- बिहार विधानमंडल का बजट सत्र करीब एक महीने तक चलेगा, इसमें सरकार के वार्षिक खर्च और योजनाएं प्रस्तुत की जाएंगी
- राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन में सरकार की उपलब्धियों और प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी जिसमें विपक्ष सवाल उठाएगा
- बजट सत्र में विधेयकों पर बहस और हंगामा आम है, सरकार और विपक्ष दोनों सदन में अपनी रणनीति के साथ सक्रिय रहेंगे
बिहार विधानमंडल के बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है और यह सत्र करीब एक महीने तक चलने वाला है. हर साल की तरह इस बार भी बजट सत्र को सबसे अहम सत्र माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान सरकार पूरे साल के खर्च और योजनाओं का खाका सदन के सामने रखती है. यह सत्र सरकार के साथ-साथ विपक्ष के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में आने वाले एक महीने तक बिहार की राजनीति पूरी तरह बजट सत्र के इर्द-गिर्द घूमती नजर आएगी.
विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठाएगा
बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण से हुई. राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए सरकार ने यह बताया कि पिछले साल उसने क्या काम किए और आगे उसकी क्या प्राथमिकताएं रहने वाली हैं. इस अभिभाषण पर अब सदन में चर्चा होगी, जिसमें विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठाएगा और अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगा. अक्सर इसी बहस से यह संकेत मिल जाता है कि पूरे सत्र का माहौल कैसा रहने वाला है.
बिहार में 3 फरवरी को होगा बजट पेश
इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन, मंगलवार, यानी बजट पेश किए जाने वाला दिन है. बजट के जरिए सरकार यह बताती है कि अगले वित्तीय वर्ष में पैसा कहां-कहां खर्च किया जाएगा. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, महिला कल्याण, किसान और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर बजट में कितना ध्यान दिया जाएगा, इस पर सभी की नजर रहती है. आम लोगों के लिए बजट का मतलब यही होता है कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में क्या बदलाव आएगा.
इस बार का बजट सत्र क्यों है खास?
इस बार का बजट सत्र इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि राज्य में राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं. आने वाले महीनों में चुनावी माहौल बनने वाला है, ऐसे में सरकार बजट के जरिए अपनी उपलब्धियों को सामने रखना चाहेगी. सरकार विकास, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी ताकत के रूप में पेश करेगी और यह दिखाने की कोशिश करेगी कि उसने जनता के लिए काम किया है.
वहीं विपक्ष इस सत्र में सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है. भले ही विपक्ष की संख्या सदन में कम हो, लेकिन मुद्दों की कमी नहीं है. कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और सरकारी योजनाओं में खामियों जैसे मुद्दों को विपक्ष जोर-शोर से उठाने की योजना बना रहा है. इसके लिए स्थगन प्रस्ताव और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए जा सकते हैं, ताकि सरकार को जवाब देना पड़े.
बजट सत्र के दौरान सदन में हंगामा होना आम बात मानी जाती है. कई बार विपक्ष के विरोध के चलते सदन की कार्यवाही बाधित होती है और समय बर्बाद होता है. इस बार भी ऐसे हालात बन सकते हैं. विपक्ष का कहना है कि अगर सरकार गंभीर सवालों से बचने की कोशिश करेगी, तो विरोध करना मजबूरी होगी. वहीं सरकार का आरोप रहता है कि विपक्ष जानबूझकर हंगामा करता है.
बजट सत्र को लेकर क्या है सरकार की तैयारी?
सरकार की तरफ से भी सत्र को लेकर तैयारी की गई है. मंत्रियों और सत्तारूढ़ दल के विधायकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सदन में सरकार का पक्ष मजबूती से रखें. सरकार यह संदेश देना चाहती है कि राज्य की आर्थिक स्थिति नियंत्रण में है और विकास कार्य लगातार चल रहे हैं. बजट में यह भी दिखाने की कोशिश होगी कि सीमित संसाधनों के बावजूद अलग-अलग क्षेत्रों में संतुलन बनाकर खर्च किया जा रहा है.
इस एक महीने लंबे सत्र में सिर्फ बजट ही नहीं, बल्कि कई अहम विधेयक भी सदन में लाए जा सकते हैं. कुछ पुराने कानूनों में बदलाव और कुछ नई योजनाओं को कानूनी रूप देने की कोशिश होगी. इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो सकती है. कई बार इन बहसों के दौरान सदन का माहौल और भी गरम हो जाता है.
बजट से क्या हैं जनता की उम्मीदें?
बजट सत्र के दौरान सदन के बाहर भी राजनीति तेज रहती है. विधानसभा परिसर में धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और मीडिया के सामने बयानबाजी आम बात है. विपक्ष सड़क से लेकर सदन तक सरकार को घेरने की कोशिश करता है, जबकि सत्ता पक्ष अपने फैसलों का बचाव करता नजर आता है. आम जनता की नजर पूरे बजट सत्र पर टिकी रहती है. लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस बार उन्हें किसी तरह की राहत मिलेगी.
युवाओं को रोजगार से जुड़े फैसलों की उम्मीद रहती है, महिलाओं को योजनाओं में बढ़ोतरी की आस होती है और किसानों की नजर खेती से जुड़े प्रावधानों पर रहती हैं. बजट सत्र में लिए गए फैसले पूरे साल की दिशा तय करते हैं.विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के लिए भी यह सत्र चुनौती भरा होता है. उनका प्रयास रहता है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले और ज्यादा से ज्यादा कामकाज हो सके. लेकिन बजट सत्र में हंगामा और व्यवधान को पूरी तरह रोक पाना आसान नहीं होता.
बजट सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम
कुल मिलाकर, बिहार विधानमंडल का यह बजट सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम है. सरकार को अपने बजट और कामकाज के जरिए जनता का भरोसा बनाए रखना है, जबकि विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है. आने वाला एक महीना यह तय करेगा कि यह सत्र केवल हंगामे के लिए जाना जाएगा या फिर सार्थक बहस और ठोस फैसलों के लिए याद रखा जाएगा.
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