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शरीर में डेड बॉडी का फैट इंजेक्ट करवा रही हैं अमेरिकी महिलाएं, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

अमेरिका में कॉस्मेटिक सर्जरी की दुनिया में एक नया और विवादित ट्रेंड सामने आया है. इस ट्रेंड में मृत लोगों के शरीर से निकाली गई चर्बी (फैट) को प्रोसेस करके महिलाओं के शरीर में इंजेक्ट किया जा रहा है.

शरीर में डेड बॉडी का फैट इंजेक्ट करवा रही हैं अमेरिकी महिलाएं, वजह जानकर रह जाएंगे दंग
डेड बॉडी का फैट इंजेक्ट करवा रही हैं अमेरिकी महिलाएं

Viral News: अमेरिका में सुंदर दिखने की चाह अब एक बेहद चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है. सोशल मीडिया और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इन दिनों एक ऐसा ट्रेंड चर्चा में है, जिसे जानकर लोग हैरान भी हैं और परेशान भी. बता दें कि यहां महिलाएं कर्वी यानी ऑवरग्लास फिगर पाने के लिए अपने शरीर में मृत लोगों के शरीर से निकाली गई चर्बी (फैट) को प्रोसेस करके इंजेक्ट करवा रही हैं. यह प्रक्रिया AlloClae नाम से जानी जाती है और इसे Tiger Aesthetics नाम की कंपनी प्रमोट कर रही है. 

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हाल ही में न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में 34 साल की एक फाइनेंस प्रोफेशनल महिला ने इस प्रक्रिया को लेकर खुलासा किया. महिला ने बताया कि उन्होंने अपने हिप्स और बट को शेप देने, हिप डिप्स भरने और पहले हुई लिपोसक्शन की गलती सुधारने के लिए करीब 40 लाख रुपये खर्च किए हैं. महिला का कहना है कि यह फैट 'एथिकली सोर्स्ड' है, क्योंकि यह उन लोगों के शरीर से लिया जाता है जिन्होंने अपने अंग और टिशू मेडिकल रिसर्च के लिए दान किए थे.

इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली चर्बी को सीधे इंजेक्ट नहीं किया जाता. पहले इसे खास तकनीक से साफ, स्टेरिलाइज और प्रोसेस किया जाता है. इसमें से डीएनए और जीवित कोशिकाएं हटा दी जाती हैं, ताकि शरीर में कोई इम्यून रिएक्शन न हो.  इसके बाद इस फैट को हिप डिप्स भरने, बट को उभारने और ब्रेस्ट में वॉल्यूम बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

डॉक्टरों के मुताबिक, यह तरीका उन लोगों में ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है जिनके शरीर में खुद की चर्बी कम है या जो पहले लिपोसक्शन करा चुके हैं. Ozempic और Mounjaro जैसी वजन घटाने वाली दवाओं के बाद अचानक दुबले हो चुके लोग भी इस ट्रेंड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें बड़ी सर्जरी या जनरल एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती. ज्यादातर मामलों में यह एक घंटे से भी कम समय में क्लिनिक में पूरी हो जाती है. इसी वजह से लोग इसे सुविधाजनक मान रहे हैं, क्योंकि न ज्यादा दर्द होता है और न लंबा रिकवरी टाइम.

हालांकि, इसके जोखिम भी कम नहीं हैं. गलत इंजेक्शन से इंफेक्शन, गांठ बनना और खून की नसों में फैट जाने का खतरा हो सकता है. इसके अलावा, इस ट्रेंड को लेकर नैतिक सवाल भी उठ रहे हैं. कई लोगों का मानना है कि जिन दाताओं ने अपने शरीर विज्ञान के लिए दान किए थे, उन्होंने शायद यह नहीं सोचा होगा कि उनका इस्तेमाल कॉस्मेटिक सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाएगा.

खूबसूरती की इस अजीब दौड़ ने अब लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर सुंदर दिखने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है.

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