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जर्मनी छोड़ भारत आ गई 26 साल की युवती, बोली- बनारस, गंगा ने जिंदगी बदल दी

जर्मनी की 26 वर्षीय युवती भारत घूमने आई थीं, लेकिन यहां की संस्कृति, अध्यात्म और लोगों के प्यार ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उसने जर्मनी में अपना सबकुछ छोड़ दिया.

जर्मनी छोड़ भारत आ गई 26 साल की युवती, बोली- बनारस, गंगा ने जिंदगी बदल दी
जर्मनी छोड़ भारत आ गई 26 साल की युवती
Instagram/soulful.jasmine

Viral Video: जर्मनी (Germany) की एक लड़की जैस्मीन (Jasmine) कुछ समय के लिए भारत घूमने आई थी, लेकिन उसको भारत की संस्कृति, लोगों का प्यार और आध्यात्म एकदम से भा गया. वह सबसे पहले एक साल के लिए भारत आई थी. उसे लगा था कि इसके बाद वह वापस जर्मनी चली जाएगी और अपनी ज़िंदगी वही बिताएगी, लेकिन उसे भारत से ऐसा लगाव हुआ कि एक दिन उसने जर्मनी में अपने घर में सबकुछ छोड़ दिया और भारत की फ्लाइट पकड़कर आ गई. जर्मन युवती ने इस बार देव दिवाली के लिए वाराणसी में स्टे बुक किया है. वाराणसी की देव दिवाली देखना उसका सपना था और 22 साल की उम्र में ही उसने अपने विजन बोर्ड में बनारस की देव दिवाली की जगह तय कर दी थी.

देव दिपावली के लिए बुक किया स्टे

जर्मन युवती का नाम जैस्मीन (Jasmine) है, उसने इंस्टाग्राम पर 3 दिन पहले एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें बताया कि अभी-अभी बनारस में देव दीपावली के लिए अपना स्टे बुक किया. उसने वीडियो में कहा कि उसे अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि देव दीपावली के लिए यहां रहेगी. ये उसका सबसे बड़ा सपना है. बनारस की देव दीपावली देखना उसके विजन बोर्ड पर भी था. जर्मन लड़की ने बताया कि वह अपनी जिंदगी में एक बार बनारस में इसके लिए रहना चाहती थी. 

उसने एक अन्य पोस्ट में बताया कि वह यहां सिर्फ घूमने नहीं आई थी, उसकी चाहत कुछ और गहरी थी. यहां की संस्कृति, यहां के लोग, जीवन जीने का तरीका, धर्म... इन सबको बहुत करीब से महसूस करना चाहती थी. यहां की आध्यात्मिकता को करीब से समझने की चाहत थी.

पहले 1 साल के लिए भारत आई युवती

जैस्मीन ने पोस्ट में कहा कि मैं यहां इतना समय बिताना चाहती थी कि भारत को सिर्फ एक यात्री की तरह न देखूं, बल्कि यहां के लोगों के बीच रहकर उनके साथ जीवन जी सकूं, थोड़ा ठहरूं, चीज़ों को देखूं, महसूस करू और सच में समझ सकूं कि भारत में रहना कैसा होता है. इसलिए अपने इस सपने को जैस्मीन ने सच कर दिखाया. वह एक साल के लिए भारत आ गई. उसे पूरा यकीन था कि इसके बाद वह वापस जर्मनी चली जाएगी.

जर्मन युवती ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि अपने शहर में एक फ्लैट ढूंढना, 9 से 7 की नौकरी करना और साल भर की छुट्टियों के दौरान अपनी ज़िंदगी के बारे में सपने देखना... यही सब मैं कर रही थी, लेकिन भारत के मन में मेरे लिए कुछ और ही योजनाएं थीं. शुरुआत से ही मैंने कुछ ऐसा महसूस किया जो पहले कभी नहीं किया था. मुझे भारत से प्यार हो गया. 

'पहले कभी भी ऐसी खुशी नहीं महसूस हुई'

जर्मनी की लड़की ने आगे लिखा कि मुझे एहसास हुआ, आप जो भी ढूंढते हैं, वह आपको ज़रूर मिल जाता है. अगर आप सुंदरता ढूंढेंगे, तो आपको अपने आस-पास सुंदर चमत्कार होते दिखेंगे. गर आप दयालुता ढूंढेंगे, तो आपको ऐसे लोग मिलेंगे जिनसे आपका एक गहरा जुड़ाव महसूस होगा. बच्चों के साथ वॉलंटियर (स्वयंसेवक) के तौर पर काम करते हुए मुझे एक ऐसी खुशी मिली जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी. मैंने खुशी-खुशी अपना समय दिया, लेकिन बदले में मुझे उससे कहीं ज़्यादा मिला, जितना मुझे कभी किसी नौकरी से नहीं मिला था, क्योंकि खुशी के साथ कुछ देना, मन को बहुत तृप्ति देता है.

मुझे अपनी खुशी और सच्ची लगन की जगह मिल गई. इसने मुझे उस ज़िंदगी पर सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसे मैं अब तक अपनी 'सही' ज़िंदगी मानती थी. मुझे अब ऐसी ज़िंदगी नहीं चाहिए थी जो बाहर से तो सही लगे, बल्कि मैंने वह ढूंढना शुरू किया जो अंदर से सही लगे. भारत ने यह भी बदल दिया कि मैं ज़िंदगी का असली मकसद क्या मानती हूं. इसलिए मैं जर्मनी में अपना सबकुछ छोड़कर भारत चली आई.

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22 साल की उम्र में बनाया विजन बोर्ड

एक अन्य वीडियो में अपने विजन बोर्ड को दिखाते हुए जैस्मीन ने बताया कि मैं 26 साल की हू और यह तस्वीर तब की है, जब मैं 22 साल की थी. लगभग चार साल पहले मैंने अपना पहला 'विज़न बोर्ड' बनाने का फैसला किया था. उस समय मैंने बस यूं ही अपने सारे सपने इस बोर्ड पर लगा दिए थे. आज जब मैं इसे देखती हूं, तो मैं बहुत भावुक हो जाती हूं, क्योंकि मैं लगभग अपनी हर इच्छा पूरी कर पाई हूं. मैंने भारत, श्रीलंका और नेपाल की यात्रा की. मैंने हिमालय में ट्रेकिंग की. मैंने ताजमहल देखा, शिव 'आदियोगी' की प्रतिमा देखी और सद्गुरु की सभी किताबें पढ़ीं. मैंने भारत में स्वयंसेवा (volunteering) की.

मैंने बच्चों के साथ काम किया, खूब साड़ियां पहनीं, एक बहुत अच्छी भारतीय सहेली बनाई, कविताएं लिखना शुरू किया और प्रकृति के बीच काफी समय बिताया. मैंने थिएटर में काम किया, जो मेरे लिए सबसे अर्थपूर्ण अनुभवों में से एक रहा. मैं करीब 4 बार बनारस गई और गंगा मां ने सच में मेरे दिल और आत्मा को छू लिया. मैंने अपने खान-पान की आदतों और भोजन के साथ अपने रिश्ते को सुधारा. मुझे कई नए दोस्त मिले और गहरे रिश्ते बने. मुझे अपनी भक्ति और आध्यात्मिकता मिली, यहां तक कि मुझे अपना प्यार और जीवनसाथी भी मिला. मेरे बाल भी काफी लंबे और घुंघराले हो गए हैं. मैंने अपनी खुशी की जगह पाने की कामना की थी, जो मुझे सच में भारत में मिल गई.

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