पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके में हालत बदतर हो चुके हैं. वहां की अवाम सड़कों पर उतर आई है. वह आर-पार की लड़ाई के मूड में है. वहां खून बह रहा है, गोलीबारी हो रही है और पाक सरकार? वो बस झूठी बातें कर रही है. पीओके की विधानसभा में 12 सीटों का विवाद आग की तरह भड़क गया. सुप्रीम कोर्ट ने इन सीटों को बरकरार रखने का फैसला दिया. इसके बाद हिंसक झड़पें शुरू हो गईं.जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के लोग विरोध कर रहे हैं.वो मांग कर रहे थे हैं ये 12 सीटें खत्म की जाएं, क्योंकि ये उनके हक को चुरा रही हैं.
लेकिन पाकिस्तान की सरकार ने क्या किया? दमन, गिरफ्तारियां और गोलीबारी. दर्जनों लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हो गए. हालांकि कहने वाले कह रहे हैं कि मरने वालों की तादाद सैकड़ों में है. ये पाकिस्तान का असली चेहरा है, कश्मीरियों को कुचलने वाला.
पीओके की किन 12 सीटों पर है विवाद
ये 12 सीटें क्या हैं? ये सीटें उन 'रिफ्यूजी' के लिए रिजर्व हैं जो 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे. असल में ये लोग अब पीओके में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में बसे हुए हैं.फिर भी इनकी 12 सीटें पीओके की 53 सदस्यीय असेंबली में हैं, छह जम्मू रीजन की और छह कश्मीर घाटी की. लोकल लोग चीख-चीख कर कह रहे हैं कि ये सीटें पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टियों के लिए 'ट्रंप कार्ड' हैं. चुनाव में धांधली करने के लिए इस्तेमाल होती हैं. ये सीटें लोकल आवाज को दबाती हैं. JAAC हर हाल में इन 12 सीटों को खत्म करवाने की मांग कर रही है. लेकिन पाक सरकार? बस टालमटोल कर रही है. कोर्ट ने कहा है कि बिना संवैधानिक संशोधन के इन सीटों को नहीं हटा सकते हैं. मतलब, पाकिस्तान पीओके को अपना गुलाम बनाए रखना चाहता है, वहां के असली लोगों को अधिकार नहीं देना चाहता है.
गुस्सा क्यों है? क्योंकि पाकिस्तान ने पीओके के हितों की तरफ कभी ध्यान नहीं दिया. सिर्फ बातें की कि 'कश्मीर हमारा है'. लेकिन जमीन पर? लूट, शोषण और बदहाली का बोलबाला है. बिजली के बिल आसमान छू रहे हैं, आटा महंगा, टैक्स बोझ, नौकरियां नहीं. लोग कह रहे हैं कि पाकिस्तान ने पीओके को सिर्फ सैन्य कैंप और रणनीतिक इलाका बना रखा है. संसाधन लूट लिए जाते हैं. लेकिन स्थानीय लोगों को कुछ नहीं मिलता.
आसमान छूते आटे और बिजली के दाम
पिछले सालों में भी हिंसक प्रदर्शन हुए. बिजली और आटे के दामों पर 2024-25 में पीओके जला था. वादे किए गए, लेकिन पूरे नहीं हुए. अब फिर आग भड़की है. पाक फौज और पुलिस ने ज्यादती की, इंटरनेट बंद, गिरफ्तारियां. ये है पाकिस्तान की 'मातृभूमि' वाली मुहब्बत!
वहीं अगर हम भारतीय कश्मीर यानी जम्मू-कश्मीर और पीओके में जमीन-आसमान का फर्क है. भारत वाले कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज है. टूरिज्म फल-फूल रहा है. नए एयरपोर्ट, सड़कें, हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटीज बन रहे हैं. 2025-26 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का सेंट्रल असिस्टेंस दिया. जीडीपी ग्रोथ 9.5 फीसदी के आसपास, कुल जीडीपी हजारों करोड़ में. वहां लोगों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, अस्पतालों की संख्या 2800 से ज्यादा है, मंहगाई कंट्रोल में है. लोग शांति से जी रहे हैं, विकास होते हुए देख रहे हैं. जी20 समिट तक हो चुका है.
भारत-पाकिस्तान का अंतर
दूसरी तरफ पीओके? बदहाली का मंजर. वहां मात्र 23 हॉस्पिटल्स हैं, दो एयरपोर्ट हैं, एयर ट्रैफिक भारत के मुकाबले 12 गुना कम है. बिजली संकट स्थायी है, सड़कें खस्ताहाल हैं. पाकिस्तान पीओके को अपना कब्जा बनाए रखने के लिए इस्तेमाल करता है, लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं. संसाधन लूटकर पाकिस्तान ले जाता है. लोग विरोध जताते हैं तो गोली मिलती है.
वहीं भारतीय कश्मीर के लोग स्कूल-कॉलेज, दफ्तर जाते हैं, टूरिस्ट आते हैं, बिजनेस करते हैं. पीओके में? रोज की जंग. बिजली के बिल, महंगाई और पाकिस्तानी दमन के खिलाफ. पाक सरकार राग कश्मीर अलापती है, लेकिन खुद पीओके को जेल बना रखा है. असल में ये पूरे सिस्टम की नाकामी है. JAAC ने 38 मांगें रखी हैं. इनमें सस्ता आटा, सस्ती बिजली, टैक्स राहत, राजनीतिक सुधार और 12 सीटों को खत्म करना शामिल है.लेकिन पाकिस्तान सरकार सिर्फ दमन कर रही है.
ये गुस्सा जायज है. पाकिस्तान ने पीओके के लोगों को धोखा दिया. भारत का कश्मीर इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, इकोनॉमी के क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है. पीओके पिछड़ता जा रहा है. वहां के लोग अब समझ गए हैं कि पाकिस्तान उनका दोस्त नहीं, शोषक है.
पीओके की बदहाली का सच क्या है
12 सीटों का मुद्दा इसलिए भड़का क्योंकि ये दिखाता है कि पाकिस्तान सरकार लोकल वोटर्स को दरकिनार कर अपना एजेंडा थोपना चाहती है.रिफ्यूजी सीट्स पर चुने गए लोग अक्सर पाकिस्तान सरकार और आर्मी के इशारे पर काम करते हैं, लोकल हितों को नजरअंदाज करते हैं. कोर्ट का फैसला आया और तुरंत हिंसा भड़क गई. पाक मीडिया चुप, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियोज वायरल हो रहे हैं.
भारत के कश्मीर की तुलना में तो ये स्वर्ग-नर्क जैसा फर्क है. यहां पर्यटन, सेब की खेती, हैंडीक्राफ्ट, आईटी, फिल्म शूटिंग सब हो बढ़ रहा है. युवा नौकरी पा रहे हैं. वहां? लोकल इकोनॉमी मर चुकी है.
पाक सरकार का दोहरा चरित्र दुनिया देख रही है. भारत बार-बार कहता है कि पीओके भारत का हिस्सा है और वहां के लोग विकास चाहते हैं. पाकिस्तान की नाकामी साफ है. पीओके की कहानी दर्द की है. पाकिस्तान ने वहां के लोगों के साथ विश्वासघात किया. 12 सीटों का विवाद, आर्थिक पिछड़ापन, दमन साबित करता है कि पाकिस्तान पीओके को आजाद नहीं, गुलाम बनाए रखना चाहता है. भारत का कश्मीर चमक रहा है, विकास की राह पर. पीओके के लोग अब जाग रहे हैं. उनका गुस्सा पाकिस्तान की लुटेरा नीतियों के खिलाफ है. अब पाकिस्तान की सरकार को जवाब देना होगा. केवल वादे नहीं, असली काम. लेकिन इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान सिर्फ बातों का बादशाह है. भारत का कश्मीर मिसाल है कि लोकतंत्र और विकास साथ चल सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, वो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अलग-अलग विषयों पर लेख लिखते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)