Amal Clooney Women Empowerment Award: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो तकदीर की लकीरें भी घुटने टेक देती हैं. बहराइच के रिसिया ब्लॉक की रहने वाली 23 साल की नैना ने ये साबित कर दिखाया है. एक वक्त था जब घर के हालात इतने खराब थे कि नैना को पढ़ाई जारी रखने के लिए खेतों में मेहनत-मजदूरी करनी पड़ती थी और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना पड़ता था.
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आर्थिक तंगी ने कई बार उनके सपनों की राह रोकने की कोशिश की, पर नैना का इरादा अटूट था, फिर उनकी जिंदगी में 'प्रोजेक्ट लहर' का उजाला आया. आगा खान फाउंडेशन के साथ जुड़कर उन्होंने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि पढ़ाई पूरी कर अब वो दूसरी लड़कियों के लिए मिसाल बन गई हैं.
लंदन में गूंजा भारत का नाम (International recognition for Naina)
लंदन के प्रतिष्ठित 'द किंग्स ट्रस्ट सेलिब्रेशन' में नैना को 'अमल क्लूनी महिला सशक्तिकरण पुरस्कार' से नवाजा गया इस दौरान उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला से मिलने का सौभाग्य मिला. ये सम्मान सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि उन लाखों लड़कियों की जीत है जो अभाव में भी सपने बुनती हैं.

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बाल विवाह के खिलाफ बनी ढाल (UP girl success story)
आज नैना अपनी एक छोटी सी टीम के साथ मिलकर बाल विवाह रोकने और लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम छेड़ चुकी हैं. वे किशोरियों के लिए 'लाइफ स्किल्स कोच' बनकर उन्हें अपने हक के लिए लड़ना सिखा रही हैं. बहराइच की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि कामयाबी किसी बड़ी डिग्री की मोहताज नहीं होती, बस कुछ कर दिखाने का जज्बा चाहिए. नैना की यह दास्तां उन तमाम युवाओं के लिए एक सबक है, जो मुश्किलों को अपना मुकद्दर मानकर बैठ जाते हैं. अगर नैना जैसा हौसला हो, तो बहराइच के खेतों से निकलकर लंदन के शाही महल तक का सफर तय करना नामुमकिन नहीं है.
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