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वट वृक्षों को भी है सावित्री का इंतजार!

Professor Atish Parashar
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    मई 16, 2026 14:01 pm IST
    • Published On मई 16, 2026 13:28 pm IST
    • Last Updated On मई 16, 2026 14:01 pm IST
वट वृक्षों को भी है सावित्री का इंतजार!

आज जब घर से निकला तो सड़क का नजारा बिल्कुल अलग था. हाथों में पूजा की थाल लिए हजारों सावित्रियां अपने प्रियतम की लंबी आयु के लिए वट सावित्री पूजा के लिए वट वृक्ष को घेरकर अपनी आस्था का धागा लपेट रही थीं. इस दृश्य को देखकर मेरे मन का वो विश्वास, जिसमें मैं ये मानता हूं कि इस देश में ईश्वर में आस्था सिर्फ महिलाओं के कारण बची हई है... वरना पुरुष तो पता नहीं क्या कर देते. फिर से जाग उठा. खैर वट सावित्री पूजा पूर्णतः महिलाओं की आस्था से जुड़ा है. हमने भी कुछ लोगों की इजाजत लेकर उनकी आस्था को कैमरे में कैद किया ये सोच कर कि कभी मौका मिला तो कुछ लिखूंगा. 

अब जब ये तस्वीर देख रहा हूं तो इसे देखने के कई नजरिये मन में आ रहे हैं. कभी ध्यान पूजा करतीं और सज धज के आपस में एक दूसरे को नाक से लेकर मांग तक सिंदूर लगाती, एक दूसरे को लंबे सुहाग का आशीर्वाद देती बहनें... तो दूसरी तरफ इस पूजा के कारण खाने की वस्तुओं को वट वृक्ष के समीप बिखेरकर उस वृक्ष पर निवास करने वाले असंख्य जीव जन्तुओं के संपोषण, संवर्धन जैसी चिंता जो सनातन में ही संभव है, ध्यान इस बात पर भी जा रहा था. सनातन में वसुवधैव को कुटुंब माना गया है और आज इन सनातनी आस्थावानों ने इस वृक्ष पर निवास करने वाले पूरे इकोसिस्टम को खूब खिलाया पिलाया है.

वट वृक्ष पर बांधा आस्था का टाइट धागा

इन सब से अलग एक और नजरिया ध्यान में आया, जब तस्वीर को नजदीक से देखा, जिसमें महिलाएं वट में धागा बांध रही थीं. जिसकी जितनी लंबी आस्था उसका उतना बड़ा धागा, और वो भी बहुत टाइट ताकि कि खुले नहीं. वट का वो भाग जिसमें आस्था का धागा बंधा था... देखने मे बड़ा सुंदर दिख रहा था. एक तो ये पहलू है. इसका दूसरा पक्ष ये था कि वट का धागा बंधा भाग अब कई दिनों तक बंधा रहेगा. अगर कोई खोलने जाएगा तो आसपास के लोग उसे ऐसा करने से रोकेंगे और उसपर नास्तिक होने का आरोप लगाएंगे और उसका ये कृत्य हजारों आस्थावानों के आस्था के साथ खिलवाड़ माना जाएगा.

वट वृक्ष को सावित्री का इंतजार

इस आस्था और अनास्था के द्वंद में बेचारा वट मर जाएगा, क्योंकि इन धागों के कारण इसमें फंगस होंगे और पूरे पेड़ को दीमक चाट जाएंगे. तो होगा ना वट को भी किसी सावित्री का इंतजार! जनसंख्या बढ़ी है पर किसकी? जीव जंतुओं की, आस्थावानों की, धागे की, पर वट की संख्या तो कम हुई है. आज वट के लाखों पत्ते आस्थावानों के बालों की शोभा बढ़ाएंगे तो करेगा न वट फिर से इंतजार किसी सावित्री का जो उसको पाल सके, पोषण दे सके, ताकि अगले पूजा तक फिर से वो हरा भरा होकर आस्था की अलख को जलाए रखने में इन सबके साथ खड़ा रहे...

कोई सावित्री वट वृक्ष को भी पाल ले

मैं इस पोस्ट के माध्यम से उन तमाम संगठनों का आह्वान करता हूं. जरा इस पहलू पर भी सोचें कि इस कड़ी गर्मी में पेड़ों की चिंता करने की आवश्यकता है. ये वो अवसर है जब हर सावित्री एक वट को गोद ले, ये वो लम्हा है जब हम हर वट को एक सावित्री देने का संकल्प लें. मातृ शक्ति को प्रणाम, वट सावित्री पूजा पर सभी को विशेष बधाई.

(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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