Nepal Floods: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही मची है. पुलिस के मुताबिक अब तक 1,127 लोगों की जान जा चुकी है. चारों तरफ मचे इस हाहाकार के बीच नुवाकोट जिले के त्रिशूली में एक हरे रंग का मकान बच गया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. बाढ़ के तेज बहाव के बीच सीना ताने खड़े इस मकान की मालकिन लक्ष्मी पांडे ने अब उस खौफनाक दिन की आंखों देखी कहानी बयां की है.
'जब बाढ़ की जानकारी मिली तब दुकान पर थी'
उस दिन के भयानक मंजर को याद करते हुए मकान मालकिन लक्ष्मी पांडे ANI को बताती हैं, 'जिस वक्त हमें बाढ़ की जानकारी मिली, मैं और मेरे पति घर से 5 मिनट की दूरी पर अपनी दुकान पर थे. हम तुरंत घर की ओर भागे क्योंकि वहां मेरी सास और बेटी अकेली थीं. हमने नीचे से शोर मचाया, ताकि वे बाहर आ जाएं. लेकिन उन्होंने शायद सुना नहीं, इसलिए मैं बिना देरी किए छत पर गई. मैंने अपनी सास से कहा- मम्मी जी, फ्लड आने वाला है, हमें यहां से भागना चाहिए.'
'लहरों से कांप रहा था घर, लगा अब नहीं बचेंगे'
लक्ष्मी के मुताबिक, उनकी सास ने पहले यह कहकर मना कर दिया कि यहां कभी इतना बड़ा हादसा नहीं हुआ, इसलिए कुछ नहीं होगा. लेकिन तभी बाढ़ ने पुराना पुल तोड़ दिया. लक्ष्मी कहती हैं, 'पुल टूटता देख मैंने उनसे फिर कहा कि अब हमें भागना ही पड़ेगा. लेकिन हम जैसे ही छत से नीचे आए, पानी घर तक पहुंच चुका था. मजबूरन मेरे पति, ससुर और एक अन्य शख्स को वापस छत पर लौटना पड़ा. आसपास के मकानों को बाढ़ में बहता देख हम सब घबरा गए थे. पानी की लहरें इतनी तेज थीं कि हमारे मकान में भी कंपन हो रही थी. हमें लगा कि अब हम नहीं बचेंगे, लेकिन पड़ोस के चार-पांच लोगों ने अपनी जान पर खेलकर सभी 6 लोगों को बचा लिया, वो हमारे लिए भगवान से कम नहीं हैं. पूरे इलाके में सिर्फ हमारा घर ही सुरक्षित खड़ा रहा. हम खुदकिस्मत हैं कि हमें दूसरा जन्म मिल गया.'
यहां देखें उनका पूरा इंटरव्यू:-
मौके पर जाकर सामने आई घर बचने की असली वजह
जब यह हरा मकान बाढ़ के भयानक सैलाब के बीच सही-सलामत खड़ा दिखा, तो हर कोई हैरान रह गया. मौके पर जाकर पता चला कि इसके बचने की वजह सिर्फ मजबूत निर्माण नहीं, बल्कि मकान की दिशा है. यह घर नदी के बहाव के बिल्कुल सामने न होकर तिरछे कोण पर बना है. इसी वजह से तेज पानी सीधे दीवारों से टकराने के बजाय किनारे से होते हुए दूसरी तरफ निकल गया. हालांकि, घर के अंदर और बाहर बाढ़ का असर साफ दिखता है. इसकी लंबी मरम्मत बाकी है और फिलहाल यह परिवार दूसरी जगह शिफ्ट हो गया है.
सबसे ज्यादा चितवन में मिले शव, पहचाना चुनौती
पहाड़ों से उतरे तेज सैलाब ने नेपाल में भारी नुकसान पहुंचाया है. पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार तक मौतों का आंकड़ा 1,127 पहुंच गया है. सबसे ज्यादा 348 शव चितवन से मिले हैं. इसके अलावा नवलपरासी ईस्ट से 217, नवलपरासी वेस्ट से 190, नुवाकोट से 155, गोरखा से 66, धाडिंग से 59, रसुवा से 45 और तनहुं से 38 शव बरामद हुए हैं. 9 शव भारत में भी मिले हैं. अब तक सिर्फ 95 शवों की ही पहचान कर उन्हें परिजनों को सौंपा जा सका है. प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बताया कि जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनका प्रबंधन कानून और वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है. डीएनए सैंपल और दूसरे सुबूत सुरक्षित रखे जा रहे हैं ताकि बाद में पहचान हो सके.
भोटे कोशी नदी पर टनल रेस्क्यू, भारत-चीन से भी उतरीं टीमें
तबाही के इस दौर में राहत-बचाव का काम युद्ध स्तर पर जारी है. नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने बताया कि भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ के बाद पनबिजली परियोजनाओं के पास बेहद जोखिम भरे रेस्क्यू के लिए भारत और चीन की 'स्पेशलाइज्ड टनल रेस्क्यू टीमों' को बुलाया गया है. ये टीमें नेपाल आर्मी के साथ मिलकर इन अंडरग्राउंड (सबटेरेनियन) साइट्स पर काम कर रही हैं.
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