गुरुग्राम में मानसून के दौरान एक बार फिर जलभराव, ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे की खामियों को लेकर बहस छिड़ गई है. इस बीच हरियाणा के भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह का एक बयान चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि शहर की मौजूदा समस्याओं का समाधान 2047 के मास्टर प्लान के तहत होगा. NDTV से बात करते हुए सांसद ने दावा किया कि 60 साल पहले जब गुरुग्राम की योजना बनाई गई थी, तब इतनी आबादी, वाहन और निर्माण गतिविधियों का अनुमान नहीं था. उन्होंने जलभराव के लिए भारी बारिश, पुराने ड्रेनेज सिस्टम पर हुए निर्माण और बढ़ते शहरी दबाव को जिम्मेदार बताया, जबकि सरकार और प्रशासन के प्रयासों का बचाव भी किया.
पहले सुनिए सांसद का बयान
Gurugram sinks, BJP MP says wait till 2047 for solutions
— NDTV (@ndtv) August 25, 2026
Viksit Gurugram in 21 years: BJP Haryana MP @ch_dharambir@Ankit_Tyagi01 | #NationwideAt6 pic.twitter.com/pfcJkqqOcw
'हमें नहीं पता था कि गुरुग्राम इतना बड़ा शहर बन जाएगा'
NDTV से बात करते हुए सांसद ने कहा कि वर्तमान समस्याओं के लिए सरकार नहीं, बल्कि कई अन्य कारण जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी मेहनत करता है ताकि जाम और जलभराव न हो, लेकिन हर समस्या को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है.
सांसद के अनुसार, पुराने समय की ड्रेनेज व्यवस्था पर निर्माण हो जाने से अब समस्या और बढ़ गई है. "पुरानी नालियों और जल निकासी के रास्तों पर निर्माण हो गया है. अब हम उन्हें चौड़ा भी नहीं कर पा रहे हैं." उन्होंने बदलते मौसम और अत्यधिक बारिश को भी जलभराव का एक बड़ा कारण बताया. "आजकल अचानक और बहुत तेज बारिश होती है. पानी जमा हो जाता है और उसे निकलने में समय लगता है."

'2047 तक करना होगा इंतजार! जलभराव के लिए कांग्रेस जिम्मेदार'
गुरुग्राम में इस मानसून के दौरान एक बार फिर सड़कों पर जलभराव, घंटों तक जाम और फंसी हुई स्कूल बसों जैसी तस्वीरें सामने आईं, लेकिन सांसद ने सरकार या प्रशासन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा, "हम अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी निकालने और स्थिति संभालने की कोशिश करते हैं."
वहीं गुरुग्राम से भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने जलभराव की समस्या के लिए कांग्रेस शासनकाल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया.

राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि अब इस समस्या का स्थायी समाधान भूमिगत सुरंगों (अंडरग्राउंड टनल) के निर्माण में है. उन्होंने कहा, "अब इसका एकमात्र समाधान यह है कि मेट्रो की तरह भूमिगत सुरंगें बनाई जाएं, जो पुराने जल निकासी मार्गों के समानांतर हों और पानी को उसके प्राकृतिक रास्ते से बहने दें. फिलहाल जो काम हो रहा है, वह केवल अस्थायी राहत देने वाला 'बैंड-एड' समाधान है. पानी को एक जगह रोकेंगे तो वह दूसरी जगह निकल जाएगा. सरकार इस दिशा में काम कर रही है और इसके लिए जरूरी धन की व्यवस्था की जा रही है."
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