क्या आप सिंगापुर की चकाचौंध, लाखों का पैकेज और कॉर्पोरेट की अंधी दौड़ छोड़कर पहाड़ों के किसी शांत गांव में बसने का फैसला कर सकते हैं? ये बात सुनकर फिल्मी जैसी लगती है, लेकिन गरिमा और आदित्य ने इसे अपनी जिंदगी का सच बना दिया है. मकसद सिर्फ एक था अपने बेटे 'वेदस' को वह बचपन देना, जो आज की भागदौड़ में कहीं खो चुका है. आदित्य और गरिमा अपनी कहानी इंस्टाग्राम के @lifeofmaai हैंडल पर शेयर करते हैं.
शिमला के रहने वाले आदित्य और फैशन मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाली गरिमा दोनों ही कॉर्पोरेट सीढ़ियां तेजी से चढ़ रहे थे. 2015 में शादी हुई और आदित्य के काम के सिलसिले में दोनों सिंगापुर शिफ्ट हो गए. करियर बेहतरीन चल रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर एक घुटन थी. लगातार काम का दबाव और मशीनी जिंदगी ने जब अपना असर दिखाना शुरू किया, तो गरिमा ने नौकरी छोड़ बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) की पढ़ाई शुरू की. यहीं से उनके सोचने का नजरिया पूरी तरह बदल गया.
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पत्नी के गर्भवती होते ही सिंगापुर को कहा - अलविदा
दोनों ने खुद से एक सवाल पूछा, क्या कामयाबी की यही पारंपरिक परिभाषा हमारे बच्चे के लिए सही है? यह फैसला कोई रातों-रात नहीं लिया गया. दोनों ने पूरे आठ साल रिसर्च और प्लानिंग की. आखिरकार, 33 साल की उम्र में जब गरिमा गर्भवती थीं, दोनों ने सिंगापुर को अलविदा कह दिया और उत्तराखंड के बासगांव में अपना नया ठिकाना बनाया.
बेटा स्कूल नहीं जाता, प्रकृति से सीखता है
आज उनके बेटे वेदस के पास न तो कोई स्कूल यूनिफॉर्म है, न किताबों का भारी बस्ता और न ही रिपोर्ट कार्ड या परीक्षा का कोई डर. उसका स्कूल चारदीवारी में नहीं, बल्कि कुदरत की गोद में चलता है. वह सूरज की पहली किरण के साथ जागता है, चिड़ियों की चहचहाहट सुनता है, पत्थरों और कीड़ों को देखकर सीखता है, खाद बनाने में हाथ बंटाता है और मिट्टी से पेंटिंग करता है.
गरिमा और आदित्य इसे कहते हैं ‘अनस्कूलिंग' (Unschooling). यानी बिना किसी तय सिलेबस के, बच्चे की अपनी जिज्ञासा और रफ्तार से सीखने की आजादी. कपल का साफ कहना है कि वे पढ़ाई या किताबों के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध बच्चों पर समय से पहले पढ़ाई और कंपटीशन का बोझ थोपने से है.
सोशल मीडिया पर आज इनकी कहानी लाखों लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है. क्या वाकई हमारे बच्चों का बचपन सिर्फ स्क्रीन, क्लासरूम और अंकों की रेस में सिमट जाना चाहिए, या फिर सीखने का सबसे बड़ा उस्ताद यह कुदरत खुद है? वेदस के लिए तो फिलहाल ये पहाड़ ही उसकी क्लासरूम हैं और खुला आसमान उसका सिलेबस.
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