Why Toilet Flush Has 2 Buttons: ज्यादातर लोग इस बात से आज भी अनजान हैं कि, टॉयलेट फ्लश में दो बटन क्यों होते हैं? अगर आप भी उन में से एक हैं, तो ये खबर आपके लिए है. दरअसल, टॉयलेट फ्लश में लगे दोनों बटन अलग-अलग उद्देश्यों के लिए बनाए गए हैं और इनका सही इस्तेमाल न करने से हर दिन काफी मात्रा में पानी बर्बाद हो सकता है. ज्यादातर लोग ये समझते हैं कि दोनों बटन एक ही काम करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. ये दो बटन 'ड्यूल फ्लश सिस्टम' का हिस्सा होते हैं, जिसे खासतौर पर जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है.
छोटा बटन - बड़ा बटन (toilet flush buttons)
जानकारी के लिए बता दें कि, छोटा बटन हाफ फ्लश (Half Flush) के लिए होता है, जिसका उपयोग केवल पेशाब के बाद किया जाना चाहिए. इसमें लगभग 3 लीटर पानी खर्च होता है. वहीं, बड़ा बटन फुल फ्लश के लिए होता है, जिसका उपयोग मल त्याग के बाद किया जाना चाहिए और इसमें औसतन 6 लीटर पानी की खपत होती है.
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क्या कहती है रिसर्च (full flush vs half flush)
एक रिसर्च के मुताबिक, आज भी 90% से ज्यादा लोग इन दोनों बटनों के बीच का अंतर नहीं जानते और हर बार फुल फ्लश ही इस्तेमाल करते हैं. इससे एक व्यक्ति द्वारा रोजाना 10-15 लीटर अतिरिक्त पानी की बर्बादी होती है. मान लीजिए कि एक चार सदस्यीय परिवार है और हर सदस्य दिन में 5 बार टॉयलेट जाता है. अगर हर बार फुल फ्लश किया जाए तो कुल मिलाकर 120 लीटर पानी सिर्फ टॉयलेट में खर्च होगा. अगर सही तरीके से हाफ और फुल फ्लश का इस्तेमाल किया जाए, तो यह खपत काफी हद तक कम की जा सकती है.
ड्यूल फ्लश सिस्टम (dual flush system)
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, 1980 के दशक में ड्यूल फ्लश (Dual Flush) सिस्टम की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसका मकसद था घरेलू स्तर पर पानी की खपत को कम करना. आज यह सिस्टम भारत समेत कई देशों में लोकप्रिय हो चुका है. समय आ गया है कि हम इस छोटी सी आदत को बदलकर जल संरक्षण में अपना योगदान दें. अगली बार जब आप टॉयलेट जाएं, तो सही बटन दबाएं और पानी बचाएं.
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