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"भारतीय टीम ही राष्ट्रीय क्रिकेट नहीं", गावस्कर का बड़ा बयान, जानें क्यों बोले सनी, 'खिलाड़ी मशीन नही'

गावस्कर जब भी बात कहते हैं, तो उसके अपने ही मायने होते हैं. और इस बार सनी ने बहुत ही अहम मुद्दा बोर्ड के समक्ष उठाया है

"भारतीय टीम ही राष्ट्रीय क्रिकेट नहीं", गावस्कर का बड़ा बयान, जानें क्यों बोले सनी, 'खिलाड़ी मशीन नही'
महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर
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अब यह तो सार्वजनिक ही है कि टीम इंडिया का कार्यक्रम बहुत ही ज्यादा व्यस्त है. खिलाड़ियों को सांस लेने की फुर्सत तक नहीं है. इतनी ज्यादा क्रिकेट खेल रहे हैं कि नियमित रूप से कोई न कोई चोटिल हो रहा है. और अब  महान  दिग्गज सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेटरों पर लगातार बनाए जा रहे खेल के दबाव (वर्कलोड) पर चेतावनी देते हुए व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर पर फिर से विचार करने व घरेलू खेल पर अधिक जोर देने की मांग की है.  कप्तान ने खिलाड़ियों को पर्याप्त रिकवरी (उबरने) का समय दिए बिना एक श्रृंखला या टूर्नामेंट से दूसरे में भेजने के प्रति भी आगाह किया है.

'स्पोर्टस्टार' में अपने कॉलम में लिखी गई उनकी यह टिप्पणी भारतीय खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर बढ़ती चिंताओं और हाल ही में लगी चोटों की श्रृंखला के बीच आई है. एक हफ्ते पहले बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने भारतीय क्रिकेट को प्रभावित कर रही चोटों की समस्याओं का कारण टीम के भारी मैच शेड्यूल को बताया था. बोर्ड अब इस मुद्दे का समाधान खोजने के लिए उत्सुक है.

साल 2027 से शुरू होने वाले अगले चार साल के अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर चक्र पर चर्चा करने के लिए आईसीसी की तैयारी के बीच गावस्कर का मानना है कि शेड्यूल तैयार करते समय खिलाड़ियों पर पड़ने वाले तनाव पर विचार करने की जरूरत है. गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट की समीक्षा के लिए हाल ही में हुई बैठक का जिक्र किया और उम्मीद जताई कि वर्कलोड से जुड़ी चिंताओं का असर आईसीसी में होने वाली चर्चाओं में भी देखने को मिलेगा.

'भारतीय खिलाड़ी कोई मशीन नहीं'

उन्होंने लिखा,  'भारतीय क्रिकेट का जायजा लेने के लिए हाल ही में हुई बैठक ने इस मुद्दे से निपटने की कोशिश की थी. उम्मीद है कि जब 2027 से अगले चार वर्षों के चक्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर पर चर्चा के लिए आईसीसी की बैठक होगी, तो निर्णय लेने वालों को यह एहसास होगा कि भारतीय क्रिकेटर न तो मशीन हैं और न ही गन्ना, जिन्हें रस की हर एक बूंद निकालने के लिए अंतहीन निचोड़ा जाए.' पूर्व बल्लेबाज की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत के प्रमुख खिलाड़ियों को सभी प्रारूपों और प्रतियोगिताओं के व्यस्त शेड्यूल से गुजरना पड़ रहा है, जिससे पहले से ही थके हुए समूह पर शारीरिक मांगें बढ़ रही हैं.

'भारतीय क्रिकेट टीम ही भारतीय क्रिकेट नहीं है'

गावस्कर का यह भी मानना है कि भारतीय क्रिकेट पर बातचीत सिर्फ सीनियर राष्ट्रीय टीम तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए. हालांकि, भारत की अंतरराष्ट्रीय टीम देश में खेल का सबसे 'चमकीला' हिस्सा बनी हुई है, लेकिन उनका तर्क है कि यह अंततः एक बहुत व्यापक घरेलू तंत्र द्वारा निर्मित होती है और इसे अपने आप में भारतीय क्रिकेट का पर्याय नहीं माना जाना चाहिए. 

सनी ने लिखा, 'भारतीय क्रिकेट टीम ही भारतीय क्रिकेट नहीं है. भारतीय क्रिकेट टीम तो भारतीय क्रिकेट का एक उप-उत्पाद है.' गावस्कर के लिए, यह अंतर तब विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाता है जब चर्चा भारत की बहुप्रशंसित बेंच स्ट्रेंथ की ओर मुड़ती है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले कई पक्षों को मैदान में उतारने की भारत की क्षमता को अक्सर देश के विशाल प्रतिभा पूल के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया गया है. इस पर गावस्कर का मानना है कि कई टीमें बनाने के लिए पर्याप्त खिलाड़ी होने का मतलब यह नहीं है कि घरेलू प्रणाली लगातार विश्व स्तरीय क्रिकेटर तैयार कर रही है. उन्होंने हाल के परिणामों की ओर इशारा करते हुए असाधारण गहराई की धारणा से परे देखने और इसके बजाय राष्ट्रीय टीम को फीड करने वाली प्रणाली को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का कारण बताया.

एक टीम भी कई खिताब जीतने के लिए काफी नहीं

"यह तर्क कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ ऐसी है कि वह तीन टीमें उतार सकता है, दुनिया के सामने दावे करने के लिए तो अच्छा है, लेकिन वास्तविकता हाल ही में दिखाई है. सच यह है कि फिलहाल भारत की एक टीम भी बहुत सारे खिताब जीतने के लिए काफी नहीं है. हां, एशियाई खेलों में एक स्वर्ण पदक एक बार फिर टीम में नया जोश भरेगा और उसे आने वाली लड़ाईयों के लिए आत्मविश्वास देगा, लेकिन जब तक घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक यह पाइपलाइन विश्व विजेताओं को तैयार नहीं करेगी. हमारी लड़कों और लड़कियों दोनों की टीमों को स्वर्ण जीतने के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं.'

F & Q= Frequently Asked Questions

प्र.1: सुनील गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों को लेकर क्या चिंता जताई है?

उत्तर: गावस्कर ने कहा है कि भारतीय खिलाड़ी बिना आराम किए बहुत ज्यादा क्रिकेट खेल रहे हैं, जिसकी वजह से वे लगातार चोटिल हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी कोई मशीन या गन्ना नहीं हैं जिन्हें आखिरी बूंद तक निचोड़ा जाए; उन्हें थकान मिटाने और चोट से उबरने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए.

प्र.2: "भारतीय टीम ही भारतीय क्रिकेट नहीं है", गावस्कर के इस बयान का क्या मतलब है?

उत्तर: इस बयान का मतलब है कि सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम ही सब कुछ नहीं है. असली भारतीय क्रिकेट उसका घरेलू क्रिकेट है.  मुख्य टीम तो इसी घरेलू ढांचे की उपज (उप-उत्पाद) है, इसलिए सारा ध्यान सिर्फ मुख्य टीम पर ही नहीं होना चाहिए.

प्र.3: भारत की 'बेंच स्ट्रेंथ' (एक साथ कई टीमें बनाने की क्षमता) पर गावस्कर ने क्या कहा है?

उत्तर: गावस्कर का मानना है कि भले ही भारत के पास 3 अलग-अलग टीमें बनाने भर के खिलाड़ी हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी खिलाड़ी विश्वस्तरीय हैं. उन्होंने साफ कहा कि दुनिया के सामने यह दावा करना तो अच्छा है, लेकिन सच्चाई यह है कि फिलहाल हमारी एक मुख्य टीम भी बड़ी ट्रॉफियां जीतने में संघर्ष कर रही है.

प्र.4: आईसीसी (ICC) और बोर्ड को गावस्कर ने क्या सुझाव दिया है?

उत्तर: गावस्कर ने सुझाव दिया है कि साल 2027 से शुरू होने वाले नए क्रिकेट कैलेंडर को बनाते समय खिलाड़ियों के आराम का ध्यान रखा जाए. दो सीरीज या टूर्नामेंट के बीच इतना समय जरूर हो कि खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को तरोताजा कर सकें.

प्र.5: भविष्य में शानदार खिलाड़ी तैयार करने के लिए गावस्कर ने किस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है?

उत्तर: गावस्कर का साफ कहना है कि अगर हमें दुनिया की बेहतरीन टीमों को हराने वाले चैंपियन खिलाड़ी चाहिए, तो हमें अपने घरेलू क्रिकेट को सबसे ज्यादा अहमियत (प्राथमिकता) देनी होगी। मजबूत घरेलू क्रिकेट के बिना विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार नहीं हो सकते.

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