अमेरिका में लाखों का पैकेज, विप्रो (Wipro) जैसी दिग्गज कंपनी में 12 साल का शानदार करियर और ऐशो-आराम की जिंदगी. क्या कोई इसे छोड़कर चिलचिलाती धूप में खेत-खलिहान में उतरने की सोच भी सकता है? आम तौर पर जवाब होगा 'बिल्कुल नहीं'. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जुनूनी शख्स की दास्तान सुनाने जा रहे हैं, जिसने कॉर्पोरेट की कुर्सी छोड़ी, जमीन से जुड़े, लगभग 10 बार दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे और आखिरकार ₹700 करोड़ का बिजनेस साम्राज्य खड़ा कर दिया. यह कहानी है बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से बीटेक करने वाले शशि कुमार की. शशि के पास अमेरिका में सब कुछ था, लेकिन उनका दिल हमेशा भारतीय किसानों की बदहाली देखकर दुखता था. उन्होंने तय किया कि अब बहुत हुआ, वतन लौटकर किसानों की जिंदगी बदलनी है. नौकरी को अलविदा कहकर उन्होंने 'अक्षय कल्प' (Akshayakalpa) नाम से ऑर्गेनिक डेयरी और एग्रीटेक वेंचर की नींव रखी.
पिता की 8 साल की खामोशी
कहना जितना आसान था, राह उतनी ही कांटों भरी थी. नौकरी छोड़ना तो बस शुरुआत थी, असली चुनौती जमीन पर शुरू हुई. शुरुआती 9 सालों में 6 बार ऐसे मोड़ आए, जब कंपनी बंद होने और दिवालिया होने की नौबत आ गई. कुल मिलाकर शशि करीब 10 बार पूरी तरह टूटने के कगार पर पहुंचे. शशि के पिता खुद एक किसान थे. वे जानते थे कि खेती में कितना खून-पसीना बहता है, इसलिए वे कतई नहीं चाहते थे कि उनका पढ़ा-लिखा बेटा इसी दलदल में उतरे. बेटे की इस जिद से पिता इतने नाराज हुए कि उन्होंने करीब आठ साल तक शशि से बात तक नहीं की. सोचिए, एक तरफ बिजनेस डूबने का खौफ और दूसरी तरफ अपने ही पिता की खामोशी. जब हर दरवाजा बंद नजर आ रहा था और उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, तब उनकी पत्नी ढाल बनकर सामने आईं. उन्होंने अपनी जिंदगी भर की पूंजी यानी ₹30 लाख की बचत शशि के हाथ में रख दी. पत्नी के इस विश्वास ने डूबती नैय्या को सहारा दिया और शशि ने रात-दिन एक कर दिया.
Meet Shashi Kumar, who completed his https://t.co/BC6fLkcQNf from Bangalore University.After graduation, he worked at Wipro for 12 years and then left his job in the US to help farmers through Akshayakalpa. Today, it is making ₹600 crore a year.
— Vikas Alwys (@VikasAlwys) August 25, 2026
His father didn't talk to him… pic.twitter.com/KH7oi6sSQA
आंकड़ों की ज़ुबानी ऐतिहासिक कामयाबी
आज वही शशि कुमार और उनकी कंपनी 'अक्षय कल्प' सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं. जो कंपनी कभी पाई-पाई को मोहताज थी, आज उसका सालाना कारोबार ₹700 करोड़ तक पहुंच चुका है. आज यह वेंचर हर माह लगभग ₹60 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज कर रहा है.

2,800 किसानों की बदली तकदीर
2,800 से ज्यादा किसान आज सीधे इस मुहिम से जुड़े हैं. कंपनी हर किसान को औसतन ₹1.28 लाख प्रति माह का भुगतान करती है, यानी साल भर में किसानों की जेब में करीब ₹480 करोड़ जा रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जब 'विकास' नाम के यूजर ने शशि कुमार के इस असाधारण संघर्ष को साझा किया, तो यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई.
60 हजार से ज्यादा लोगों ने इसे देखा और ढेरों यूजर्स ने शशि के जज्बे को सलाम किया. किसी ने लिखा कि "इनकी छाछ का स्वाद बाजार के हर ब्रांड को मात देता है, कीमत थोड़ी ज्यादा है लेकिन पैसा वसूल है." तो किसी ने मांग की कि इस मॉडल को तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी लागू किया जाए.

पत्नी के साथ शशि कुमार
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