- दीपक सिंह रावत ने इंजीनियर की नौकरी छोड़कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का सपना पूरा किया है
- दीपक 22वें प्रयास में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया से सिल्वर मेडल के साथ पास आउट किया
- स्पर्श छेत्री पांचवीं पीढ़ी के सदस्य हैं जिन्होंने परिवार की देश सेवा की विरासत को भारतीय सेना में जारी रखा है
दीपक सिंह रावत अपनी मेहनत और कभी न हार मानने वाली जिद के दम पर भारतीय सेना में अफसर बने हैं. बतौर इंजीनियर हाथों में लाखों की जॉब होने के बावजूद दीपक ने भारतीय सेना में अफसर बनने का सपना कभी नहीं छोड़ा और लगातार कोशिश करते रहे.
भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने दीपक सिंह रावत की सफलता की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो असफलताओं से हार मान जाते हैं. दीपक ने सेना में शामिल होने के लिए कड़ी मेहनत की. 21 बार मिली असफलताएं भी उनके हौसले को तोड़ नहीं सकीं. डिफेंस की तैयारी करवाने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसा संभव है कि कोई स्टूडेंट 22 बार एसएसबी की परीक्षा दे सकता है. उसे अलग-अलग प्रविष्टियों के माध्यम से SSB में कई अवसर प्राप्त हो सकते हैं.
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दीपक सिंह रावत की सफलता की कहानी
आकाशवाणी से बातचीत में दीपक सिंह रावत ने बताया कि वे 22वें प्रयास में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने में सफल रहे हैं. उन्हें 19 राजपूत रेजीमेंट में कमीशन प्राप्त हुआ है. वे ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) गया से सिल्वर मेडल के साथ पास आउट हुए हैं. इससे पहले दीपक ने एक कॉरपोरेट कंपनी में चार साल तक असिस्टेंट टेक्निकल इंजीनियर के पद पर काम किया था. वे एसएसबी में 21 बार फेल हुए. फिर भी हिम्मत नहीं हारी.
स्पर्श छेत्री की सफलता की कहानी
दीपक के साथ ही स्पर्श छेत्री ने भी अपनी सफलता की कहानी साझा की. स्पर्श ने बताया कि वे अपने परिवार की देश सेवा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. अपने माता-पिता और दादा-परदादा के बाद भारतीय सेना ज्वाइन करने वाले वे अपने परिवार के सदस्य हैं.
दादा के बाद पोता भी बना सैन्य अफसर
स्पर्श छेत्री भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट राजपूताना राइफल्स का हिस्सा बने हैं. आकाशवाणी से बातचीत में स्पर्श छेत्री ने कहा, "यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं अपने परिवार से भारतीय सेना में शामिल होने वाली पांचवीं पीढ़ी हूं."
ओटीए में पासिंग आउट परेड
बता दें कि 5 सितंबर 2026 को ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी गया और चेन्नई में पासिंग आउट परेड आयोजित की गई. दोनों अकादमियों से देश को कुल 595 सैन्य अफसर मिले हैं. OTA चेन्नई में SSC-122 और SSCW (महिला)-36 बैच की पासिंग आउट परेड के माध्यम से कुल 342 कैडेट्स भारतीय सेना का अभिन्न हिस्सा बने. वहीं, बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल एंट्री) के चौथे बैच की पासिंग आउट परेड के जरिए देश को 253 नए युवा सैन्य अधिकारी मिले हैं.
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