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चीन-पाकिस्तान सीमा पर और कश्मीर में कैसे हालात? CDS सुब्रमणि ने Gen Z को लेकर NDTV से कही बड़ी बात

सीडीएस ने कहा कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा की स्थिति स्थिर है, तो इसका श्रेय सरकार के मिले-जुले प्रयासों और सेना, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और हमारी खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को जाता है. हमने स्थिति को सफलतापूर्वक स्थिर किया है.

चीन-पाकिस्तान सीमा पर और कश्मीर में कैसे हालात? CDS सुब्रमणि ने Gen Z को लेकर NDTV से कही बड़ी बात
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने जेन जी को लेकर कहा कि वो आदर्शवादी हैं.

एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) एनएस राजा सुब्रमणि पहुंचे तो उन्होंने भारत की सुरक्षा और भविष्य पर बात की. सीडीएस से जब तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के मक्का समझौते पर सवाल किया तो उन्होंने उसका भी जवाब दिया. साथ ही भारतीय युवाओं को लेकर बड़ी बात की. उन्होंने कश्मीर को लेकर भी तस्वीर को बिल्कुल साफ किया. 

मक्का समझौते पर सीडीएस

मक्का समझौते पर सीडीएस ने कहा, 'मुझे लगता है कि इस इलाके के देश, खासकर पश्चिम एशिया में जो हो रहा है, उसे हम देख रहे हैं. जो भी फैसले लिए जा रहे हैं या गठबंधन बन रहे हैं, वे इस समय उनके हितों को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं. लेकिन गठबंधनों को समय की कसौटी पर खरा उतरना होता है, और तनाव या हितों के टकराव के समय भी उन्हें टिके रहना होता है. जहां तक भारत की बात है, हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं. पश्चिम एशिया में हमारे कई साझेदार हैं, जिनके साथ हम काम कर रहे हैं. हमारे लिए यह जरूरी है कि हमारे संप्रभु हितों की रक्षा हो और हम अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार काम करें. इसके अलावा, मैं यह कहना चाहूंगा कि एक सेना के तौर पर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन हों. हम घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे पास अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त साधन और संसाधन हों, साथ ही पूरे क्षेत्र में साझेदारियां भी मजबूत होती रहें.'

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क्या पाकिस्तान का साथ देगा सऊदी 

सीडीएस से एनडीटीवी ने पूछा कि पहलगाम या उरी जैसी स्थितियों के बाद सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते का क्या मतलब है? क्या इसका मतलब यह है कि सिर्फ पाकिस्तान से निपटने के बजाय, हमें इन तीनों देशों और उनकी सेनाओं का एक साथ सामना करना पड़ सकता है? साथ ही, यह देखते हुए कि सिंधु जल समझौते के बाद हमने देखा कि चीन ने इस्लामाबाद का बहुत सक्रिय रूप से समर्थन किया, इससे भारत के सामने मौजूद खतरे के बारे में आपके आकलन पर क्या असर पड़ता है? इस पर सीडीएसी ने कहा, 'मैं किसी काल्पनिक स्थिति पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा कि ऐसी स्थिति में सऊदी अरब क्या करेगा. हालांकि, मैं यह सुनिश्चित करना चाहूंगा कि एक सेना के तौर पर हम किसी भी स्थिति के लिए खुद को अच्छी तरह तैयार रखें. अगर हम रक्षात्मक रूप से तैयार हैं और हमारे पास पर्याप्त प्रतिरोध क्षमता है ताकि हमारे दुश्मन इसका फ़ायदा न उठा सकें, तो मुझे यकीन है कि हम अपनी रक्षा करने में सक्षम हैं. हम दूसरे देशों को यह नहीं बता सकते कि उन्हें क्या करना चाहिए. लेकिन हम वह कर सकते हैं, या उसकी योजना बना सकते हैं, जो हमें करना है. हमें उन जगहों पर ध्यान देना चाहिए, जहां से खतरे आ रहे हैं और उन खतरों को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय करने चाहिए.'

चीन के साथ लगी सीमा पर क्या हैं हालात

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने बताया, सशस्त्र बलों के तौर पर, हमारी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा मिशन और हमारा काम है. हम अपनी सतर्कता में कोई कमी नहीं आने देते और हमारे पास अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय हैं. मुझे लगता है कि सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए यही सबसे अच्छा तरीका है. मैं इस बात पर और जोर देना चाहूंगा कि हमने राजनीतिक स्तर पर तनाव कम होते देखा है. मुझे लगता है कि जहां तक बॉर्डर की स्थिति का सवाल है, जमीनी स्तर पर हमारे संपर्क बने हुए हैं. बॉर्डर पर तैनात कर्मियों की बैठकें भी समय-समय पर होती रहती हैं और, जहां तक स्थिति की बात है, अभी बॉर्डर पर हालात काफी स्थिर हैं और मुझे नहीं लगता कि चिंता की कोई बात है.

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पाकिस्तान से भारत को अभी कितना खतरा है? 

इस सवाल पर सीडीएस ने कहा, सबसे पहले मैं उन सीखों और आर्म्ड फोर्सेज़ के काम के बारे में बात करना चाहता हूं कि कोई भी आर्म्ड फ़ोर्स किसी टकराव के बाद या टकराव की तैयारी के दौरान चुपचाप नहीं बैठी रहती. सभी आर्म्ड फ़ोर्स भविष्य की स्थितियों के लिए लगातार तैयारी करती हैं, योजना बनाती हैं और आकस्मिक स्थितियों के लिए प्लानिंग करती हैं. जहां तक 'ऑपरेशन सिंदूर'की बात है, हम सभी जानते हैं कि यह एक ऐसा ऑपरेशन था, जिसे बहुत सटीकता से अंजाम दिया गया था; सेना को बहुत स्पष्ट राजनीतिक निर्देश मिले थे और हमने अपने लक्ष्य हासिल किए और साथ ही, हमने यह सुनिश्चित किया कि जब हमारे लक्ष्य पूरे हो जाएं तो हम उस टकराव से बाहर आ जाएं. जहां तक ​​पाकिस्तान की बात है, तो मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि हम अपनी सतर्कता में कोई कमी नहीं आने दे रहे हैं. चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ के तौर पर मेरा काम इन खतरों का विश्लेषण करना और उन पर नजर रखना है. साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी मेरी जिम्मेदारी है कि हमारी रक्षा तैयारी उच्च स्तर की हो. हमारे दुश्मनों के किसी भी खतरे या गलत हरकत को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम किसी भी स्थिति में तेजी और निर्णायक रूप से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहें, और जब हम कोई कार्रवाई करें, तो वह ऐसी हो, जिससे उन्हें सही सबक मिले.

कश्मीर में अब कैसे हैं हालात

सीडीएस ने कहा कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा की स्थिति स्थिर है, तो इसका श्रेय सरकार के मिले-जुले प्रयासों और सेना, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और हमारी खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को जाता है. हमने स्थिति को सफलतापूर्वक स्थिर किया है. साथ ही, हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि आतंकवादियों की संख्या कम रहे, भले ही उन्हें ढूंढना 'भूसे के ढेर में सुई खोजने' जैसा मुश्किल काम हो. हम उन पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं ताकि वे हमारे सुरक्षा बलों या नागरिकों पर कोई हमला न कर सकें और न ही कोई नुकसान पहुंचा सकें. 

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भारत के जेन जी से कितनी उम्मीदें

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ से जब जेन जी को लेकर सवाल किया गया तो बोले, 'हर पीढ़ी को लगता है कि अगली पीढ़ी को उतना पता नहीं है, जितना उन्हें है. लेकिन मुझे लगता है कि यह बिल्कुल गलत है. जहां तक मेरी बात है, मुझे युवा पीढ़ी के अधिकारियों, सैनिकों और अग्निवीरों से बहुत उम्मीदें हैं. आज वे टेक्नोलॉजी के मामले में बहुत आगे हैं. उन्हें जानकारी है और वे देश और अपने मकसद के प्रति समर्पित भी हैं. आज भी, हम नागरिक सुरक्षित हैं क्योंकि हमारे सैनिक, हमारी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स, हमारे एयरमैन और नाविक बहुत मुश्किल हालात में हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. ये युवा पुरुष और महिलाएं हमारी सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और वे टेक्नोलॉजी से लैस हैं. वे देश के मकसद के प्रति समर्पित हैं और मैं कहूंगा कि वे आदर्शवादी हैं और देश के लिए सबसे अच्छा करने के लिए प्रेरित हैं. आज, इन लोगों में कोडिंग करने की क्षमता है. उनमें टेक्नोलॉजी को समझने और उसका इस्तेमाल करके मनचाहे नतीजे पाने की क्षमता है. जो युवा सेना या आर्म्ड फोर्सेस में नहीं हैं, उनसे मैं कहना चाहूंगा कि आप में से हर कोई देश की सुरक्षा में योगदान दे सकता है. अपने-अपने तरीके से; इसके लिए सिर्फ़ वर्दी पहनना ज़रूरी नहीं है. इंजीनियर, वैज्ञानिक, उद्योगपति, इनोवेटर, रिसर्चर और एकेडेमिशियन के तौर पर, आप में से हर किसी की भारत की रक्षा तैयारियों, सुरक्षा और स्थिरता में भूमिका है. मैं युवा पीढ़ी की क्षमता को लेकर बहुत आश्वस्त हूं.'

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