Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स मीटिंग ले रहे चीफ इंजीनियर के रूम में दाखिल होकर उनसे बहस करता नजर आ रहा है. जब अधिकारी ने उनसे पूछा- क्या आपने अपॉइंटमेंट ली थी, तो वो शख्स नाराज हो जाता है और कहता है- 'कैसा अपॉइंटमेंट? आप एक पब्लिक सर्वेंट हैं. वर्कर्स के साथ गलत हुआ है और आप प्रिंसिपल अथॉरिटी हैं. अपनी उनकी बात सुननी होगी. मीटिंग चल रही थी इसीलिए मैं चुपचाप पहले बाहर खड़ा था.'
क्यों हुई थी बहस?
नागपुर डिवीजन के चीफ इंजीनियर संभाजी शिवाजी से बहस करने वाले शख्स की पहचान यश गौरखेड़े के रूप में हुई है, जो नागपुर की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी 'जन बदलाव पार्टी' के संस्थापक हैं. गौरखेड़े ने आरोप लगाया है कि PWD ठेकेदार द्वारा काम पर रखे गए मजदूरों को तय न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया जा रहा था, और उनके हस्तक्षेप के बाद जब इन मजदूरों का वेतन बढ़ाया गया, तो 17 मजदूरों को काम से निकाल दिया गया.
'वेतन बढ़ाया नौकरी छिनी'
गौरखेड़े के अनुसार, ठेकेदार के पास काम करने वाले लगभग 40 मजदूरों को हर महीने 8,000 से 9,000 रुपये मिल रहे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने यह मुद्दा उठाया, तो 17 मजदूरों का वेतन बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया. हालांकि, गौरखेड़े ने आगे यह भी आरोप लगाया कि बाद में उन्हीं 17 मजदूरों को उनके काम से हटा दिया गया.
यहां देखें पूरा वीडियो:-
Yash Gaurkhede, a Nagpur-based social activist known as the face of the Cockroach Janata Party and the founder of the newly announced Bharatiya Janbadlaav Party, has alleged serious irregularities in wage payments to labourers working under a contractor engaged by the state Public Works Department (PWD). Gaurkhede claims that around 40 labourers were being paid just ₹8,000-₹9,000 per month, allegedly below prescribed wage norms. According to him, after he raised the issue, the salaries of 17 workers were increased to ₹12,000. However, he alleges that all 17 were subsequently removed from their jobs. The activist further claims he attempted to meet the PWD Chief Engineer of the Nagpur division to raise the matter but was denied entry due to an ongoing meeting. He says this led to a confrontation over the requirement of an appointment to meet a public official. According to Gaurkhede, the official later assured him that efforts would be made to reinstate the workers. Gaurkhede says he will continue to pursue the issue and plans to meet officials again to seek reinstatement of the labourers and payment of their pending dues. #Nagpur #YashGaurkhede #BharatiyaJanbadlaavParty #CockroachJanataParty #PWD
— NDTV (@ndtv) November 6, 2026
'पहले मीटिंग की वजह से नहीं मिल सका'
उन्होंने दावा किया कि बाद में उन्होंने इस मामले को उठाने के लिए राज्य PWD के नागपुर डिवीजन के मुख्य अभियंता संभाजी शिवाजी माने से मिलने की कोशिश की. गौरखेड़े के अनुसार, शुरुआत में वे उस अधिकारी से नहीं मिल सके क्योंकि उस समय एक विभागीय बैठक चल रही थी. साथ ही, एक कर्मचारी ने उन्हें सलाह दी कि वे इस मुद्दे को ठेकेदार के सामने रखें.
गौरखेड़े ने आरोप लगाया कि इसके बाद वे उस कक्ष में गए जहां बैठक चल रही थी, और उनसे पूछा गया कि क्या उनके पास अपॉइंटमेंट है. उन्होंने बताया कि उन्होंने जवाब में उस अधिकारी को एक लोक सेवक के रूप में उनकी जिम्मेदारी और कर्मचारियों की शिकायतों पर ध्यान देने की आवश्यकता की याद दिलाई.
'जिनसे बहस हुई वो IAS नहीं हैं'
वीडियो वायरल होने के बाद अगले दिन गौरखेड़े ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी राज्य के PWD विभाग के चीफ इंजीनियर हैं, न कि कोई IAS या IPS अधिकारी. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अपनी बात पर जोर देने के लिए ही उन्होंने ऐसा कहा था. उनके अनुसार, मुख्य अभियंता ने उन्हें आश्वासन दिया कि प्रभावित कर्मचारियों को काम पर वापस रखने के लिए प्रयास किए जाएंगे. कार्यकर्ता ने कहा कि वह इस मामले को आगे बढ़ाएंगे और कर्मचारियों के उन बकाये का भुगतान कराने की कोशिश करेंगे, जिनका अभी तक भुगतान नहीं किया गया है.
यहां देखें नया वीडियो:-
NDTV ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए मुख्य अभियंता माने से संपर्क किया. हालांकि, खबर छपने के समय वे टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे. ठेकेदार का पक्ष भी स्वतंत्र रूप से नहीं मिल सका.
सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं.
एक यूजर ने लिखा, 'अफसरों को जनता की शिकायतों का समाधान करना चाहिए. वह एक कल्याणकारी राज्य के अंतर्गत काम कर रहे हैं, न कि ब्रिटिश शासनकाल के किसी कलेक्टर की तरह.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'ये सरकारी अधिकारी सरकारी खजाने से हजारों करोड़ कमा रहे हैं और जनता के सामने अकड़ दिखाते हैं.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'किसी भी सरकारी संगठन या संस्थान में काम करने वाला हर कर्मचारी एक लोक सेवक होता है.'
चौथे यूजर ने लिखा, 'एक जनसेवक के तौर पर, क्या हमें ऐसी बैठक में सवाल पूछना चाहिए? वे भी इंसान ही हैं. अगर आपकी जगह पर आपका भाई या बहन बैठा हो, तो क्या आप उनसे ऐसे लहजे में बात करेंगे? क्या सिर्फ इसलिए कि वहां नेता मौजूद हैं, हमें अपना तरीका ही भूल जाना चाहिए?'
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