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भारत लौटना NRIs के लिए क्यों है मुश्किल? बेल्जियम में रह रहे भारतीय ने बताई ऐसी वजह, यकीन नहीं होगा

यह वीडियो दिखाता है कि विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए सबसे बड़ी चुनौती लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन है. यही वजह है कि कई लोग भारत लौटने को लेकर दुविधा में रहते हैं.

भारत लौटना NRIs के लिए क्यों है मुश्किल? बेल्जियम में रह रहे भारतीय ने बताई ऐसी वजह, यकीन नहीं होगा
न साफ हवा वजह, न लाइफस्टाइल… विदेश से भारत लौटने में सबसे बड़ी रुकावट क्या है?

अक्सर यह सवाल उठता है कि विदेश में रहने वाले भारतीय आखिर भारत क्यों नहीं लौटना चाहते. लोग मानते हैं कि बेहतर सुविधाएं और साफ-सुथरा माहौल इसकी वजह हैं. लेकिन, हाल ही में एक वीडियो ने इस सोच को चुनौती दी है, जिसमें एक भारतीय युवक ने विदेश से भारत लौटने की असली वजह बताई है.

आलेख श्रीवास्तव, जो इस समय बेल्जियम में काम कर रहे हैं, उन्होंने एक वीडियो के जरिए बताया कि विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भारत लौटना इतना आसान क्यों नहीं होता. उन्होंने कहा, कि अक्सर लोग मानते हैं कि जो लोग विदेश चले जाते हैं, वे वहां की साफ हवा, बेहतर सड़कें और अच्छी सुविधाओं के कारण वापस नहीं आना चाहते. लेकिन उनके अनुसार, यह पूरी सच्चाई नहीं है.

भारत vs विदेश: असली फर्क क्या है?

श्रीवास्तव ने बताया, कि जो लोग भारत में पले-बढ़े हैं, उन्होंने अपनी जिंदगी के 25-30 साल पहले ही यहां बिताए हैं, इसलिए उन्हें यहां की परिस्थितियों की आदत होती है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कई सुविधाएं हैं, जो विदेशों में नहीं मिलतीं. जैसे कि Zomato और Blinkit जैसी सेवाएं, साथ ही घरेलू मदद (house help) जैसी सुविधाएं, भारत में जीवन को कई मायनों में आसान बनाती हैं.

देखें Video:

सबसे बड़ा कारण: वर्क-लाइफ बैलेंस

श्रीवास्तव के अनुसार, असली समस्या लाइफस्टाइल नहीं बल्कि वर्क कल्चर है. उन्होंने बताया, कि यूरोप में आमतौर पर काम शाम 5 बजे खत्म हो जाता है और इसके बाद लोग अपने परिवार और निजी जिंदगी पर ध्यान देते हैं. इसके उलट, भारत में अगर कोई 5 बजे ऑफिस से निकल जाए, तो कई बार यह सवाल उठता है कि क्या आज हाफ डे था?

छुट्टियों को लेकर भी बड़ा अंतर

उन्होंने यह भी बताया, कि यूरोप में 2-3 हफ्तों की छुट्टी लेना सामान्य बात है और इससे काम पर कोई असर नहीं पड़ता. जबकि भारत में 3 दिन की छुट्टी लेना भी कई बार मुश्किल हो जाता है. छुट्टी लेने से पहले बैकअप की व्यवस्था करनी पड़ती है, और कई बार कर्मचारी को लगता है कि वही खुद बैकअप है.

सोचने वाली बात

वीडियो के कैप्शन में श्रीवास्तव ने कहा, कि यूरोप में रहने के बाद उन्हें समझ आया कि असली फर्क साफ हवा या आधुनिक शहर नहीं, बल्कि समय को देखने के नजरिए में है. उनके मुताबिक, यूरोप में शाम 5 बजे का मतलब होता है निजी जिंदगी की शुरुआत, जबकि भारत में यही समय अक्सर काम के दूसरे रूप की शुरुआत बन जाता है.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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