एक तरफ टीम इंडिया विंडीज के खिलाफ भारत में पहला वनडे खेल रही है, तो दूसरी ओर एक और टीम जापान में सोमवार को अपने स्वर्णिम अभियान का आगाज करेगी. सीधे क्वार्टरफाइनल खेलने वाली टीम इंडिया की टक्कर अफगानिस्तान से होगी. भारत डिफेंडिंग चैंपियन है, जिसने 2023 में आयोजित पिछले एशियाई खेलों के संस्करण में स्वर्ण पदक जीता था. साल 2026 के एशियाई खेलों में क्रिकेट टूर्नामेंट 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा. लेकिन इस मैच से पहले महान सुनील गावस्कर ने भारत को वॉर्निंग दी है. दरअसल गावस्कर ने उन विशिष्ट खेल परिस्थितियों को लेकर विशेष चिंताएं जाहिर की हैं, जिनका सामना भारत को अपने अभियान के दौरान करना पड़ेगा.
'मिड-डे'अखबार के लिए लिखे कॉलम में गावस्कर ने कहा, 'जापान के खिलाफ मैच भारतीय टीम के लिए एक अच्छा सबक खासा चुभने वाला अनुभव था. यहांवे हारने से बस एक अच्छे शॉट की दूरी पर थे. यह बात उन्हें (एशियाई खेलों में) अपना अभियान शुरू करते समय बहुत ही अच्छी तरह याद रखनी होगी. उन्हें थोड़ा सतर्क रहना होगा क्योंकि पिच अनिश्चित रहने वाली है और आउटफील्ड के नरम होने के कारण स्लाइडिंग स्टॉप में भी कुछ चिंता हो सकती है'.
निश्चित तौर पर आउटफील्ड की स्थिति उन फील्डरों के लिए एक खास चुनौती पेश करती है जो डाइव लगाकर गेंद रोकने की कोशिश करते हैं. ऐसे में मैदान की नरमी उन फील्डिंग तकनीकों के अमलीकरण को प्रभावित कर सकती है जो आधुनिक क्रिकेट में आम हैं. गावस्कर का आंकलन बताता है कि भारत को मैदान की इन खास विशेषताओं के हिसाब से अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा
महिला टीम की स्वर्ण पदक सफलता का दबाव
गावस्कर ने एशियाई खेलों में महिला क्रिकेट टीम की सफलता के बाद भारत की पुरुष टीम के सामने आने वाले दबाव पर भी विचार किया. महिला टीम ने एशिया कप में अपनी जीत के बाद टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता था, जिससे पुरुष टीम के लिए भी स्वर्ण पदक जीतने का एक मानक तय हो गया है.
गावस्कर ने लिखा, 'महिला क्रिकेट टीम ने पहला स्वर्ण पदक दिलाया और एशिया कप में उनकी जीत तथा अब एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक ने पुरुष टीम पर भी स्वर्ण पदक हासिल करने का दबाव बना दिया है. ऐसे पल भी आते हैं जब थोड़ी सी चूक से पदक हाथ से निकल जाता है और खिलाड़ी के आंसू पूरे देश के खेल समुदाय के आंसू बन जाते हैं.'
आने वाले चयन समिति के अध्यक्ष के सामने चुनौतियां
तत्काल एशियाई खेलों की चुनौती से परे गावस्कर ने अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आने वाले चयन समिति के अध्यक्ष के सामने आने वाले दबावों पर भी अपना नजरिया रखा. इस भूमिका में काफी जिम्मेदारी और जनता की कड़ी नज़र होती है जो टीम चयन के तकनीकी पहलुओं से कहीं आगे तक जाती है. गावस्कर ने लिखा,'राष्ट्रीय चयन समिति के अध्यक्ष होने का सम्मान तो है ही, लेकिन इसके साथ ही पीठ पर एक निशाना भी लग जाता है. अंपायरिंग, विकेटकीपिंग और अब कमेंट्री की तरह ही जो नौ अच्छे काम किए गए हैं, उन्हें भुला दिया जाएगा और उस एक तथाकथित गलती को सौ गुना बड़ा करके बार-बार चर्चा में लाया जाएगा.' उन्होंने आगे कहा, 'सबसे खास बात जिससे ज्यादातर लोग अनजान रहते हैं, वह यह है कि कई फैसले अध्यक्ष पर अन्य चयनकर्ताओं द्वारा थोपे जा सकते हैं, लेकिन चूंकि उन्हें मीडिया के सामने जवाब देना होता है, इसलिए आलोचना उन्हीं को झेलनी पड़ती है. इसलिए, शरारत करने वाले अन्य चयनकर्ता हो सकते हैं, लेकिन आलोचना के लिए सिर्फ अध्यक्ष को ही निशाना बनाया जाता है
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