Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला टूरिस्ट कारगिल जिले के मिनामार्ग चेक पोस्ट (Minamarg Check Post) पर रोड ब्लॉक के विरोध में सुरक्षाबलों के साथ तीखी बहस करती नजर आ रही है. वे कह रही हैं, 'हम Gen Z हैं. हम इस बर्ताव को बर्दाश्त नहीं करेंगे. हम लोग पैसे देकर यहां घूमने आते हैं या रोड ब्लॉक जैसी चीजों का सामना करने आते हैं. इन्होंने अचानक रास्ता बंद करके ताला लगा दिया है. कश्मीरियों के साथ तो करते ही हैं, अब उन लोगों के साथ भी कर रहे हैं जो लोग यहां घूमने आते हैं. पूछने पर कोई अधिकारी नाम नहीं बता रहा है और कैमरा ऑन होते ही दूर चले गए हैं. हम पिछले 5 घंटे से यहां फंसे हैं. अब हम सब यहीं बैठेंगे. देखते हैं कि आपके अधिकारी और मंत्री के आने पर ये रास्ते कैसे खुलते हैं. हम किसी को जाने नहीं देंगे.'
आर्मी अफसरों ने महिला ने आगे जोड़े हाथ
एक दूसरे वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि आर्टिलरी यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO), DM और SP के कहने के बावजूद, उसने वहां से हटने से इनकार कर दिया और मामले को संसद में उठाने की धमकी भी दी. वायरल वीडियो में अधिकारी हाथ जोड़कर सभी लोगों से रास्ता खाली करने की गुजारिश कर रहे हैं. वे उन्हें समझा रहे हैं कि ये सब उनकी सुरक्षा के लिए ही किया है. लेकिन महिला सुनने का नाम ले रही हैं. वे लगातार वहां विरोध कर रही हैं और अफसरों पर चिल्ला रही हैं. हालांकि आर्मी अफसर सिर्फ समझाइश से मामला सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. ये वीडियो कब का है, इसका खुलासा तो अभी नहीं हो पाया है, लेकिन इसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है.
सीएम उमर अब्दुल्ला तक पहुंचा वायरल वीडियो
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस वायरल वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा, "'हम Gen Z हैं' कहना अब 'जानते नहीं हो मेरा बाप कौन हैं' कहने जैसा ट्रेंड बन गया है. Gen Z के प्रति बनी अच्छी छवि को खराब करने का सबसे तेज तरीका है कि जरा सी भी ठेस पहुंचने पर इसे धमकी की तरह इस्तेमाल किया जाए."
यहां देखिए वीडियो:-
This “we are Gen Z” has become the new “jaantay nahin ho mera baap kaun hai”. The quickest way to erode any Gen Z goodwill is to start using it as a threat at the slightest perceived affront. https://t.co/ya5OJTgxIn
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) August 19, 2026
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
एक यूजर ने लिखा, 'प्रधानमंत्री जी, यह अराजकता उन लोगों से माफी मांगने का नतीजा है जो इसके लायक नहीं थे.'
दूसरे यूजर ने लिखा, 'शुरुआती बातचीत के बाद सेना को बर्दाश्त करने के बाद सख्त कदम उठाते हुए महिला को सबक सिखा देना चाहिए था.'
तीसरे यूजर ने लिखा, 'इस तरह के व्यवहार से उसने असल में Gen Z की बदनामी की है. पहली बात तो यह कि वह वैसी दिखती भी नहीं है, और क्या यह कोई फैशन स्टेटमेंट बन गया है? उस पर शर्म आनी चाहिए. उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.'
चौथी यूजर ने लिखा, 'स्मार्टफोन बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाला हथियार बन गया है. आम समझ-बूझ तो जैसे गायब ही हो गई है. अपनी 15 मिनट की शोहरत पाने की बेताबी में, लोग अपनी अज्ञानता को सम्मान के बैज की तरह दिखा रहे हैं.'
आर्मी के रास्ता बंद करने की कई वजह संभव
बताते चलें कि भारतीय सेना, स्थानीय पुलिस और सिविल प्रशासन के साथ मिलकर, LoC के पास इस बेहद संवेदनशील और ऊंचे पहाड़ी सीमावर्ती इलाके में आतंकवाद-विरोधी और सुरक्षा अभियानों के तहत ऐसे उपाय नियमित और जरूरी तौर पर लागू करती है. सड़क बंद करना, घेराबंदी करना और आवाजाही को नियंत्रित करना तब आम बात होती है जब:-
संभावित खतरों को खत्म करने के लिए इंटेलिजेंस या ऑपरेशन की जरूरतों के तहत तलाशी या घेराबंदी करनी हो.
मौसम, भूस्खलन या सेना के काफिले की आवाजाही के लिए सुरक्षा मंजूरी की जरूरत हो.
स्थानीय लोगों, टूरिस्ट और सैनिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी हो.
ये उपाय मनमाने या टूरिस्ट-विरोधी नहीं होते. ये इसलिए लागू किए जाते हैं ताकि आम नागरिक (जिनमें टूरिस्ट भी शामिल हैं) ऐसे इलाके में सुरक्षित यात्रा कर सकें, जहां पहले घुसपैठ और आतंकी खतरों का सामना करना पड़ा है. व्यक्तिगत सुविधा के लिए सुरक्षा नियमों से समझौता करना दर्जनों लोगों की जान खतरे में डाल सकता है. हालांकि, जरूरत के हिसाब से सेना की आवाजाही जारी रहती है.
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