क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा खजाना जमा हो गया है जिसे कोई पूछने वाला नहीं है? यह कोई कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों की अपनी मेहनत की कमाई के लगभग ₹2.2 लाख करोड़ बैंकों, बीमा कंपनियों और शेयर बाजार में लावारिस (Unclaimed Deposits) पड़े हैं. यह पैसा किसी न किसी परिवार का तो है. ये भी हो सकता है कि इसमें आपके परिवार का हिस्सा भी शामिल हो, लेकिन सही जानकारी न होने या कागजों की कमी के कारण यह सरकारी फंड्स में जमा होता जा रहा है. यह आंकड़ा पिछले 5 सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है, जो दिखाता है कि लोग अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग और नॉमिनेशन को लेकर जागरूक नहीं हैं.
बैंकों में जमा हैं ₹97,000 करोड़ से ज्यादा
सबसे ज्यादा पैसा हमारे बैंक खातों में पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 तक करीब ₹97,545 करोड़ ऐसे हैं जिन्हें 10 साल से किसी ने नहीं छुआ. यानी यह उन खातों का पैसा है जो सालों से बंद पड़े हैं या जिनका रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ. जब कोई बैंक अकाउंट 10 साल तक बंद रहता है, तो बैंक वह पैसा RBI के 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड' में भेज देता है.
शेयर बाजार में भी फंसे हैं ₹89,000 करोड़
सिर्फ बैंक ही नहीं, शेयर बाजार में भी भारी रकम लावारिस है. ₹89,004 करोड़ की वैल्यू के लगभग 166 करोड़ शेयर 'इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड' (IEPF) के पास जमा हैं. नियम यह है कि अगर 7 साल तक किसी शेयर का डिविडेंड क्लेम नहीं किया जाता, तो कंपनी वह शेयर और डिविडेंड दोनों सरकार के पास भेज देती है. ताज्जुब की बात यह है कि इस फंड का 25% हिस्सा तो सिर्फ 5 बड़ी कंपनियों के शेयरों का है.
इंश्योरेंस और PF का करीब ₹20,062 फंड अनक्लेम्ड
बीमा पॉलिसियों का हाल भी कुछ ऐसा ही है. मैच्योरिटी या डेथ बेनिफिट के करीब ₹20,062 करोड़ बीमा कंपनियों के पास पड़े हैं. लोग अक्सर पॉलिसी लेकर भूल जाते हैं या नॉमिनी को इसकी जानकारी नहीं देते. वहीं, रिटायरमेंट की पूंजी यानी PF (EPF) में भी ₹10,915 करोड़ फंसे हुए हैं. करीब 31.87 लाख PF खाते ऐसे हैं जो सालों से बंद हैं. इसमें से कई खाते तो 20 साल से भी ज्यादा समय से इन-ऑपरेटिव यानी बंद पड़े हैं.
म्यूचुअल फंड के डिविडेंड और रिडेम्पशन के ₹3,452 करोड़ लावारिस
सिर्फ पुरानी चीजें ही नहीं, अब म्यूचुअल फंड और नए निवेशों में भी पैसा लावारिस होने लगा है. म्यूचुअल फंड के डिविडेंड और रिडेम्पशन के ₹3,452 करोड़ लावारिस हैं. इसके अलावा REITs और InvITs जैसे नए इंस्ट्रूमेंट्स में भी ₹764 करोड़ जमा हो चुके हैं.

बैंक, शेयर, इंश्योरेंस और PF का पैसा क्यों रह जाता है अनक्लेम्ड?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जैसे-जैसे लोग ज्यादा जगहों पर पैसा निवेश कर रहे हैं, उनके लिए इन सबको ट्रैक करना मुश्किल होता जा रहा है.इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है 'नॉमिनेशन' (Nomination) का न होना या गलत एड्रेस. पुराने समय में सब कुछ कागजों पर था, जिससे रिकॉर्ड मैच करना मुश्किल हो जाता है. ये पैसा सरकार के पास तो सुरक्षित है, लेकिन इस पैसे का फायदा उसके असली मालिक को नहीं मिल पा रहा है.
अगर आप भी अपनी फैमिली की ऐसी किसी दौलत को खोजना चाहते हैं, तो बैंक या कंपनी की वेबसाइट पर जाकर 'Unclaimed Assets' सेक्शन में अपना नाम जरूर चेक करें. इतना ही नहीं, अच्छी बात यह है कि आप या आपके वारिस कभी भी बैंक जाकर जरूरी कागजात दिखाकर इस पर अपना दावा ठोक सकते हैं और इसे वापस पा सकते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं