करोड़ों का पैकेज, गूगल जैसी कंपनी में इंजीनियरिंग मैनेजर का रुतबा और एक सुरक्षित भविष्य. आम तौर पर कोई भी ऐसी नौकरी छोड़ने की सोच भी नहीं सकता. कॉरपोरेट की दुनिया में इसे 'गोल्डन हैंडकफ्स' यानी सोने की हथकड़ी कहा जाता है. एक ऐसा आरामदेह पिंजरा, जिससे बाहर निकलने का हौसला बहुत कम लोग जुटा पाते हैं. लेकिन IIT दिल्ली से पढ़े इस इंजीनियर ने लीक से हटकर सोचने की हिम्मत दिखाई. अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और फिर गूगल में शानदार पारी खेलने के बाद उन्होंने तय किया कि अब नौकरी नहीं, अपनी जमीन पर कुछ नया करेंगे. उन्होंने गूगल की कुर्सी छोड़ी और पूरी ताकत झोंक दी अपने ऑर्गेनिक फार्मिंग और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के स्टार्टअप को बड़ा बनाने में. 26 सितंबर 2026 को गूगल में उनका आखिरी दिन तय था. सब कुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था, लेकिन हकीकत की जमीन स्टार्टअप के ख्वाबों से कहीं ज्यादा सख्त निकली.
नीति बदली और बिखर गया स्टार्टअप का गणित
कहते हैं कि कारोबार में रिस्क तो होता है, लेकिन जब अचानक नियम और नीतियां बदल जाएं, तो बड़े से बड़ा प्लान भी पटरी से उतर जाता है. इस पूर्व गूगल मैनेजर के साथ भी ठीक यही हुआ. 26 अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से घोषित नीतिगत बदलावों ने उनके स्टार्टअप के पहिए पूरी तरह जाम कर दिए. नौबत यहां तक आ गई कि चलते-फिरते वेंचर पर ताला लगाने का खतरा मंडराने लगा.
जिस सपने के लिए टेक की दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक को लात मारी थी, वही सपना नीतिगत झटकों के आगे बेबस नजर आने लगा.
an engineering manager working at google left his 1 cr + package just to start a new buisness now regretting it 💀 pic.twitter.com/ZqijoQS0pU
— Asmit (@coolcoder56) August 30, 2026
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस: कॉरपोरेट में वापसी?
जब हालात हाथ से निकले, तो उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक बेबाक पोस्ट लिखकर अपनी दास्तान साझा की. उन्होंने साफ कहा कि अब वे दोबारा जॉब मार्केट में उतर रहे हैं और हैदराबाद, चेन्नई या बेंगलुरु में नई भूमिका तलाश रहे हैं. देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई.
कई लोगों ने माना कि आरामदेह कॉरपोरेट जिंदगी छोड़कर स्टार्टअप की राह पकड़ना हर किसी के बस की बात नहीं है. उन्होंने उनके हौसले की तारीफ की. कुछ यूजर्स का कहना था कि जिसके बायोडाटा में IIT, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियों का लीडरशिप अनुभव हो, उसके लिए भारतीय टेक हब में नया रोल पाना कोई मुश्किल काम नहीं होगा.
इस बीच गूगल की कथित 'कमबैक पॉलिसी' को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई, जहां कुछ यूजर्स ने दावा किया कि कंपनी पूर्व कर्मचारियों को बिना दोबारा इंटरव्यू दिए एक साल के भीतर वापसी का मौका देती है (हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है).
यह कहानी सिर्फ एक इंजीनियर के नौकरी तलाशने की नहीं है, बल्कि यह उस कड़वी हकीकत का आईना है जो दिखाती है कि टेक की हायर पोजीशन से निकलकर जमीनी कारोबार खड़ा करने की राह कितनी मुश्किल हैं.
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