Warli Art: नीदरलैंड में बसे भारतीय प्रवासियों ने अपनी संस्कृति और कला के प्रति प्रेम का अद्भुत उदाहरण पेश किया है. बिहार के मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाले और 10 साल से नीदरलैंड में रह रहे जयंत सांडिल्य और रुचि सौम्या ने महाराष्ट्र की पारंपरिक वारली आर्ट (Warli Art) के माध्यम से संपूर्ण रामायण को उकेरा है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या राम मंदिर को लेकर दिए गए दृष्टिकोण और प्रेरणा से प्रभावित होकर उन्होंने संपूर्ण रामायण को वारली आर्ट में दर्शाने की अनूठी कलाकृति तैयार की. यह कलाकृति भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भगवान श्रीराम तथा भारतीय परंपराओं से प्रवासी समुदाय के गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है.
कलाकृति की मुख्य विशेषताएं
- यह कलाकृति अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को समर्पित है.
- इस पेंटिंग में राजा दशरथ के यज्ञ, राम के बाल्यावस्था से लेकर रामायण की संपूर्ण घटनाओं को वारली शैली में दर्शाया गया है.
- वारली आर्ट में ज्यामितीय आकारों का उपयोग करके सूक्ष्मता से कथा सुनाई गई है.
- यह विशेष कलाकृति वारली आर्ट और भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रयास है.
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वारली आर्ट क्या होती है?
वारली आर्ट महाराष्ट्र की एक प्राचीन और पारंपरिक आदिवासी लोक कला है, जो मुख्य रूप से ठाणे और पालघर जिलों की वारली जनजाति द्वारा बनाई जाती है. यह कला सरल ज्यामितीय आकृतियों वृत्त (सूर्य/चंद्रमा), त्रिकोण (पहाड़/पेड़) और वर्ग (पवित्र भूमि) का उपयोग करके ग्रामीण जीवन, खेती और नृत्य जैसे दृश्यों को दर्शाती है. इसमें बहुत ही साधारण रेखाओं और आकृतियों यानी वृत्त, त्रिभुज, वर्ग का प्रयोग होता है. इसे पारंपरिक रूप से मिट्टी की लाल दीवारों (गेरू) पर चावल के आटे के सफेद पेस्ट से ये चित्र बनाए जाते हैं.
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