- पाकिस्तान के हमलों में अफगानिस्तान में सीमा के पास कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई
- पाकिस्तान के रात के अंधेरे में अफगानिस्तान की जमीन पर हमला किया है
- पाकिस्तानी सेना ने फिर से अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और3 प्रांतों में नागरिक घरों पर बमबारी
पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान की धरती को मासूम अफगानियों के खून ने लाल कर दिया है. पाकिस्तान के हमलों में अफगानिस्तान में सीमा के पास कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी अफगान सरकार के अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों ने बुधवार, 10 जून को दी. यह पिछले कई हफ्तों में सबसे घातक हमला बताया जा रहा है. पाकिस्तान के रात के अंधेरे में अफगानिस्तान की जमीन पर हमला किया है.
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “X” पर लिखा, “पिछली रात पाकिस्तानी सेना ने फिर से अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में नागरिक घरों पर बमबारी की.” उन्होंने बताया कि इन हमलों में 11 बच्चे, 1 महिला और 1 बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई.
अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर एएफपी से बात की और बताया कि स्पेरा जिले में एक घर पर हमला हुआ जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग घायल हो गए. वहीं पड़ोसी पक्तिका प्रांत में दो निवासियों ने बताया कि बरमल जिले में एक अलग हमले में 3 नागरिक मारे गए. एक निवासी के अनुसार यह हमला एक घर पर हुआ और मरने वाले सभी बच्चे थे.
पाकिस्तान की सेना यह झूठा दावा करती रही है कि उसका मकसद नागरिकों को निशाना बनाना नहीं होता. पाकिस्तान सेना की ओर से यह हमले हाल के हफ्तों में सबसे घातक बताए जा रहे हैं और फरवरी के अंत में दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद आई थोड़ी शांति के बाद हुए हैं. तब सीमा पर भीषण लड़ाई हुई थी और पाकिस्तान ने अफगान शहरों पर हवाई हमले किए थे, जिनमें राजधानी काबुल और दक्षिणी कंधार भी शामिल थे, जहां तालिबान के लीडर रहते हैं.
कम से कम 372 नागरिक मार चुका पाकिस्तान
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल के पहले तीन महीनों में उस संघर्ष में कम से कम 372 अफगान नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए थे. 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. सुरक्षा मुद्दे सबसे बड़ा विवाद रहे हैं, खासकर पाकिस्तान की यह मांग कि अफगानिस्तान “तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)” जैसे आतंकी समूहों पर रोक लगाए.
इस्लामाबाद आरोप लगाता है कि तालिबान सरकार आतंकियों को पनाह देती है और पाकिस्तान में बढ़ते हमलों के पीछे TTP का हाथ है, जिसने वर्षों से हिंसक अभियान चला रखा है. हालांकि एक बड़ी सच्चाई यह है कि पाकिस्तान अपने जन्म से ही आतंकवाद को एक टूल की तरह इस्तेमाल करता आया है और उसका पाला यही सांप उसे डंस रहा है. अफगान अधिकारी भी पाकिस्तान के इन आरोपों को नकारते हैं और कहते हैं कि पाकिस्तान भी दुश्मन समूहों को पनाह देता है और अफगानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान नहीं करता.
पिछले अक्टूबर में हिंसा बढ़ने के बाद से दोनों देशों की सीमा काफी हद तक बंद है, जिससे व्यापार भी ठप हो गया है.
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