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सत्तू, मखाना, कॉफी.. ब्रिक्स सम्मेलन में मेहमानों को खास तोहफा, बिहार, गुजरात और ओडिशा वाला कनेक्शन

ब्रिक्स सम्मेलन के लिए विदेशी प्रतिनिधियों और मेहमानों को भारत की खासियत वाला तोहफा दिया जा रहा है. इस तोहफे में बिहार से लेकर गुजरात की चीजों को समाहित किया गया है.

ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में मेहमानों को खास तोहफा
  • राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन में मेहमानों का हो रहा है खास स्वागत
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सम्मेलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंच चुके हैं
  • इन तोहफो में बिहार से लेकर गुजरात और ओडिशा का कनेक्शन है
नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के लिए मेहमानों को खास तोहफा दिया जा रहा है. भारत की मेजबानी में हो रहे इस बड़े सम्मेलन में मेहमानों का खास ख्याल रखा जा रहा है. तोहफे में ब्रिक्स के लोगो वाले बैग के साथ-साथ सत्तू, कॉफी और एक स्टॉल दिया जा रहा है. देसी-विदेशी मीडियाकर्मियों और डेलिगेट्स को ये तोहफे दिए जा रहे हैं. खांटी देसी अंदाज वाले इस तोहफे में एक मग भी है. 

विदेश मंत्रालय की तरफ से दिए गए इस बैग में आपको ब्रिक्स के ब्रीफिंग पेपर के अलावा खाने-पीने की चीजें, क्राफ्ट और कुछ ऐसी चीजें भी दी जा रही हैं जिसे आप रखना पसंद करेंगे. सबसे पहली चीज जिसपर आपकी नजर जाएगी वो है सत्तू का पैकेट और मखाने का बॉक्स. ये दोनों उत्पाद बिहार की निशानी है. इसके बाद कोरापुट कॉफी दी जा रही है जिसका संबंध ओडिशा से है. काले रंग का प्रिंटेड स्टॉल भी दिया जा रहा है इसका नाता गुजरात से है. 

ब्रिक्स 2026 कवरेज लाइव 

दिल्ली के ब्रिक्स सम्मेलन में मेहमानों को खास तोहफा

दिल्ली के ब्रिक्स सम्मेलन में मेहमानों को खास तोहफा

इस तोहफे में निश्चित तौर पर देश के अलग-अलग हिस्से की ब्रैंडिंग भी है. एक पानी की बोतल और कॉफी मग भी मिल रहा है जिसपर ब्रिक्स 2026 के निशान बने हैं. एक फ्रिज मैग्नेट, एक डायरी और एक पेन भी आपको मिलते हैं. ये सभी चीजें एक बैग में आपको मिलती हैं. 

इस किट की खासियत ये है कि इसमें आपको भारत की केवल एक छवि नहीं दिख रही है. राजधानी दिल्ली इस सम्मेलन की मेजबानी कर रही है. इसमें ये बताने की कोशिश नहीं है कि पूरा देश दिल्ली की तरह दिखता है. बल्कि कुछ चीजें कहीं से कुछ चीजों कहीं से ली गई हैं. सत्तू और मखाना के जरिए बिहार की पहचान को उकेरा गया है. ओडिशा की पहचान को कॉफी जरिए पेश किया गया है. गुजरात की पहचान को प्रिंट के जरिए दर्शाया गया है. 

बिहार के सत्तू और मखाना भी दिया गया है

बिहार का सत्तू और मखाना भी दिया गया है


ब्रिक्स को कवर रहे पत्रकार और डेलिगेट्स के लिए ये बैग केवल एक पैकेट नहीं है. बल्कि वो इसे अपने घर ले जाएंगे. यानी ये किट जहां भी जाएगी वहां इसके पहचान पर बात जरूर होगी. सम्मेलन की याद आप उसके भाषण, फोटो और संयुक्त घोषणापत्र से करेंगे . लेकिन एक सत्य ये भी रहेगा यहां से 5 साल बाद कॉफी पैकेट और स्टॉल किसी के सेल्फ की शोभा बढ़ा रहे होंगे. जो उन्हें इस सम्मेलन की याद दिलाएंगे. भारत भी कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहा है. कूटनीति तो निश्चित तौर पर कॉन्फ्रेंस रूम में होती है. लेकिन कभी-कभी ये आपके बैग के साथ आपके घर भी जाता है. 

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