महाराष्ट्र की उप-राजधानी कहे जाने वाले नागपुर में 'एडवांटेज विदर्भ 2026' के मंच से अदाणी समूह ने विदर्भ में 70,000 करोड़ के निवेश का ऐलान किया. इस निवेश से अगले कुछ वर्षों में करीब 30,000 नौकरियां पैदा होंगी. अदाणी ग्रुप की ओर से चेयरमैन गौतम अदाणी के बेटे और अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के निदेशक जीत अदाणी ने मंच से ये ऐलान किया. उन्होंने कहा अदाणी समूह विदर्भ में ऊर्जा सुरक्षा, उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां और सामुदायिक विकास के लिए एक पीढ़ीगत निवेश (Generational Investment) कर रहा है. इस मंच से जीत अदाणी ने विदर्भ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए इस क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी भविष्य का खाका पेश किया.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समावेशी विकास, नितिन गडकरी के कनेक्टिविटी विजन और देवेंद्र फडणवीस के क्षेत्रीय संतुलन के प्रयासों की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि इसी नेतृत्व की वजह से आज विदर्भ केवल संभावनाओं वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि प्रगति वाला क्षेत्र बन गया है.
₹70,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट
अदाणी ग्रुप की ओर से सबसे बड़ी घोषणा नागपुर के कलमेश्वर (लिंगा) में स्थापित होने वाला इंटीग्रेटेड कोल गैसीफिकेशन और डाउनस्ट्रीम डेरिवेटिव्स कॉम्प्लेक्स रही. जीत अदाणी ने इस प्रोजेक्ट की खासियतें भी बताईं.
यह प्रोजेक्ट नागपुर को क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी के ग्लोबल मैप पर ला खड़ा करेगा और भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा. 70,000 करोड़ रुपये के निवेश से 30,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी, जबकि अप्रत्यक्ष रूप में भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा.
महाराष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा का 'बैकबोन'
जीत अदाणी ने बताया कि अदाणी समूह महाराष्ट्र की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. यहां अदाणी ग्रुप तिरोड़ा प्लांट में 3,300 मेगावाट का सबसे उन्नत सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट संचालित कर रहा है. वहीं, नागपुर से सटे बुटीबोरी प्लांट में 600 मेगावाट के बुटीबोरी पावर प्लांट को फिर से शुरू कर समूह ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है. बिजली आपूर्ति की बात करें तो अदाणी ग्रुप महाराष्ट्र को कुल 6,600 मेगावाट बिजली सप्लाई कर रहा है, जो राज्य के उद्योगों और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.
लॉजिस्टिक्स, एविएशन और डिफेंस में दबदबा
विदर्भ को भारत के 'लॉजिस्टिक्स गेटवे' के रूप में स्थापित करने के लिए अदाणी समूह कई मोर्चों पर काम कर रहा है. MIHAN MRO हब एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. 'इंडामर टेक्निक्स' के अधिग्रहण के बाद मिहान में 30 एकड़ का MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) कॉम्प्लेक्स अब अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन रहा है.
वहीं दूसरी ओर बोरखेड़ी ICD की बात करें तो 75 एकड़ में फैला यह सेंटर माल ढुलाई की लागत कम करने और निर्यात बढ़ाने में मदद कर रहा है. महाराष्ट्र के 24 बॉर्डर चेक पोस्ट के अधिग्रहण से व्यापार में सुगमता आई है.
जिम्मेदार माइनिंग और 10 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य
गोंडखैरी में समूह की अंडरग्राउंड माइन को जीत अदाणी ने 'गोल्ड स्टैंडर्ड' बताया. यहां बिना किसी विस्थापन और बिना ब्लास्टिंग के तकनीक-आधारित माइनिंग हो रही है. समूह का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ पेड़ लगाने का है, जिसमें विदर्भ की अहम भूमिका होगी.
सामुदायिक विकास में अदाणी फाउंडेशन का योगदान
जीत अदाणी ने जोर देकर कहा कि विकास समावेशी होना चाहिए. अदाणी फाउंडेशन गोंदिया और नागपुर में स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल और महिला सशक्तिकरण (43 SHGs के माध्यम से) के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
जीत अदाणी ने अपनी स्पीच को इस वादे के साथ पूरा किया कि अदाणी ग्रुप, विदर्भ का केवल एक निवेशक नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक भागीदार (Long-term partner) है. उन्होंने कहा, 'विदर्भ मजबूत, अद्वितीय और पवित्र है. यह नेतृत्व करने के लिए तैयार है.'
ये भी पढ़ें: भारत बनेगा ग्लोबल डिफेंस हब: जीत अदाणी ने बताया डिफेंस सेक्टर के लिए ग्रुप का 'मेगा प्लान'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं