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Vat Savitri Puja in Train: चलती ट्रेन में महिला ने किया वट सावित्री पूजा, कोच में ही की बरगद की परिक्रमा

Vat Savitri Puja: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला चलती ट्रेन में वट सावित्री की पूजा करते हुए दिखाई देती है.

Vat Savitri Puja in Train: चलती ट्रेन में महिला ने किया वट सावित्री पूजा, कोच में ही की बरगद की परिक्रमा
Vat Savitri Puja in Train
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Vat Savitri Puja in Train: महिलाओं के जीवन में त्योहारों, परंपराओं और उपवास का गहरा महत्व होता है. परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, भारतीय महिलाएं अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखने का कोई भी अवसर कभी नहीं चूकतीं. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान और अचंभित रह गए हैं. इस वीडियो में एक शादीशुदा महिला चलती ट्रेन में वट सावित्री पूजा करती हुई नजर आ रही है. खास बात यह है कि बरगद का पेड़ न होने के बावजूद, उन्होंने एक ऐसा उपाय खोज निकाला, जिसकी वजह से लोग उनकी भक्ति और सूझबूझ की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं?

दरअसल, 16 मई को पूरे देश में वट सावित्री व्रत बड़े उत्साह के साथ मनाया गया. उत्तरी भारत में विवाहित महिलाओं के लिए इस व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन, महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और अपने पतियों की लंबी उम्र तथा सुखी वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं. पेड़ के चारों ओर एक धागा बांधा जाता है, उसकी परिक्रमा की जाती है और इस तरह यह अनुष्ठान पूरा होता है. महिलाएं आमतौर पर यह पूजा किसी मंदिर, पार्क या किसी अन्य खुली जगह पर करती हैं, लेकिन वायरल वीडियो में दिख रही महिला उस समय ट्रेन में यात्रा कर रही थी.

ट्रेन के डिब्बे में वट सावित्री पूजा

महिला की यात्रा के दौरान ही पूजा का समय हो गया था. सबसे बड़ी समस्या यह थी कि ट्रेन में बरगद का पेड़ कहां से मिलेगा. हालांकि, महिला ने अपनी आस्था नहीं छोड़ी. वह पहले से ही अपने साथ बरगद की एक छोटी टहनी ले आई थी. ट्रेन के डिब्बे में उसने उस टहनी को एक खाली प्लास्टिक की बोतल में रख दिया, जिससे वह एक छोटे पौधे जैसी दिखने लगी. वह टहनी ही उसकी पूजा का केंद्र बन गई.

वीडियो में, महिला को ट्रेन के थर्ड AC कोच की एक सीट को अपने पूजा स्थल में बदलते हुए देखा जा सकता है. लाल साड़ी पहने और सोलह श्रृंगार किए हुए, वह पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करती हुई दिखाई देती है. उसने टहनी के पास फल, फूल, चने और पूजा की अन्य सामग्री रखी. इसके बाद उसने पूजा-अर्चना की और बोतल में रखी टहनी पर धागा बांधा.

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