पुणे टेस्ट में विराट कोहली को पहली पारी में 0 पर आउट करके उन्होंने कमाल कर दिया था. चोट के कारण स्टार्क के वापस लौटने से टीम इंडिया ने (खासकर निचले क्रम ने) निश्चित रूप से राहत की सांस ली होगी. उनकी जगह पर तेज गेंदबाज पैट कमिंस को मौका मिल सकता है लेकिन स्टॉर्क के मुकाबले उन्हें बहुत कम अनुभव है. स्टार्क स्ट्रैस फ्रेक्चर के कारण सीरीज से बाहर हुए हैं.
ऑफ स्पिनर नैथन लियोन की अंगुली की चोट
ऑफ स्पिनर नैथन लियोन को ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख स्पिनर माना जा रहा था. हालांकि पुणे के पहले टेस्ट में स्टीव ओकीफी के 12 विकेट के आगे लियोन का प्रदर्शन दबकर रह गया, लेकिन बेंगलुरू की पहली पारी में आठ विकेट लेकर इस ऑफ स्पिनर ने चमक दिखा दी. ओकीफी के मुकाबले लियोन का अनुभव काफी ज्यादा है और वे टर्न के साथ ही गेंदों को मिलने वाले उछाल के कारण विपक्षी बल्लेबाजों के लिए परेशानी बनते हैं. रांची का विकेट भी शुरुआती दो टेस्ट की तरह स्पिनरों के मददगार होने की उम्मीद है लेकिन लियोन की अंगुली में चोट है. हालांकि इसके बावजूद उनके मैच खेलने की पूरी संभावना है. अंगुली की चोट के कारण लियोन की गेंदबाजी प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
DRS विवाद से स्टीव स्मिथ पर दबाव
मौजूदा सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी का बहुत कुछ दारोमदार उसके कप्तान स्टीव स्मिथ पर रहा है. ओपनर डेविड वॉर्नर से भी काफी उम्मीदें थीं लेकिन अब तक वे कोई बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं. बेंगलुरू टेस्ट में DRS विवाद में उलझने के बाद निश्चित रूप से स्मिथ दबाव में होंगे. टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने इस मसले को उछालकर ऑस्ट्रेलियाई खेमे पर दबाव बनाने की कोशिश की और इसमें एक हद तक सफल भी रहे. सुनील गावस्कर जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस मामले में विराट के स्टेंड का पूरी तरह से समर्थन किया. स्मिथ ने दूसरे टेस्ट में एलबीडब्ल्यू होने के बाद DRS रिव्यू के लिए ड्रेसिंग रूम से सलाह लेने की कोशिश की थी, नियम इसकी इजाजत नहीं देते. DRS विवाद का भुलाकर स्मिथ रांची में बल्लेबाजी में कैसा प्रदर्शन करते हैं यह देखने वाली बात होगी.
राहुल के बाद पुजारा और रहाणे की शानदार बल्लेबाजी
टेस्ट सीरीज में अब तक गेंदबाजों का वर्चस्व रहा है. टीम इंडिया के लिहाज से बात करें तो उसके गेंदबाजों का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है लेकिन बल्लेबाज अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए हैं. कप्तान विराट कोहली की बल्ले से नाकामी अभी भी चिंता का विषय है, लेकिन बेंगलुरू टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की बल्लेबाजी ने निश्चित ही भारतीय खेमे को राहत दी होगी. सीरीज में इस जोड़ी ने पांचवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई. सीरीज में यह पहली बार है जब किसी जोड़ी ने 100 या इससे अधिक रन जोड़े हैं. सीरीज में ओपनर लोकेश राहुल तीन अर्धशतक जमा चुके हैं. बेंगलुरू में पुजारा और रहाणे के बल्ले का भी चलना टीम इंडिया के लिए अच्छा संकेत है. इसके अलावा 'अनुभवी' मुरली विजय भी अपनी चोट से उबर चुके हैं, उनका अभिनव मुकुंद के स्थान पर प्लेइंग इलेवन में आना लगभग तय है.
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