रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में जमा एक्स्ट्रा लिक्विडिटी यानी अतिरिक्त पैसे को कम करने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं. पहला, RBI 13 अक्टूबर को ₹25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड (Government Securities) की नीलामी करेगा. दूसरा, 16 अक्टूबर से बैंकों के लिए रोजाना कैश रिजर्व रेशियो (CRR) बनाए रखने का नियम बदल जाएगा. अब बैंकों को तय CRR का कम से कम 99% हिस्सा हर दिन बनाए रखना होगा, जबकि अभी यह सीमा 90% है.
13 अक्टूबर को ₹25,000 करोड़ के बॉन्ड बिकेंगे
RBI ने 9 अक्टूबर को बताया कि वह 13 अक्टूबर को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत सरकारी बॉन्ड बेचेगा. इस नीलामी में मार्च 2030 से अप्रैल 2034 के बीच मैच्योर होने वाले छह सरकारी सिक्योरिटीज शामिल हैं.इनमें 7.88% GS 2030, 6.10% GS 2031, 7.95% GS 2032, 7.26% GS 2033, 7.18% GS 2033 और 7.10% GS 2034 शामिल हैं.
RBI ने हर बॉन्ड के लिए अलग-अलग बिक्री राशि तय नहीं की है. बैंक कितना बॉन्ड खरीदेंगे, इसके आधार पर केंद्रीय बैंक हर सिक्योरिटी की बिक्री का फैसला करेगा. RBI चाहे तो तय ₹25,000 करोड़ से कम के बॉन्ड बेच सकता है. वह किसी भी बोली को पूरी तरह या आंशिक रूप से स्वीकार या खारिज भी कर सकता है.
CRR का नया नियम 16 अक्टूबर से
RBI ने बैंकों के लिए रोजाना CRR बनाए रखने की मिनिमम लिमिट 90% से बढ़ाकर 99% कर दी है. यह नियम 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े से लागू होगा.
CRR वह रकम है, जिसे बैंकों को अपनी कुल जमा के तय हिस्से के रूप में RBI के पास नकद रखना होता है. अभी बैंक किसी दिन तय CRR का 90% रख सकते हैं, लेकिन पूरे पखवाड़े का औसत निर्धारित CRR के बराबर होना जरूरी है. नए नियम में रोजाना कम से कम 99% रकम रखनी होगी. हालांकि, CRR की मूल दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
बैंकिंग सिस्टम में ₹3.88 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी
8 अक्टूबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹3.88 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी थी. RBI पिछले दो महीनों से इसे कम करने के लिए VRRR नीलामी और OMO जैसे कदम उठा रहा है. 6 अक्टूबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अतिरिक्त नकदी को कम किया जाएगा.
बैंकों को FCNR(B) जमा के जरिए भारी मात्रा में विदेशी करेंसी मिली. RBI के साथ किए गए स्वैप से सिस्टम में रुपये की नकदी बढ़ी. इसके अलावा महीने के अंत में सरकारी खर्च, वेतन और पेंशन के भुगतान से भी बैंकिंग सिस्टम में पैसा बढ़ा.
बैंकों और ग्राहकों पर क्या असर होगा?
नए नियम से बैंकों को रोजाना अपने रिजर्व का ज्यादा हिस्सा RBI के पास रखना होगा. इससे उनके पास कर्ज देने और दूसरे कामों में इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध रकम पर दबाव पड़ सकता है. RBI जरूरत के मुताबिक VRRR नीलामी, डॉलर-रुपये स्वैप और OMO जैसे तरीकों से कैश फ्लो को कंट्रोल करता रहता है.
ये भी पढ़ें- यह भी पढ़ें | Bank Holiday Today: आज 10 अक्टूबर को बैंक खुला है या बंद? घर से निकलने से पहले चेक करें RBI की हॉलिडे लिस्ट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं