नीतीश कुमार को आखिर क्यों बोलना पड़ा कि उनकी पार्टी में एकजुट हैं सब?

मुख्यमंत्री और जेडीयू के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार ने पार्टी के आंतरिक विवाद को विराम देते हुए कहा कि हमारे यहां कहीं किसी का कोई गुट नहीं है

नीतीश कुमार को आखिर क्यों बोलना पड़ा कि उनकी पार्टी में एकजुट हैं सब?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो).

पटना:

बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) में फिलहाल दो गुट हैं. एक गुट की अगुवाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और दूसरे की केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह करते हैं. यह बात मानते हुए मुख्यमंत्री और पार्टी के सर्वेसर्वा नीतीश कुमार ने इस आंतरिक विवाद को विराम देते हुए कहा कि हमारे यहां कहीं किसी का कोई गुट नहीं है. ऐसा कुछ नहीं है, और लोगों को गलतफहमी है. 

नीतीश कुमार इन दिनों दिल्ली प्रवास पर हैं. उन्होंने अपने आवास के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी में ऐसा कुछ नहीं है और ऐसा कोई अलग नहीं है, बल्कि सब एकजुट हैं और एक साथ हैं. नीतीश ने ये भी कहा कि बहुत लोग, बहुत तरह की अपनी अपनी भाषा बोलता हैं लेकिन ये सब मत सोचिएगा, ऐसा कुछ नहीं है. उन्होंने माना कि ऐसी बात लोग करते हैं कि हमारे यहां किसी का कोई गुट है. लेकिन उनके अनुसार ऐसा लोगों को भ्रम है. 


नीतीश ने सदस्यता अभियान पर भी सवालों का जवाब यह कहकर दिया कि पार्टी की सदस्यता कोई भी कभी भी ग्रहण कर सकता है, लेकिन इसके लिए अभियान तीन वर्षों पर शुरू होता है. इसके सम्बंध में कुछ महीनों में पार्टी अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह जानकारी और घोषणा करेंगे. नीतीश के बयान से साफ़ है कि पार्टी के अंदर गुटबाज़ी और उठापटक का उन्हें ना केवल अंदाज़ा हैं बल्कि अब उन्हें लगता है कि इस पर विराम लगाया जाए. 

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इससे पूर्व शुक्रवार को नीतीश, केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के यहां से शादी समारोह में भाग लेने के बाद आरसीपी सिंह के आवास पर भी गए और बातचीत की. इस सम्बंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे उनकी पार्टी में हैं तो जाएंगे नहीं. नीतीश के बयान से साफ़ हैं कि कुछ कारणों से उनकी आरसीपी सिंह से नाराज़गी हो सकती है लेकिन फ़िलहाल वे इस विवाद को और अधिक तूल नहीं देना चाहते. निश्चित रूप से ललन गुट के नेताओं को इस बयान से मायूसी छाई है क्योंकि उन्हें लग रहा था कि शायद राज्यसभा चुनावों में आरसीपी का पत्ता कट जाए.