VIRAL VIDEO: रोहतांग दर्रे की कड़ाके की ठंड में गरमा-गरम मैगी का स्वाद चखना हर सैलानी की पहली पसंद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहाड़ों पर मिलने वाली इस मैगी के पीछे एक हैरान करने वाला बिजनेस मॉडल भी छिपा है? सोशल मीडिया पर इन दिनों हिमाचल प्रदेश के एक मैगी वाले का वीडियो वायरल हो रहा है, जो मंदी के मौसम में भी हर दिन करीब 14 हजार की सेल कर लेता है. कंटेंट क्रिएटर हर्ष चौहान ने हाल ही में रोहतांग दर्रे का दौरा किया और वहां एक स्थानीय दुकानदार से उसकी कमाई को लेकर बातचीत की. जब हर्ष ने मंदी के इस सीजन (ऑफ-सीजन) की कमाई पूछी, तो दुकानदार का जवाब बेहद चौंकाने वाला था.
मंदी में भी बंपर कमाई का गणित
इस बातचीत का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है. हर्ष ने बताया कि जब उन्होंने दुकानदार से पूछा कि इस सीजन में क्या बचता है, तो दुकानदार ने कहा, "मंदा चल रहा है भाई, ज्यादा काम नहीं है." लेकिन जब हर्ष ने आंकड़ों में बात की, तो असल तस्वीर सामने आई. दुकानदार हर रोज कम से कम 60 से 70 प्लेट मैगी और करीब 200 कप चाय आसानी से बेच लेता है. इसके अलावा कुछ लोग उबले अंडे और ऑमलेट भी ऑर्डर करते हैं. हर्ष ने इस पूरी बिक्री का एक आसान हिसाब-किताब भी साझा किया है. मैगी की बिक्री 60-70 प्लेट रोजाना (100 रुपए प्रति प्लेट के हिसाब से करीब ₹6,000-₹7,000). वहीं, चाय की बिक्री लगभग 200 कप रोजाना (₹40 प्रति कप के हिसाब से ₹8,000).
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हर दिन पांच अंकों में कमाई
इस हिसाब से मंदी के दिनों में भी इस छोटी सी दुकान का रोजाना का टर्नओवर ₹14,000 से ₹15,000 के बीच बैठता है. हर्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब मंदी में यह हाल है, तो सोचिए टूरिस्ट सीजन में जब रोहतांग सैलानियों से गुलजार रहता होगा, तब यह मैगी वाला कितना कमाता होगा.
'कोई धंधा छोटा नहीं होता'
हर्ष ने इस कहानी के जरिए समाज की उस सोच पर चोट की है जो रेहड़ी-पटरी या छोटे काम को कमतर आंकती है. उन्होंने कहा, "भाई, कोई भी धंधा छोटा नहीं होता." लोग अक्सर लोकलाज या कम कमाई के डर से छोटे काम शुरू करने में हिचकिचाते हैं. लेकिन सच यह है कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किसी बड़े शोरूम या महंगी सजावट की नहीं, बल्कि सही जगह और सही सर्विस की जरूरत होती है.
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जितना पैसा, उससे ज्यादा मेहनत भी
हालांकि, सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोग इस कमाई को देखकर दंग हैं, वहीं कई समझदार यूजर्स ने इसके पीछे के कड़े संघर्ष और चुनौतियों को भी सामने रखा है. लोगों का कहना है कि यह सिर्फ टर्नओवर है, मुनाफा नहीं. पहाड़ों पर दुकान चलाना बच्चों का खेल नहीं है. मनाली से रोहतांग तक कच्चा माल लाने में ही रोज का करीब ₹2,000 का ट्रांसपोर्ट खर्च हो जाता है. भारी गैस सिलेंडर और राशन पीठ पर लादकर चढ़ना पड़ता है. कड़ाके की ठंड में दूर-दूर से पीने का पानी लाना पड़ता है और तेज बर्फीली हवाओं के कारण गैस भी दोगुनी खर्च होती है. शून्य से नीचे के तापमान में सुबह-सुबह उठकर सैलानियों के लिए सेवाएं देना खून पसीना एक करने जैसा है. यही वजह है कि यह मैगी वाला सिर्फ मैगी नहीं, बल्कि अपनी हाड़ कंपाने वाली मेहनत की कीमत वसूलता है.
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