विज्ञापन

जर्मनी में सबकुछ बेचकर भारत आई महिला, रोते हुए बोली- वाराणसी में सपना पूरा होने जा रहा है

जर्मनी की एक महिला अपना 4 साल पुराना सपना पूरा करने के लिए जर्मनी में सबकुछ छोड़ दिया. इसके बाद वह फ्लाइट पकड़कर भारत आ गई है. महिला ने 22 साल की उम्र में बनाए विजन बोर्ड के बारे में बताया.

जर्मनी में सबकुछ बेचकर भारत आई महिला, रोते हुए बोली- वाराणसी में सपना पूरा होने जा रहा है
जर्मनी में सबकुछ बेचकर भारत आई महिला
Instagram/soulful.jasmine

Viral Video: एक जर्मन महिला जैस्मीन (Jasmine) को भारत की संस्कृति, यहां का आध्यात्म और भारतीय लोगों का प्यार ऐसा पसंद आया कि उसने जर्मनी में अपना सबकुछ छोड़ दिया. महिला फ्लाइट पकड़कर सीधे भारत आ गई. जर्मनी की महिला जैस्मीन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें बताया कि उसने अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना पूरा करने के लिए बनारस में स्टे बुक किया है. महिला का वाराणसी (बनारस) की देव दीपावली देखने का बड़ा सपना था, जो अब पूरा करने जा रही है.   

बनारसा में बुक किया स्टे

जर्मन महिला ने 22 साल की उम्र में ही अपने विजन बोर्ड में बनारस की देव दिवाली की जगह तय कर दी थी. उसने 3 दिन पहले इंस्टाग्राम पर बताया कि अभी-अभी बनारस में देव दीपावली के लिए अपना स्टे बुक किया. उसने वीडियो में कहा कि उसे अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि देव दीपावली के लिए यहां रहेगी. ये उसका सबसे बड़ा सपना है. बनारस की देव दीपावली देखना उसके विजन बोर्ड पर भी था. जर्मन लड़की ने बताया कि वह अपनी जिंदगी में एक बार बनारस में इसके लिए रहना चाहती थी. 

उसने एक अन्य पोस्ट में बताया कि वह यहां सिर्फ घूमने नहीं आई थी, उसकी चाहत कुछ और गहरी थी. यहां की संस्कृति, यहां के लोग, जीवन जीने का तरीका, धर्म... इन सबको बहुत करीब से महसूस करना चाहती थी. यहां की आध्यात्मिकता को करीब से समझने की चाहत थी.

पहले 1 साल के लिए आई थी भारत

जैस्मीन ने पोस्ट में कहा कि मैं यहां इतना समय बिताना चाहती थी कि भारत को सिर्फ एक यात्री की तरह न देखूं, बल्कि यहां के लोगों के बीच रहकर उनके साथ जीवन जी सकूं, थोड़ा ठहरूं, चीज़ों को देखूं, महसूस करू और सच में समझ सकूं कि भारत में रहना कैसा होता है. इसलिए अपने इस सपने को जैस्मीन ने सच कर दिखाया. वह एक साल के लिए भारत आ गई. उसे पूरा यकीन था कि इसके बाद वह वापस जर्मनी चली जाएगी.

जर्मन युवती ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि अपने शहर में एक फ्लैट ढूंढना, 9 से 7 की नौकरी करना और साल भर की छुट्टियों के दौरान अपनी ज़िंदगी के बारे में सपने देखना... यही सब मैं कर रही थी, लेकिन भारत के मन में मेरे लिए कुछ और ही योजनाएं थीं. शुरुआत से ही मैंने कुछ ऐसा महसूस किया जो पहले कभी नहीं किया था. मुझे भारत से प्यार हो गया. 

हमेशा के लिए छोड़ आई जर्मनी

जर्मनी छोड़कर हमेशा के लिए भारत आने से पहले एक वीडियो में जर्मन महिला जैस्मीन ने भावुक होते हुए कहा कि यह एक भावुक पल होने वाला है. मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि मैं एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हूं, जहां मैं अपने सपनों को पूरा करना चाहती हूं और अपने उस विज़न को साकार करना चाहती हूं कि मैं कहां पहुचना चाहती हूं और क्या करना चाहती हूं. लेकिन इसके साथ ही, मुझे कुछ चीज़ें पीछे भी छोड़नी पड़ेंगी.

पहले भी जब मैं भारत में रहने के बाद जर्मनी वापस आती थी, तो यह कमरा मेरे लिए एक सुरक्षित जगह (safe place) की तरह होता था. लेकिन भविष्य में अब ऐसा नहीं होगा. मतलब, अब यह कमरा वैसा नहीं रहेगा. जैसा यह अभी दिख रहा है, वैसा कल या आने वाले दिनों में नहीं दिखेगा, क्योंकि मैं अपना सामान पैक कर रही हूँ और कुछ चीज़ें बेच रही हूं... इसलिए यह वीडियो मेरे लिए भी एक याद बनकर रहेगा. 

जर्मनी की लड़की ने आगे लिखा कि मुझे एहसास हुआ, आप जो भी ढूंढते हैं, वह आपको ज़रूर मिल जाता है. उसने कहा कि बच्चों के साथ वॉलंटियर (स्वयंसेवक) के तौर पर काम करते हुए मुझे एक ऐसी खुशी मिली जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी. मैंने खुशी-खुशी अपना समय दिया, लेकिन बदले में मुझे उससे कहीं ज़्यादा मिला, जितना मुझे कभी किसी नौकरी से नहीं मिला था.

मुझे अपनी खुशी और सच्ची लगन की जगह मिल गई. इसने मुझे उस ज़िंदगी पर सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसे मैं अब तक अपनी 'सही' ज़िंदगी मानती थी. मुझे अब ऐसी ज़िंदगी नहीं चाहिए थी जो बाहर से तो सही लगे, बल्कि मैंने वह ढूंढना शुरू किया जो अंदर से सही लगे. भारत ने यह भी बदल दिया कि मैं ज़िंदगी का असली मकसद क्या मानती हूं. इसलिए मैं जर्मनी में अपना सबकुछ छोड़कर भारत चली आई.

यह भी पढ़ें | नौकरी के लिए दुबई गई भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर लड़की, बोली- हर किसी पर भरोसा मत कीजिए

22 साल की उम्र में बनाया विजन बोर्ड

एक अन्य वीडियो में अपने विजन बोर्ड को दिखाते हुए जैस्मीन ने बताया कि मैं 26 साल की हू और यह तस्वीर तब की है, जब मैं 22 साल की थी. लगभग चार साल पहले मैंने अपना पहला 'विज़न बोर्ड' बनाने का फैसला किया था. उस समय मैंने बस यूं ही अपने सारे सपने इस बोर्ड पर लगा दिए थे. आज जब मैं इसे देखती हूं, तो मैं बहुत भावुक हो जाती हूं, क्योंकि मैं लगभग अपनी हर इच्छा पूरी कर पाई हूं. मैंने भारत, श्रीलंका और नेपाल की यात्रा की. मैंने हिमालय में ट्रेकिंग की. मैंने ताजमहल देखा, शिव 'आदियोगी' की प्रतिमा देखी और सद्गुरु की सभी किताबें पढ़ीं. मैंने भारत में स्वयंसेवा (volunteering) की.

मैंने बच्चों के साथ काम किया, खूब साड़ियां पहनीं, एक बहुत अच्छी भारतीय सहेली बनाई, कविताएं लिखना शुरू किया और प्रकृति के बीच काफी समय बिताया. मैंने थिएटर में काम किया, जो मेरे लिए सबसे अर्थपूर्ण अनुभवों में से एक रहा. मैं करीब 4 बार बनारस गई और गंगा मां ने सच में मेरे दिल और आत्मा को छू लिया. मैंने अपने खान-पान की आदतों और भोजन के साथ अपने रिश्ते को सुधारा. मुझे कई नए दोस्त मिले और गहरे रिश्ते बने. मुझे अपनी भक्ति और आध्यात्मिकता मिली, यहां तक कि मुझे अपना प्यार और जीवनसाथी भी मिला. मेरे बाल भी काफी लंबे और घुंघराले हो गए हैं. मैंने अपनी खुशी की जगह पाने की कामना की थी, जो मुझे सच में भारत में मिल गई.

यह भी पढ़ें | भारत आई यूरोपीय महिला ने देखी रामायण, बोली- इंडिया में दिवाली जैसा कुछ नहीं

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
German Girl In India, German Girl India, German Girl India Trip, Viral News, Viral Video
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com