Gold Hallmarking Fee Hike: देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत होने वाली है और फिर शादी सीजन की. दुर्गा पूजा के बाद धनतेरस, दिवाली और फिर शादियों की तैयारी... जाहिर तौर पर इस दौरान सोने-चांदी की खूब खरीदारी होगी. लेकिन इससे पहले सोने की हॉलमार्किंग पर बड़ी खबर आई है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस बढ़ा दी है. 2, 4 या 10% नहीं, बल्कि करीब 67%.
अब हर गोल्ड आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये चार्ज देना होगा. पहले ये फीस 45 रुपये थी. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि ग्राहकों को हर गहने पर सीधे 30 रुपये ज्यादा देने होंगे.
नई फीस 14 सितंबर से लागू हो गई है. वहीं, चांदी के आर्टिकल की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है. चांदी के लिए पहले की तरह 35 रुपये प्रति आर्टिकल चार्ज देना होगा.
ये बदलाव ऐसे समय हुआ है जब त्योहारी और शादी का सीजन शुरू होने वाला है. इस दौरान सोने की ज्वेलरी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है. ऐसे में ज्वेलरी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हॉलमार्किंग फीस बढ़ने से सोने के गहनों का बिल भी बढ़ जाएगा?
सोने पर हॉलमार्किंग फीस कितनी बढ़ी?
नई फीस व्यवस्था के तहत ज्वेलर्स को हर सोने के आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए अब 75 रुपये देना होगा. पहले ये चार्ज 45 रुपये था.
यानी एक गोल्ड आर्टिकल पर हॉलमार्किंग फीस 30 रुपये बढ़ गई है. प्रतिशत में देखें तो ये करीब 66.7% की बढ़ोतरी है.
चांदी के आर्टिकल की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ये पहले की तरह 35 रुपये प्रति आर्टिकल रहेगी.
हॉलमार्किंग फीस→ | पहले | अब |
| गोल्ड आर्टिकल | ₹45 | ₹75 |
| सिल्वर आर्टिकल | ₹35 | ₹35 |
| मिनिमम गोल्ड कंसाइनमेंट | ₹200 | ₹200 |
| मिनिमम सिलिवर कंसाइनमेंट | ₹150 | ₹150 |
गोल्ड के लिए न्यूनतम कंसाइनमेंट चार्ज भी पहले की तरह 200 रुपये रहेगा, जबकि सिल्वर के लिए न्यूनतम चार्ज 150 रुपये ही रहेगा.
क्या हर गहने पर 30 रुपये ज्यादा देने होंगे?
जरूरी नहीं. ये बात समझना काफी जरूरी है. 75 रुपये की हॉलमार्किंग फीस वो चार्ज है जो ज्वेलर को एक मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग केंद्र (Assaying and Hallmarking Centre) को देना होता है. ये ऐसा अलग से 75 रुपये का चार्ज नहीं है, जिसे BIS ने ग्राहकों से हर सोने के गहने पर वसूलने के लिए अनिवार्य किया हो. इसलिए हॉलमार्किंग फीस बढ़ने का सीधा मतलब ये नहीं है कि ग्राहक को हर गोल्ड आर्टिकल पर 30 रुपये अतिरिक्त देने ही होंगे.
फिर ग्राहक की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ज्वेलर्स हॉलमार्किंग की बढ़ी हुई लागत को अपनी कीमत में किस तरह शामिल करते हैं.
यानी अगर कोई ज्वेलर इस अतिरिक्त लागत को अपनी ज्वेलरी की कीमत में शामिल करता है, तो इसका असर ग्राहक के अंतिम बिल पर पड़ सकता है. लेकिन इसे ग्राहक से अलग से ₹30 या ₹75 के हॉलमार्किंग चार्ज के रूप में लेना BIS की नई फीस का सीधा मतलब नहीं है.
इसलिए सोने की ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक को बिल ध्यान से देखना चाहिए.
ज्वेलरी खरीदते समय बिल जरूर देखें
सोने के गहने खरीदने वालों को सही और विस्तृत इनवॉयस लेना चाहिए. बिल में ज्वेलरी और उस पर लगाए जा रहे अलग-अलग चार्ज की जानकारी देखना जरूरी है.
खासकर इस बात को समझना जरूरी है कि BIS की फीस बढ़ने का मतलब ये नहीं है कि ग्राहक को हर गहने पर अलग से ₹30 ज्यादा देना अनिवार्य हो गया है.
अंतिम बिल कितना बढ़ेगा या नहीं बढ़ेगा, ये ज्वेलर की pricing पर निर्भर करेगा.
चांदी के गहनों (Silver Jewellery) पर क्या बदला?
चांदी के आर्टिकल की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसकी फीस पहले की तरह 35 रुपये प्रति आर्टिकल है. इसी तरह सिल्वर के लिए न्यूनतम कंसाइनमेंट चार्ज भी 150 रुपये ही रहेगा.

फेस्टिव और वेडिंग सीजन से पहले बढ़ी फीस
हॉलमार्किंग फीस में ये बदलाव ऐसे समय आया है जब देश में त्योहारी और शादी का सीजन (Festive and Wedding Season) शुरू होने वाला है. इस दौरान सोने की ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ती है.
ऐसे में ग्राहकों के लिए ये समझना जरूरी है कि नई फीस ज्वेलर्स की लागत को बढ़ाती है, लेकिन 75 रुपये की पूरी फीस सीधे ग्राहक के बिल में जुड़ना जरूरी नहीं है.
अगर ज्वेलर इस अतिरिक्त लागत को अपनी प्राइसिंग में शामिल करता है, तभी इसका असर ग्राहक की ओर से चुकाई जाने वाली कुल रकम पर पड़ सकता है.
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