Viral Video: प्रोडक्ट डिजाइनर शयोली सिंह (Shayoli Singh) अपने बच्चे संग भारतीय रेलवे (Indian Railways) के 2nd AC कोच में सफर करके पछता रही हैं. इंस्टाग्राम पर अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, 'मुझे सच में लगा था कि हमारे बच्चे के साथ ट्रेन के सफर के लिए 2AC काफी आरामदायक रहेगा. लेकिन मैं गलती थी. अब मैं कभी भी बच्चे के साथ 2AC में सफर नहीं करूंगी. मैं हमेशा आने-जाने के लिए 1st AC को ही चुनूंगी.'
2nd AC में सफर क्यों पसंद नहीं आया?
श्योली बताती हैं, 'बर्थ की जगह बहुत ही कम और तंग थी. हमारे पास साइड लोअर और साइड अपर बर्थ थी, और अपने बच्चे के साथ आराम से बैठना भी मुश्किल हो रहा था. ऊपर से लगातार होने वाली परेशानियां. लोगों के खर्राटे, बातचीत, फेरीवालों का कोच में बार-बार आना-जाना और इन सब से मेरा बच्चा परेशान और चिड़चिड़ा होता जा रहा था. सफाई भी एक बड़ी समस्या थी. हाउसकीपिंग वाले कई बार पोंछा लगाते थे, लेकिन लोग चाय के कप, चिप्स के पैकेट और कचरा इधर-उधर फेंकते रहते थे. और फिर हमारी सीटों के आस-पास कॉकरोच भी थे.'
'कॉकरोच की वजह से सो भी नहीं पाए'
श्योली ने आगे कहा, 'बस, वही आखिरी बात थी. हम ठीक से सो नहीं पा रहे थे, क्योंकि मुझे हर समय यही चिंता सता रही थी कि कहीं वे बच्चे के पास न आ जाएं. बच्चे के साथ सफर करने पर मुझे एहसास हुआ कि जगह, प्राइवेसी, साफ-सफाई और शांति असल में कितनी जरूरी है. मैं इंडियन रेलवेज से पूछना चाहती हूं कि पटना-पुणे रूट पर 1AC का सही ऑप्शन क्यों नहीं है? जब आप बच्चे के साथ इतनी लंबी दूरी का सफर करते हैं, तो जगह, प्राइवेसी और साफ-सफाई कोई लग्जरी नहीं होती. ये सफर को बहुत आसान बना देती हैं.'
यहां देखें पूरा वीडियो:-
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन्स
इंस्टाग्राम पर 31 अगस्त को पोस्ट किए गए इस वीडियो को मात्र 19 घंटे में 1.7 मिलियन (17 लाख से ज्यादा) लोग देख चुके हैं. ये वीडियो तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिस वजह से व्यूज और कमेंट्स का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है. इस वीडियो को देखने के बाद लोगों ने अलग-अलग रिएक्शन्स दिए हैं:-
एक यूजर ने लिखा, 'एक पेरेंट होने के नाते, मैं अपने आस-पास के लोगों से यह उम्मीद नहीं कर सकता और न ही करूंगा कि वे मेरे बच्चे के हिसाब से बदलाव करें. ट्रेन में फेरीवालों का घूमना आम बात है. आम समय में लोगों का बातचीत करना भी सामान्य है. लोगों का खर्राटे लेना एक समस्या है, जिस पर खुद उनका भी बस नहीं होता. यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. एक पेरेंट के तौर पर, यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप यह पक्का करें कि आपका बच्चा आरामदायक महसूस करे. टिकट बुक करते समय सही ऑप्शन चुनें. अगर यह आखिरी समय की यात्रा थी, तो मुझे नहीं लगता कि आप कोई शिकायत कर सकते हैं.'
दूसरे यूजर ने कहा, 'साइड वाली सीटें असल में आरामदायक नहीं होतीं. बिना बच्चे के ट्रैवल करने पर भी मेरा 2AC का अनुभव बहुत खराब था. इसलिए, अगली बार जब मैंने बच्चे के साथ 2AC में यात्रा की, तो मैंने निचली सीट चुनी और किस्मत से मुझे वह मिल भी गई. बच्चे के साथ यात्रा करने के लिए वे सीटें वाकई अच्छी और आरामदायक थीं.'
तीसरे यूजर ने कहा, 'मैं आपसे सहमत हूं. मैंने भी लंबी दूरी की आरामदायक यात्रा के लिए 2AC में यही सीटें बुक की थीं, लेकिन बच्चे के साथ यह अनुभव बहुत बुरा रहा. पैसे की पूरी बर्बादी थी.'
चौथे यूजर ने कहा, 'खुद को हर तरह की स्थिति में ढलना सीखो. जिंदगी ऐसे हालात में बहुत कुछ सिखाती है. उनसे सीखो.'
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