- होर्मुज खुल रहा! क्या अब कम होगी पेट्रोल-डीजल और गैस की मार?
- तेल संकट टला तो क्या सस्ता होगा सफर और रसोई? भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज का .
- दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते से आई खुशखबरी, भारत में महंगाई पर पड़ सकता है असर.
दुनिया की नजरें पिछले तीन महीनों से अमेरिका-ईरान टकराव पर टिकी थीं. युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया था, जिसके कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं. लेकिन अब अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुलने का रास्ता साफ हो गया है. इस खबर का असर कुछ ही घंटों में वैश्विक बाजारों में दिखाई दिया. कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी तक गिरावट आई, शेयर बाजारों में तेजी लौटी और निवेशकों ने राहत की सांस ली.
केप्लर और एलएसईजी के शिप-ट्रैकिंग डेटा के आधार पर मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान डील के एलान के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले शुरुआती जहाजों में भारत की पेट्रोनेट कंपनी का चार्टर्ड एलएनजी टैंकर भी शामिल था. भारत सरकार की तरफ से भी इसकी पुष्टि की गई.
#LNG carrier Disha has safely transited the Strait of Hormuz, carrying 62,370 MT LNG cargo. The vessel is expected to arrive at Dahej on June 18th.
— PIB India (@PIB_India) June 15, 2026
Ministry of Ports, Shipping and Waterways continue to coordinate with the Ministry of External Affairs, Indian missions abroad,… pic.twitter.com/GaQig9JVfK
यह आवाजाही ऐसे समय में हो रही है जब कई शिपिंग कंपनियां अभी भी सावधानी बरत रही हैं. खबरों के मुताबिक, इंडस्ट्री ग्रुप्स ने इस समझौते का स्वागत तो किया है, लेकिन वे इस अहम समुद्री रास्ते से सामान्य कामकाज फिर से शुरू करने से पहले सुरक्षा हालात और संभावित माइन (समुद्री सुरंग) के खतरों के बारे में साफ जानकारी चाहते हैं.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की तेल आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन माना जाता है. दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. 28 फरवरी को जब युद्ध शुरू हुआ तो तेल की कीमतें बढ़ते बढ़ते 120 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थीं. अब शांति समझौते की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड करीब 83 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई करीब 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है.

होर्मुज स्ट्रेट के खुलने का भारत की तेल कंपनियों पर पहले पड़ेगा असर. राहत की दूसरी खेप आम आदमी की जेबों तक पहुंचेंगी.
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चार बार बढ़ चुकी हैं कीमतें
ईरान vs अमेरिका-इजरायल के बीच चले युद्ध के चलते कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से भारत भी अछूता नहीं रहा. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है. जहां इसकी जरूरत का करीब 85 फीसद तेल आयात करना पड़ता है. तो जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, उसका प्रत्यक्ष या परोक्ष असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
पिछले कुछ महीनों में भारत में आम लोगों ने खाने-पीने की चीजों, ट्रांसपोर्ट, हवाई यात्रा और रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी महसूस की है. इसकी एक बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर ऊर्जा लागत का बढ़ना भी रही है जिससे भारत में तेल की कीमतें चार बार बढ़ाई गईं.
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होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते ऑयल टैंकर
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कितनी बढ़ गई तेल की कीमतें?
जब फरवरी के आखिर में ईरान से जुड़े तनाव के कारण इस रास्ते पर संकट बढ़ा, तब तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ गया. कच्चा तेल 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 121 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इसका असर सिर्फ तेल कंपनियों पर नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ा. जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो भारत सरकार ने मार्च में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाई थी ताकि चुनावी राज्यों पर इसका असर न पड़े.
चुनाव खत्म होने के बाद पूरे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए गए. सीएनजी लगभग 6 रुपये प्रति किलो महंगी हुई और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी 89 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई. यानी अंतरराष्ट्रीय तेल संकट का असर भारतीय परिवारों की रसोई से लेकर यात्रा खर्च तक हर जगह महसूस किया गया.
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होर्मुज स्ट्रेट
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होर्मुज कितना अहम?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की संभावना बढ़ गई है. यही वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की सप्लाई गुजरती है. भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से अधिक कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसमें से करीब आधा तेल खाड़ी देशों से आता है और उसका रास्ता होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. इतना ही नहीं, भारत की एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा और प्राकृतिक गैस का भी काफी आयात इसी मार्ग पर निर्भर है.
क्या भारत में तेल की कीमतें कम होंगी?
युद्धविराम और होर्मुज के सामान्य होने की खबर के बाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. अगर यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत को कई मोर्चों पर राहत मिल सकती है.

पेट्रोल-डीजल पर दबाव घटेगा तो तेल कंपनियों की लागत कम होगी. इससे भविष्य में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा कम हो सकता है. युद्ध के दौरान एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई प्रभावित हुई थी. कई जगहों पर गैस आवंटन में कटौती करनी पड़ी थी. होर्मुज में आवाजाही सामान्य होने से फिलहाल सप्लाई चेन की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है.
इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ेगा. जिन सब्जियों और रसोई के राशन की कीमतें बढ़ने लगी थीं, फिलहाल उन पर लगाम लगने की उम्मीद है. साथ ही निर्माण सामग्री और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें भी और नहीं बढ़ेंगी.
राष्ट्र के स्तर पर देखें तो भारत का आयात बिल कम होगा तो विदेशी मुद्रा के भंडार पर दबाव घट सकता है और भारतीय रुपये की बेतहाशा बढ़ रही कीमतें धीरे-धीरे नीचे आ सकती है.
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अन्य देशों के मुकाबले में भारत पर असर कम पड़ा
ईरान vs इजरायल-अमेरिका युद्ध के दौरान भारत ने अपनी ईंधन जरूरतों के लिए केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय रूस, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी तेल खरीद बढ़ाई. इस दौरान सरकार ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान के ईंधन का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने का निर्देश दिया और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार इसके बुलेटिन जारी करता रहा ताकि पूरे देश को मौजूदा पर्याप्त स्टॉक से अवगत कराया जाए.
इतना ही नहीं तेल के लिए वैकल्पिक शिपिंग रूट्स के लिए अतिरिक्त जहाजों की व्यवस्था भी की गई. इसका मतलब साफ है कि 28 फरवरी से पहले बन रही तनाव की स्थिति से निपटने के लिए सरकार और उद्योग पहले ही तैयार थे.
अब जबकि स्थिति सामान्य होने की संभावना है तो जानकार बताते हैं कि होर्मुज में आवाजाही नियमित होने का सीधा फायदा विमानन, खाद, पेट्रोकेमिलक, शिपिंग और लॉजिस्टिक जैसे उद्योगों पर पड़ेगा क्योंकि तेल की ऊपर-नीचे होती कीमतों पर इन सेक्टर्स की लागत निर्भर करती है.
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petrol diesel price today on 7 june 2026
आम आदमी की जेब पर असर?
होर्मुज का खुलना भारत और भारतीयों के लिए एक ऐसी राहत की खबर है जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. सबसे पहले तो तेल और गैस की सप्लाई समुचित होगी, इसकी कोई कमी नहीं होगी. यह महंगाई को भी काबू में करेगा. हालांकि इस बात की फिलहाल कोई गारंटी नहीं है कि पेट्रोल और डीजल तुरंत सस्ते होंगे. पर अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार नीचे रहती हैं तो आने वाले कुछ महीनों में इसका फायदा भारत के लोगों तक भी पहुंच सकता है.
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