नेपाल के पूर्व मंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद ने कहा है कि नेपाल को हाल में आई भयावह बाढ़ के लिए भारत और चीन से जलवायु मुआवजा मांगना चाहिए. उनका कहना है कि उनका देश दूसरे देशों की ओर से पैदा किए गए जलवायु संकट की कीमत चुका रहा है. इसके साथ ही नेपाल की बालेंद्र शाह की सरकार पक बाढ़ के बाद पैदा हुए हालात का संभाल पाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है. उनका कहना था कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में ठीक से राहत और बचाव के काम नहीं हो पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस संकट से ही बालेंद्र शाह की सरकार की क्षमता और विवेक का पता चल गया.
जलवायु संकट और नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़
नेपाल के पूर्व वन मंत्री मातृका यादव ने गुरुवार शाम नई दिल्ली में एनडीटीवी से एक विशेष बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि पूर्व वन मंत्री होने के नाते मैं कह सकता हूं कि नेपाल ने वन लगाए हैं और जंगलों का रकबा बढ़ाया है, इसलिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में हमारा योगदान नहीं है. इसलिए जलवायु संकट की वजह से आई इस भारी तबाही के लिए नेपाल की सरकार को भारत और चीन से जलवायु मुआवजा मांगना चाहिए. उनका कहना था कि इस भयावह बाढ़ में नेपाल का कोई योगदान नहीं है, इसके बाद भी वह इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहा है.
उल्लेखनीय है कि नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के हवाले से इस त्रासदी के बाद खबर आई थी कि नेपाल उस संकट की कीमत चुका रहे हैं, जिसे उसने पैदा ही नहीं किया. नेपाल ग्रीन हाउस गैसों का बहुत कम उत्सर्जन करता है.लेकिन जलवायु संकट का नुकसान उसे बहुत ज्यादा उठाना पड़ रहा है. इसलिए अमेरिका और चीन जैसे देशों को नेपाल को जलवायु मुआवजा देना चाहिए. हालांकि बाद में विदेश मंत्री ने सफाई दी कि उनका देश किसी से मुआवजा नहीं मांग रहा है. उनका कहना था कि उनके कहने का आशय केवल दुनिया का ध्यान इस समस्या की ओर से दिलाना था.

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद मातृका यादव ने कहा कि बालेंद्र सरकार के कामकाज से जनता खुश नहीं है.
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कैसा है बालेंद्र शाह सरकार का कामकाज
नेपाल की बालेंद्र शाह सरकार के सत्ता में आए पांच महीने से अधिक का समय हो चुका है. उनकी सरकार के अब तक के कामकाज के सवाल पर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के इस सांसद ने कहा कि इस सरकार से जनता खुश नहीं है. उन्होंने बाढ़ के बाद पैदा हुए हालात का जिक्र करते हुए कहा कि जमीन पर राहत और बचाव कार्य ठीक से नहीं हो रहा है, इस वजह से जनता इस सरकार से दुखी है. उन्होंने कहा कि इस सरकार की क्षमता और विवेक का पता इस बाढ़ के समय ही चल गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव डालकर काम करवा रही है.उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों और पत्रकारों तक पर दबाव डाल रही है. उनका आरोप था कि बालेंद्र शाह सरकार के कामकाज से नेपाली सेना भी खुश नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रतिशोध की भावना के साथ काम कर रही है. बालेंद्र सरकार के आंतरिक मतभेदों का हवाला देते हुए इस कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि यह सरकार अपने अंतर्विरोधों की वजह से अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी.
नेपाल में पिछले साल आठ सितंबर को भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ युवाओं का आंदोलन हिंसक हो गया था. उग्र प्रदर्शनकारियों ने नेपाली संसद समेत कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों में आग लगा दी थी. कुछ मीडिया संस्थानों में भी तोड़-फोड़ की गई थी. नेपाली युवाओं के इस आंदोलन को जेन जी का आंदोलन नाम दिया गया. इस आंदोलन के एक साल बाद हुई इस बातचीत में नेपाली सांसद ने कहा कि इस आंदोलन के पीछे अमेरिका का हाथ था. उन्होंने कहा कि अमेरिका युवाओं को ट्रेनिंग देने के नाम पर भड़का रहा था. उन्होंने कहा कि इसके लिए अमेरिकी दूतावास में एक विशेष सेल बनाया गया था. उन्होंने कहा कि नेपाल के राजनीतिक दल अमेरिका की इस चाल को समय रहते समझ नहीं पाए. उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया में डेमोक्रेसी संकट में है. उन्होंने कहा कि सरकारें भ्रष्टों, अपराधियों और माफियाओं पर शासन करने की जगह आम लोगों पर शासन कर रही हैं.
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