विज्ञापन

5 दिन नौकरी, 2 दिन मटन का ठेला...दो IT प्रोफेशनल्स ने पहले ही महीने कमाए 6 लाख, 5 करोड़ का ऑफर ठुकराया

नोएडा के दो IT प्रोफेशनल्स ने सिर्फ 35 हजार रुपये से 'लाहम' नाम का मटन फूड कार्ट शुरू किया. हफ्ते में केवल दो दिन चलने वाला यह बिजनेस पहले ही महीने 6 लाख रुपये का टर्नओवर कर चुका है. नमकीन गोश्त की डिश के लिए ग्राहकों की लंबी कतारें लग रही हैं.

5 दिन नौकरी, 2 दिन मटन का ठेला...दो IT प्रोफेशनल्स ने पहले ही महीने कमाए 6 लाख, 5 करोड़ का ऑफर ठुकराया
Noida Startup Success Story: नोएडा के दो IT प्रोफेशनल्स ने सिर्फ 35 हजार रुपये से 'लाहम' नाम का मटन फूड कार्ट शुरू किया और पहले ही महीने 6 लाख रुपये कमा लिए.
laham.by.shabfoods

दिल्ली-एनसीआर में जहां लोग वीकेंड पर आराम करने या क्लब जाने का प्लान बनाते हैं, वहीं नोएडा के दो कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स ने शनिवार और रविवार को कमाई का एक ऐसा हैरतअंगेज जरिया बना लिया है जो बड़े-बड़े बिजनेसमैन को भी सोचने पर मजबूर कर दे. दरअसल, हफ्ते के 5 दिन लैपटॉप पर कोडिंग और प्रोडक्ट मैनेजमेंट करने वाले 26 साल के ऋषभ कुमार और शशिकांत सिंह वीकेंड पर नोएडा के सेक्टर 76 में 'लाहम' (Laham) नाम से मटन का फूड कार्ट लगाते हैं, जहां ऋषभ की बहन प्रियंका किचन की पूरी कमान संभालकर स्वादिष्ट मटन तैयार करती हैं. सिर्फ 35 हजार रुपये की मामूली रकम से शुरू हुए इस छोटे से ठेले ने अपने बिना मसालों वाले अनोखे 'नमकीन गोश्त' के दम पर पहले ही महीने में 6 लाख रुपये का तगड़ा बिजनेस कर डाला है और तो और, ये दोनों दोस्त अपनी इस छोटी सी शुरुआत के लिए 5 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन का निवेश ऑफर भी ठुकरा चुके हैं.

35 हजार का निवेश और पहले ही महीने 6 लाख रुपये की कमाई

ऋषभ और शशिकांत पहले बेंगलुरु में एक साथ काम करते थे और इसी साल नोएडा शिफ्ट हुए हैं. ऋषभ को फैशन और फूड दो चीजों की अच्छी समझ है, लेकिन फैशन बिजनेस में ज्यादा पैसा लगता है इसलिए उन्होंने कम बजट में फूड बिजनेस शुरू करने की ठानी. दोनों दोस्तों ने सावन के महीने में जब लोग नॉन-वेज कम खाते हैं, तब चैटजीपीटी (ChatGPT) और अपने प्रोडक्ट मैनेजमेंट के अनुभव की मदद से पूरी प्लानिंग की. सिर्फ 35 हजार रुपये खर्च करके एक कार्ट, लाइट्स और खाना बनाने का सामान खरीदा और बीते 5 सितंबर को अपना स्टॉल शुरू कर दिया. हफ्ते में सिर्फ दो दिन यानि शनिवार और रविवार को दुकान खोलकर इन्होंने पहले ही महीने में 6 लाख रुपये का कारोबार कर डाला है.

3 घंटे में खत्म हो जाता है सारा मटन 

लाहम के मटन का क्रेज ऐसा है कि शाम को स्टॉल खुलने के बाद महज 3 घंटे के अंदर सारा स्टॉक खत्म हो जाता है और ग्राहकों को टोकन लेकर 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है. एक शनिवार की रात तो जब तीन घंटे में ही सारा नमकीन गोश्त खत्म हो गया, तो भीड़ में खड़ा एक छोटा बच्चा मटन न मिलने की वजह से लगभग रोने ही लगा था. पहले दिन जब इन्होंने दुकान लगाई थी तो शुरुआती 10 मिनट तक कोई ग्राहक नहीं आया था और इनका पहला ग्राहक नशे में धुत एक शख्स था, जिसे स्वाद इतना पसंद आया कि उसने तुरंत दूसरी एक्स्ट्रा लार्ज प्लेट ऑर्डर कर दी. पहले दिन सिर्फ 2.5 किलो मटन और 25 प्लेट बेचने वाले ये दोनों दोस्त आज हर दिन 25 किलो मटन बेच रहे हैं.

पेशावर के 'लाहम चरसी' और मालाबार परांठे का अनोखा मेल

नोएडा में जहां लिट्टी-चोखा से लेकर सुशी तक सब कुछ मिलता है, वहां ऋषभ कुछ बिल्कुल अलग परोसना चाहते थे. अरबी भाषा में 'लाहम' का मतलब गोश्त होता है और उनकी यह डिश पाकिस्तान के पेशावर व खैबर पख्तूनख्वा के मशहूर स्ट्रीट फूड 'लाहम चरसी' से प्रेरित है, जिसे ऋषभ ने पहली बार हैदराबाद में चखा था. इसमें तेज मसालों या लाल ग्रेवी के बजाय बेहद कम मसालों में मटन को पकाया जाता है ताकि मटन का असली और घर जैसा स्वाद आए. इसे सड़क पर खड़े होकर खाने में आसानी हो, इसलिए इसे केरल के छोटे-छोटे मालाबार कॉइन परांठों के ऊपर रखकर परोसा जाता है. यहां हाफ प्लेट (2 परांठे) 159 रुपये, फुल प्लेट (4 परांठे) 279 रुपये और लार्ज प्लेट (6 परांठे) 399 रुपये में मिलती है.

मकान मालिक ने टोका, पुलिस परमिशन अटकी पर नहीं मानी हार

इस सफर में अड़चनें भी कम नहीं आईं. शुरुआत में दोनों दोस्त शशिकांत के किराए के फ्लैट में मटन पकाते थे, लेकिन कमर्शियल कुकिंग पर मकान मालिक की आपत्ति के बाद उन्हें क्लाउड किचन लेना पड़ा. इसी तरह एक वीकेंड पर जब वे 20 किलो मटन पकाकर तैयार थे, तो शाम 6 बजे मैसेज आया कि परमिशन न होने की वजह से वे स्टॉल नहीं लगा सकते. दोनों ने हार मानने के बजाय तुरंत इंस्टाग्राम स्टोरी और व्हाट्सऐप के जरिए टेकअवे ऑर्डर लेने शुरू किए और उस दिन भी उनका पूरा 20 किलो मटन बिक गया. अब उन्होंने अपना कार्ट एक प्राइवेट प्रॉपर्टी पर शिफ्ट कर लिया है ताकि परमिशन की दिक्कत न आए.

बहन संभालती हैं किचन, बिना सोए काम करते हैं दोनों दोस्त

प्रोडक्ट मैनेजर होने के नाते दोनों ने काम को बहुत साफ तरीके से बांट रखा है. ऋषभ खुद लीड कुक हैं और कुकिंग के साथ मार्केटिंग व कंटेंट देखते हैं, जबकि शशिकांत फाइनेंस, ऑपरेशंस और सामान खरीदने का काम संभालते हैं. इस काम में ऋषभ की बहन प्रियंका किचन और तैयारी की कमान संभालती हैं, जबकि बचपन के दोस्त अर्पित सिंह ऑपरेशंस और कॉलेज के दोस्त रचित बिलिंग में मदद करते हैं. दुर्गा पूजा पंडाल और दिल्ली के बड़े फूड फेस्टिवल 'हॉर्न ओके प्लीज' में जब वीकडेज पर स्टॉल लगाना पड़ा और दोनों दोस्त ऑफिस में थे, तब बहन प्रियंका ने ही अकेले कुकिंग की पूरी जिम्मेदारी संभाली. शनिवार और रविवार को काम खत्म करते-करते रात के 2 बज जाते हैं और सुबह 7 बजे फिर तैयारी के लिए उठना पड़ता है, जिसके चलते गोरखपुर के रहने वाले ऋषभ अपने घर और दोस्तों तक से मिलने नहीं जा पा रहे हैं. 
ये भी पढ़ें: मनाली शिफ्ट हुई ट्रैवल इन्फ्लुएंसर को लौटना पड़ा दिल्ली, बोली- वहां 2 चीजों का नुकसान हो रहा था

क्यों ठुकराया 5 करोड़ का ऑफर और क्या है अगले 3 साल का प्लान

लाहम की लोकप्रियता देखकर एक निवेशक ने उनकी कंपनी की वैल्यूएशन 5 करोड़ रुपये लगाते हुए 1 करोड़ रुपये के शेयर खरीदने का ऑफर दिया था. लेकिन ऋषभ और शशिकांत ने यह ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि वे किसी बाहरी निवेश के बिना खुद के दम पर  इस ब्रांड को खड़ा करना चाहते हैं. दोनों दोस्तों ने तय किया है कि अगले 3 साल तक वे इस बिजनेस से अपने लिए एक रुपया भी नहीं निकालेंगे और सारा मुनाफा वापस बिजनेस को बढ़ाने में लगाएंगे. उनका सपना पहले दिल्ली-एनसीआर और अपने होमटाउन गोरखपुर में कई कार्ट और कियोस्क खोलने का है, और अंत में वे मुंबई में एक शानदार फाइन-डाइनिंग रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं. ऋषभ का कहना है कि वह अपनी कॉर्पोरेट नौकरी तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक लाहम से उन्हें खुद के लिए हर महीने 4 लाख रुपये की कमाई न होने लगे.
ये भी पढ़ें: मनाली में बार-बार पूछने पर भी कमाई छिपा रहे थे, मैगी वाले भैया ने समझाया हर दिन 14 हजार कमाने का पूरा गणित

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Noida News, Greater Noida News, Laham Mutton, Laham Rishabh Kumar
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com