Nepal Floods: नेपाल के नुवाकोट और धाडिंग जिलों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आए उफान से अब तक 160 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इनमें भारत के भी 133 लोग शामिल हैं. बाढ़ का मलबा अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर लाया है, जिससे कई इलाके पूरी तरह कीचड़ में दब गए हैं। सूखी नदियों में अचानक आए उफान से जान बचाकर भागते लोगों के खौफनाक वीडियो सामने आ रहे हैं। इस त्रासदी में घर-सड़कें ही नहीं, बल्कि नेपाल के छह प्रमुख पनबिजली संयंत्र (हाइड्रोपावर स्टेशन) भी बर्बाद हुए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर बिजली गुल हो गई है।
'पीने के लिए एक घूंट पानी तक नहीं बचा'
विधुर गांव की रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) के लिए सुबह 9:30 बजे का वक्त किसी बुरे सपने जैसा था. वह आंगन में बर्तन धो रही थीं, तभी बिना किसी चेतावनी के बाढ़ का पानी आ घुसा. दीपिका खुद को खुशनसीब मानती हैं कि वह घर के बाहर थीं. उन्होंने NDTV को बताया, 'मैंने तुरंत अपने परिवार को आवाज दी और हम सबने भागकर छत पर पनाह ली.'
तिब्बत से उफनती हुई आई त्रिशूली नदी ने उनके घर के ग्राउंड फ्लोर को पूरी तरह कीचड़ और मलबे से भर दिया. दीपिका ने अपने आंगन की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'पीने के लिए एक घूंट पानी तक नहीं है. जहां पीने के पानी का घड़ा रखा था, वहां अब सिर्फ कीचड़ ही कीचड़ है.' परिवार की जान तो बच गई, लेकिन उनके पास अब सिर्फ वही कपड़े बचे हैं जो उन्होंने पहन रखे हैं. बाकी सब कुछ कई फीट कीचड़ के नीचे दफन हो चुका है.
कीचड़ के समंदर में तब्दील हुआ इलाका
दीपिका की छत से अब गांव का नजारा किसी 'सलेटी कीचड़ के समंदर' जैसा दिखता है. इस खौफनाक मंजर के बीच कहीं-कहीं किसी मंदिर की चोटी, कोई दो मंजिला मकान या मलबे के साथ बहकर आई विशाल चट्टानें ही नजर आती हैं, जो यहां-वहां पड़ी हैं. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि अकेले विधुर गांव में किसी की जान गई है या नहीं, लेकिन पूरी की पूरी बस्ती मलबे में तब्दील हो चुकी है.
कैसे आई ये खौफनाक बाढ़?
समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के हवाले से नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने बताया कि यह तबाही मुख्य रूप से पहाड़ खिसकने की वजह से हुई. सैटेलाइट तस्वीरों की शुरुआती जांच से पता चला है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास, तिब्बत-रसुवागढ़ी बॉर्डर से 20 किमी उत्तर-पूर्व में एक अस्थिर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया था. इसी रॉक स्लाइड और नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित ल्हेंदे नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी भोटे कोशी के जरिए तिमुरे में त्रिशूली नदी में जा घुसा और इस महाविनाश का कारण बना.
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