मुंबई की बारिश... कभी ये बॉलीवुड गानों की याद दिला देती है, तो कभी लोकल ट्रेन की पटरियों को डुबोकर जिंदगी की रफ्तार रोक देती है. लेकिन इस बार, मुंबई की यही अनप्रेडिक्टेबल बारिश कमोडिटी मार्केट में एक नया इतिहास रचने जा रही है. दरअसल एग्रीकल्चरल कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो मानसून की अनिश्चितता के चलते होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है. NCDEX ने भारत का पहला सेबी (SEBI) अप्रूव्ड, एक्सचेंज-ट्रेडेड वेदर डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च कर दिया, जिसका नाम RAINMUMBAI है. इस कॉन्ट्रैक्ट में 29 मई से ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी. इस खबर में आपको बताते हैं कि क्या है ये रेनमुंबई प्लान. साथ ही ये कैसे काम करेगा?
क्या है 'RAINMUMBAI' और वेदर डेरिवेटिव?
अब तक आपने सोना, चांदी, क्रूड ऑयल या शेयर बाजार में ट्रेडिंग के बारे में सुना होगा, लेकिन अब मौसम यानी बारिश के उतार-चढ़ाव पर भी ट्रेड कर सकेंगे. वेदर डेरिवेटिव्स (Weather Derivatives) ऐसे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, जो खराब मौसम, जैसे कम बारिश, बहुत ज्यादा तापमान या उमस से होने वाले वित्तीय नुकसान को मैनेज करने में मदद करते हैं. 'RAINMUMBAI' एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है, जिसका पे-आउट इस बात पर डिपेंड करेगा कि एक फिक्स समय के अंदर मुंबई में असल में कितनी बारिश रिकॉर्ड की गई. आसान भाषा में कहें तो अगर मानसून आपकी उम्मीद से कम या ज्यादा रहा, तो ये कॉन्ट्रैक्ट नुकसान की भरपाई करेगा.
वेदर डेरिवेटिव ऐसे समझौते हैं जो मौसम के आधार पर पैसे का भुगतान तय करते हैं. इसमें शेयर या सोना नहीं, बल्कि मौसम पर दांव होता है. यहां हम एक बात साफ कर दें कि ये कोई सट्टा या जुआ नहीं है, बल्कि इसके पीछे साइंस और गणित है. इस प्रोडक्ट को IIT बॉम्बे के की मदद से बनाया गया है और इसका पूरा बेस भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के डेटा पर टिका है.
कैसे मिलेगा पैसा?
मान लीजिए अगर तय हुआ कि जून में 200 mm बारिश होनी चाहिए. लेकिन हकीकत में सिर्फ 100 mm बारिश हुई. तो जिसने ये कॉन्ट्रैक्ट खरीदा है, उसे नुकसान की भरपाई के लिए पैसा मिलेगा.
कैसे काम करेगा ये मॉडल?
RAINMUMBAI मानसून सीजन यानी जून से सितंबर के समय मुंबई की बारिश में होने वाले बदलावों को ट्रैक करेगा. इसके लिए पिछले 30 सालों (1991-2020) के डेटा को बेंचमार्क बनाया गया है. मुंबई के दो सबसे बड़े वेदर स्टेशन सांताक्रुज और कोलाबा में लगे ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन्स और रेन गेज के जरिए हर 24 घंटे की बारिश को मापा जाएगा. सबसे खास बात ये है कि इंस्ट्रूमेंट पूरी तरह से कैश-सेटल होगा. यानी नुकसान कितना हुआ है? इसके लिए किसी फिजिकल वेरिफिकेशन या सर्वे की जरूरत नहीं होगी. डेटा में जैसे ही बदलाव दिखेगा, तुरंत और तेजी से रिस्क मैनेजमेंट का सेटलमेंट हो जाएगा.
किसके लिए फायदेमंद साबित होगा 'RAINMUMBAI'?
जिन बैंकों ने किसानों को लोन दिया है, वो मानसून खराब होने पर अपने रिस्क को कम कर सकेंगे. इसके अलावा ज्यादा बारिश से जिन कंपनियों का ट्रांसपोर्टेशन ठप हो जाता है, वो अपने नुकसान की भरपाई कर सकेंगी. वहीं मानसून में जिनका काम रुक जाता है और लेबर कॉस्ट बेकार जाती है, उनके लिए ये बेहतरीन टूल है.
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