Mohit Nijhawan success story: अगर किसी के पास साल का 90 लाख रुपए का कॉर्पोरेट पैकेज हो, तो क्या वह उसे यूं ही छोड़ देगा? ज्यादातर लोग कहेंगे बिल्कुल नहीं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने एसी केबिन का आराम और लाखों की सैलरी छोड़कर मिट्टी और पौधों से नाता जोड़ा लिया. यह कहानी है मोहित निझावन की.
बी.टेक कंप्यूटर साइंस की डिग्री, हाथ में 90 लाख का सालाना पैकेज और एक शानदार कॉर्पोरेट करियर. सब कुछ वैसा ही था जैसा हर कोई सपना देखता है. लेकिन दिसंबर 2020 में मोहित के दिल में कुछ नया और अपना करने की जिद जागी. उन्होंने कॉर्पोरेट की चकाचौंध को अलविदा कह दिया और एक बिल्कुल अनजान रास्ते पर चल पड़े माइक्रोग्रीन्स (Microgreens) की खेती.
100 स्क्वायर फीट की छत और 30 हजार की रकम
अक्सर लोग सोचते हैं कि बड़ा बिजनेस करने के लिए लाखों-करोड़ों की जरूरत होती है. लेकिन मोहित ने यह साबित कर दिया कि हौसला बड़ा होना चाहिए.
शुरुआत चंडीगढ़ में महज 100 स्क्वायर फीट की एक छोटी सी जगह की. जेब में सिर्फ 30,000 रुपये की शुरुआती रकम थी.
इनडोर सेटअप में माइक्रोग्रीन्स उगाने की बारीकियां सीखीं, सप्लाई चेन समझी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा जीता.
देखते ही देखते उनका यह छोटा सा प्रयोग एक मुकम्मल ब्रांड बन गया 'ग्रीनू माइक्रोग्रीन्स'
Meet Mohit Nijhawan, a https://t.co/BC6fLkcQNf Computer Science graduate. This guy left his 90 LPA corporate career to grow tiny greens. Today, he has built https://t.co/7yvufGmkSg, a ₹1.44 crore business with approximately ₹60 lakhs in profit annually.
— Vikas Alwys (@VikasAlwys) September 5, 2026
He walked away from a… pic.twitter.com/HI4OPKOm7l
करोड़ों का टर्नओवर
आज हालात यह हैं कि जिस काम को 30 हजार से शुरू किया गया था, वह एक मजबूत और मुनाफे वाले बिजनेस का रूप ले चुका है.
मंथली रेवेन्यू करीब 12 लाख रुपए महीना है. सालाना टर्नओवर लगभग 1.44 करोड़ और सालाना मुनाफा करीब 60 लाख रुपए है.
इतना ही नहीं, मोहित सिर्फ खुद की कमाई तक सीमित नहीं रहे. वह आज देश भर के किसानों और नए उद्यमियों को माइक्रोग्रीन्स फार्मिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं, ताकि दूसरे लोग भी इस नए दौर की खेती से अपनी तकदीर बदल सकें.
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क्या सच में यह फायदे का सौदा है?
जब यह कहानी इंटरनेट पर सामने आई, तो लोगों के बीच एक दिलचस्प बहस छिड़ गई. एक यूजर ने गणित समझाते हुए तंज कसा कि 90 लाख की सालाना सैलरी की तुलना 12 लाख की मासिक बिक्री से करना सिर्फ ध्यान खींचने का तरीका है.
वहीं, दूसरे यूजर ने इसे जिंदगी के नजरिए से देखा और लिखा, "आखिर हम जो कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं?" यानी क्या जिंदगी सिर्फ भारी-भरकम पैकेज का नाम है या फिर अपने मन का काम करके सुकून पाने का?
बाकी लोगों ने इसे एक बेहद प्रेरणादायक सफर बताया और कहा कि रिस्क लेने का दम हर किसी में नहीं होता.
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