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उडोन थानी में पहली बार मिले डायनासोर के पैरों के निशान, वैज्ञानिकों ने बताया 12 करोड़ साल पुराना इतिहास

थाईलैंड की सरकार अब इस जगह को टूरिस्ट प्लेस और नेशनल रिसर्च सेंटर के तौर पर डेवलेप करने की तैयारी कर रही है.

उडोन थानी में पहली बार मिले डायनासोर के पैरों के निशान, वैज्ञानिकों ने बताया 12 करोड़ साल पुराना इतिहास
थाईलैंड में 12 करोड़ साल पुराने डायनासोर के पैरों के निशान मिले.
Department of Mineral Resource

Viral News: थाईलैंड के उडोन थानी शहर में एक मांसाहारी डायनासोर के पैरों के 6 निशान मिले हैं, जो करीब 12 करोड़ साल पुराने हैं. खनिज संसाधन विभाग ने 20 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि नॉर्थ ईस्टर्न प्रोविंस में डायनासोर के निशान मिलने की यह पहली घटना है. इसीलिए अब इस जगह को साइंटिफिक स्टडी के लिए संरक्ष्ज्ञित किया जाएगा और टूरिज्म के लिहाज से इसे डेवलेप कियाा जाएगा.

सबसे पहले किसने देखे थे निशान?

बैंककॉक पोस्ट के मुताबिक, यह खोज बान फु जिले के फु फ्रा बाट इलाके में हुई है. पिचाई प्राथेतसेना नाम के शख्स ने सबसे पहले इन निशानों को देखा था. इसके बाद नेचुरल रिसोर्सेज एंड एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारी निप्पोन चमनोंगसिरिसक ने एक्सपर्ट्स की एक टीम बनाई. इस टीम ने नेशनल पार्क और फाइन आर्ट्स विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मौके का मुआयना किया. जांच में साफ हो गया कि ये निशान शुरुआती क्रेटेशियस काल यानी 12 करोड़ साल पहले के ही हैं.

पहले खोजे गए डायनासोर से मिलता-जुलाता साइज

जांच टीम को सैंडस्टोन पर पैरों के जो निशान मिले हैं, उनमें से हर एक करीब 29 सेंटीमीटर लंबा और 26 सेंटीमीटर चौड़ा है. इन निशानों में तीन नुकीली उंगलियां साफ नजर आ रही हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये निशान थेरोपॉड प्रजाति के डायनासोर के हैं. ये वो डायनासोर थे, जो दो पैरों पर चलते थे और मांसाहारी होते थे. पैरों के आकार को देखकर अंदाजा लगाया गया है कि इस डायनासोर की कमर तक ऊंचाई 1.42 मीटर और कुल लंबाई 6.3 मीटर के आसपास रही होगी. यह साइज थाईलैंड में ही खोजे गए एक अन्य प्राचीन डायनासोर सियामोटिरानस इसानेंसिस से काफी मिलता-जुलता है.

रिसर्च-टूरिज्म का नया ठिकाना बनेगी ये जगह

रिपोर्ट के मूताबिक, इतनी खोज के बाद प्रशासन ने इस जगह के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि यहां आने वाले लोगों की भीड़ से निशानों को कोई नुकसान न पहुंचे. इसके अलावा बारिश के पानी से होने वाले कटाव को रोकने पर भी काम चल रहा है. सरकार की तैयारी है कि 2008 के फॉसिल प्रोटेक्शन एक्ट के तहत इस जगह को पूरी तरह सुरक्षित करते हुए, इसे जिओलॉजी रिलेटेड स्टडी, रिसर्च और टूरिज्म के एक बड़े नेशनल सेंटर के रूप में डेवलेप किया जाए.

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