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Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत पर क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा, जान लीजिए महत्व

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत पर बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा की जाती है. महिलाएं पेड़ के चारों ओर धागा बांधकर पूजा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की ही क्यों पूजा की जाती है और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व माना गया है.

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत पर क्यों की जाती है बरगद के पेड़ की पूजा, जान लीजिए महत्व
वट सावित्री व्रत 2026
AI

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत का हिंदू धर्म में खास महत्व माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज वट सावित्री व्रत पर महिलाएं बरगद यानी वट वृक्ष के पास पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रही हैं. आपको बता दें कि इस दिन बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा की जाती है. महिलाएं पेड़ के चारों ओर धागा बांधकर पूजा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस व्रत में बरगद के पेड़ को ही इतना पवित्र क्यों माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष को अमरता, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना गया है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि आखिर वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की ही क्यों पूजा की जाती है और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व माना गया है.

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जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

16 मई 2026 के दिन वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है. व्रत पर पूजा के उत्तम मुहूर्त की बात करें तो सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 24 मिनट तक बताया गया है. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा.

क्या है पूजा विधि?

  • वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करती हैं.
  • इसके बाद बरगद यानी वट वृक्ष के नीचे जाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है.
  • पूजा के दौरान महिलाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटती हैं और जल, फूल, रोली व चावल अर्पित करती हैं.
  • इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है और पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है.
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क्यों खास माना जाता है बरगद का पेड़

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद के पेड़ को बेहद पवित्र और दिव्य माना गया है. कहा जाता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है. यही वजह है कि वट सावित्री व्रत में इसकी पूजा का खास महत्व बताया गया है. बरगद का पेड़ लंबे समय तक हरा-भरा और मजबूत रहता है, इसलिए इसे अखंड सौभाग्य, लंबी उम्र और स्थिर रिश्तों का प्रतीक भी माना जाता है. मान्यता है कि सावित्री ने भी बरगद के पेड़ के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए तप और प्रार्थना की थी. तभी से सुहागिन महिलाएं इस पेड़ की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं.

सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है व्रत

वट सावित्री व्रत की कहानी सावित्री और सत्यवान से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि जब सत्यवान की मृत्यु बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी, तब सावित्री ने अपने प्रेम, बुद्धिमानी और अटूट विश्वास से यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले लिए थे. तभी से इस व्रत को पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है. यही कारण है कि महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं.

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वट वृक्ष की पूजा का धार्मिक महत्व

वट सावित्री व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जिस तरह बरगद का पेड़ वर्षों तक मजबूती से खड़ा रहता है, उसी तरह ये व्रत रिश्तों में प्रेम, धैर्य और स्थिरता बनाए रखने का संदेश देता है. महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से वट वृक्ष की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. हिंदू धर्म में इसे अखंड सौभाग्य, लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन का प्रतीक भी माना गया है.

वैज्ञानिक नजरिए से भी अहम है वट वृक्ष

बरगद का पेड़ पर्यावरण के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है. ये पेड़ दिनभर भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन देता है और इसकी छांव काफी ठंडी होती है. गांवों में पहले लोग बरगद के नीचे बैठकर पंचायत और सामाजिक चर्चा किया करते थे. इसकी जड़ें मिट्टी को मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं और ये कई पक्षियों और जीवों का घर भी होता है. यही वजह है कि भारतीय परंपराओं में प्रकृति को धर्म से जोड़कर देखा गया है.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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